शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
राजानं च पृथुं वैन्यं मृतं शुश्रुम सृञ्जय़ |
१२९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
राजानं च समासाद्य गान्धारी भरतर्षभ |
४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५१
वैशम्पाय़न उवाच
राजानं च समासाद्य धर्मात्मानं युधिष्ठिरम् |
२२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
३६
सोम उवाच
राजानं चाप्ययोद्धारं व्राह्मणं चाप्रवासिनम् ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२३
वैशम्पाय़न उवाच
राजानं चाविरोद्धारं व्राह्मणं चाप्रवासिनम् ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५७
भीष्म उवाच
राजानं चाविरोद्धारं व्राह्मणं चाप्रवासिनम् ||
३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
३३
विदुर उवाच
राजानं चाविरोद्धारं व्राह्मणं चाप्रवासिनम् ||
४९ ख
सभा पर्व
अध्याय
५०
दुर्योधन उवाच
राजानं चाविरोद्धारं व्राह्मणं चाप्रवासिनम् ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय
२५६
भीमसेन उवाच
राजानं चाव्रवीद्भीमो द्रौपद्यै कथय़ेति वै |
१६ क
वन पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
राजानं तु कुरुश्रेष्ठं ते हंसमधुरस्वराः |
४३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२४
सञ्जय़ उवाच
राजानं तु तथाम्वष्ठमेकं युद्धाभिनन्दिनम् |
४७ क
आदि पर्व
अध्याय
४७
सूत उवाच
राजानं दीक्षय़ामासुः सर्पसत्राप्तय़े तदा ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय
५६
वृहदश्व उवाच
राजानं द्रष्टुमागच्छन्निवारय़ितुमातुरम् ||
११ ख
वन पर्व
अध्याय
३१
द्रौपद्यु उवाच
राजानं धर्मगोप्तारं धर्मो रक्षति रक्षितः |
७ क
विराट पर्व
अध्याय
४८
अर्जुन उवाच
राजानं नात्र पश्यामि गाः समादाय़ गच्छति |
११ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
राजानं निहतं दृष्ट्वा अभिसारं च मारिष |
१५ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
राजानं निहतं दृष्ट्वा भृशं शोकपराय़णाः |
२७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२४
सञ्जय़ उवाच
राजानं पाण्डवश्रेष्ठं धर्मात्मानं युधिष्ठिरम् |
१५ क
आदि पर्व
अध्याय
१४८
व्राह्मण उवाच
राजानं प्रथमं विन्देत्ततो भार्यां ततो धनम् |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५७
भीष्म उवाच
राजानं प्रथमं विन्देत्ततो भार्यां ततो धनम् |
४१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२६
ऋषभ उवाच
राजानं भगवान्विप्रस्ततः कृशतनुस्तनुः ||
३४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८९
युधिष्ठिर उवाच
राजानं भोजराजन्यवर्धनो विष्णुरव्रवीत् ||
६ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२४
सञ्जय़ उवाच
राजानं मृगय़ामासुस्तव पुत्रं महारथम् ||
५५ ग
शल्य पर्व
अध्याय
२१
सञ्जय़ उवाच
राजानं योधय़ामास पश्यतां सर्वधन्विनाम् ||
३० ख
आदि पर्व
अध्याय
९२
वैशम्पाय़न उवाच
राजानं रमय़ामास यथा रेमे तथैव सः ||
४१ ख
वन पर्व
अध्याय
७१
वृहदश्व उवाच
राजानं राजपुत्रं वा न स्म पश्यति कञ्चन |
२२ ख
सभा पर्व
अध्याय
५
नारद उवाच
राजानं राजपुत्रं वा प्रापय़ेन्महतीं श्रिय़म् ||
२६ ख
विराट पर्व
अध्याय
४
धौम्य उवाच
राजानं राजपुत्रं वा संवर्तय़ति यः सदा |
३२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
राजानं रोचमानं ते हय़ाः सङ्ख्ये समावहन् ||
४० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२१
भीष्म उवाच
राजानं वर्धय़न्तीह तस्माद्दण्डः पराय़णम् ||
३४ ख
वन पर्व
अध्याय
२९९
वैशम्पाय़न उवाच
राजानं वलिनां श्रेष्ठो गिरा सम्परिहर्षय़न् ||
२१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
राजानं विदुरश्चापि प्रज्ञाचक्षुषमीश्वरम् |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३९
वैशम्पाय़न उवाच
राजानं व्राह्मणच्छद्मा चार्वाको राक्षसोऽव्रवीत् ||
२२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१३४
कुन्त्यु उवाच
राजानं श्रावय़ेन्मन्त्री सीदन्तं शत्रुपीडितम् ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३७
भीष्म उवाच
राजानं समनुज्ञाप्य जगामाथेप्सितां दिशम् ||
१०८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
४१
वैशम्पाय़न उवाच
राजानं समनुज्ञाप्य तानि कार्याणि धर्मतः ||
१८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८७
वैशम्पाय़न उवाच
राजानं समनुज्ञाप्य निराक्रामदरिन्दमः ||
२१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७८
सञ्जय़ उवाच
राजानं सर्वलोकस्य रथमारोपय़त्स्वकम् ||
४९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९२
सञ्जय़ उवाच
राजानं सर्वलोकस्य सर्वशस्त्रभृतां वरम् |
१० क
सभा पर्व
अध्याय
६९
युधिष्ठिर उवाच
राजानं सोमदत्तं च महाराजं च वाह्लिकम् ||
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२८३
पराशर उवाच
राजानः क्षत्रिय़ाश्चैव मण्डलेषु पृथक्पृथक् ||
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
६४
भीष्म उवाच
राजानः पर्युपातिष्ठन्दृष्टान्तवचने स्थिताः ||
८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
९२
वैशम्पाय़न उवाच
राजानः पार्थिवाः सर्वे कुरवश्च जनार्दनम् ||
३९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५६
धृतराष्ट्र उवाच
राजानः पार्थिवाः सर्वे प्रोक्षिताः कालधर्मणा |
२७ क
वन पर्व
अध्याय
३७
वैशम्पाय़न उवाच
राजानः पार्थिवाश्चैव येऽस्माभिरुपतापिताः |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
४
नारद उवाच
राजानः शतशस्तत्र कन्यार्थं समुपागमन् ||
३ ख
सभा पर्व
अध्याय
१३
श्रीकृष्ण उवाच
राजानः श्रेणिवद्धाश्च ततोऽन्ये क्षत्रिय़ा भुवि ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२००
भीष्म उवाच
राजानः समसज्जन्त समासाद्येतरेतरम् ||
४३ ख
सभा पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
राजानः सर्व एवैते प्रीत्यास्मान्समुपागताः |
३९ क
शल्य पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
राजानः सोमकाश्चैव ये तत्रासन्समागताः ||
४० ख