chevron_left  रथाश्वमातङ्गगणान्सहस्रशः;arrow_drop_down
कर्ण पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
रथाश्वमातङ्गगणान्सहस्रशः; समास्थितो हन्ति शरैर्द्विपानपि ||
६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६२
सञ्जय़ उवाच
रथाश्वमातङ्गपदातिभिस्ततः; परस्परं विप्रहतापतन्क्षितौ |
४१ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५५
सञ्जय़ उवाच
रथाश्वमातङ्गपदातिसङ्घा; वाणस्वनैर्नेमिखुरस्वनैश्च |
४ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६०
सञ्जय़ उवाच
रथाश्वमातङ्गविनाशनं तथा; यथा सुराणामसुरैः पुराभवत् ||
२७ ख
आदि पर्व
अध्याय १८६
वैशम्पाय़न उवाच
रथाश्ववर्माणि च भानुमन्ति; खड्गा महान्तोऽश्वरथाश्च चित्राः |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय १०१
भीष्म उवाच
रथाश्ववहुला सेना सुदिनेषु प्रशस्यते ||
२१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ४८
सञ्जय़ उवाच
रथाश्ववृन्दैः सहसादिभिर्हतैः; प्रविद्धभाण्डाभरणैः पृथग्विधैः |
४५ क
कर्ण पर्व
अध्याय १९
सञ्जय़ उवाच
रथाश्वसादिभिस्तत्र सम्भिन्ना न्यपतन्भुवि ||
५८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
रथाश्वेभनराणां च नराश्वेभरथैः कृतम् |
१२ क
सभा पर्व
अध्याय ५४
युधिष्ठिर उवाच
रथास्तावन्त एवेमे हेमभाण्डाः पताकिनः |
१९ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८३
सञ्जय़ उवाच
रथास्तु रथिभिस्तूर्णं प्रेषिताः परमाहवे |
३२ क
उद्योग पर्व
अध्याय १४९
वैशम्पाय़न उवाच
रथाय़ुतानि चत्वारि हय़ाः पञ्चगुणास्ततः |
६१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९६
सञ्जय़ उवाच
रथिनं च रथात्तूर्णं हय़पृष्ठाच्च सादिनम् |
५ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ४
कृप उवाच
रथिनं त्वरय़ा यान्तं रथावास्थाय़ दंशितौ ||
१२ ग
द्रोण पर्व
अध्याय ४४
सञ्जय़ उवाच
रथिनः कुञ्जरानश्वान्पदातींश्चावमर्दितान् |
२९ क
शल्य पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
रथिनः पतमानाश्च व्यदृश्यन्त नरोत्तम |
३४ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७१
सञ्जय़ उवाच
रथिनः पत्तिभिः सार्धं सादिनश्चापि पत्तिभिः |
२५ क
भीष्म पर्व
अध्याय ६५
सञ्जय़ उवाच
रथिनः पत्तय़श्चैव दन्तिनः सादिनस्तथा ||
६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २१
सञ्जय़ उवाच
रथिनः समहामात्रान्गजानश्वान्ससादिनः |
२९ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११०
सञ्जय़ उवाच
रथिनः सादिनश्चैव तत्र तत्र निसूदिताः |
१४ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
रथिनः सादिनश्चैव नागानश्वान्पदातिनः |
४ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७५
सञ्जय़ उवाच
रथिनः सादिनश्चैव व्यकीर्यन्त सहस्रशः ||
५६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७७
सञ्जय़ उवाच
रथिनः सादिनश्चैव सिंहनादमथानदन् ||
२२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९१
सञ्जय़ उवाच
रथिनश्च तथा राजन्कर्णिनालीकसाय़कैः |
३० क
शल्य पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
रथिनश्च नरव्याघ्र हय़ाश्च निहता युधि ||
३१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९९
सञ्जय़ उवाच
रथिनश्च रथैर्हीना वर्मिणस्तेजसा युताः |
२१ क
द्रोण पर्व
अध्याय ३१
सञ्जय़ उवाच
रथिना ताडितो नागो नाराचेनापतद्व्यसुः |
२२ क
द्रोण पर्व
अध्याय ६५
सञ्जय़ उवाच
रथिनां कुट्टय़ामास भल्लैः संनतपर्वभिः ||
२३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ७
सञ्जय़ उवाच
रथिनां च महाराज अन्योन्यं निघ्नतां दृढम् ||
४२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२८
सञ्जय़ उवाच
रथिनां रथिभिः सार्धं रुधिरस्रावि दारुणम् |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०४
सञ्जय़ उवाच
रथिनां सादिनां चैव तय़ोः श्रुत्वा तलस्वनम् ||
११ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २५
दुर्योधन उवाच
रथिनाभ्यधिको वीरः कर्तव्यो रथसारथिः |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय १५०
सञ्जय़ उवाच
रथिनामृषभं कर्णं धाराभिरिव तोय़दः |
६५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३१
सञ्जय़ उवाच
रथिनामृषभं द्रौणिं धाराभिरिव तोय़दः ||
६४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४१
सञ्जय़ उवाच
रथिनामृषभं द्रौणिं धाराभिरिव तोय़दः ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय ६४
वैशम्पाय़न उवाच
रथिनीमश्वसम्वाधां पदातिगणसङ्कुलाम् |
२६ क
द्रोण पर्व
अध्याय ३१
सञ्जय़ उवाच
रथिनो नागपत्त्यश्वै रथपत्ती रथद्विपैः ||
७० ख
द्रोण पर्व
अध्याय ६६
सञ्जय़ उवाच
रथिनो रथमुख्येभ्यः सहय़ाः शरपीडिताः ||
१७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८९
सञ्जय़ उवाच
रथिनो रथिभिः सार्धं कुलपुत्रास्तनुत्यजः |
३९ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३३
सञ्जय़ उवाच
रथिनो रथिभिः सार्धं चित्रं युय़ुधुराहवे |
५८ क
द्रोण पर्व
अध्याय ७२
सञ्जय़ उवाच
रथिनो रथिभिः सार्धमश्वारोहाश्च सादिभिः |
१९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७३
वैशम्पाय़न उवाच
रथिनो वद्धतूणीराः सदश्वैः समलङ्कृतैः |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३०
धृतराष्ट्र उवाच
रथिनो विरथांश्चैव कृतान्युद्धेषु मामकान् ||
९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३९
धृतराष्ट्र उवाच
रथिनो विरथांश्चैव कृतान्युद्धेषु मामकान् ||
१५ ग
द्रोण पर्व
अध्याय ७३
सञ्जय़ उवाच
रथिनो हस्तिय़न्तारो हय़ारोहाः पदातय़ः |
२३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८०
सञ्जय़ उवाच
रथिनो हेमसंनाहाः सौभद्रमभिदुद्रुवुः ||
३८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०४
सञ्जय़ उवाच
रथिनोऽपातय़द्राजन्रथेभ्यः पुरुषर्षभः ||
३१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १९
सञ्जय़ उवाच
रथिभिः पातिता भल्लैर्विकीर्णाङ्कुशतोमराः ||
५२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६९
सञ्जय़ उवाच
रथिभिः सादिभिश्चैव समास्तीर्यत मेदिनी ||
४१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८६
सञ्जय़ उवाच
रथिभिर्निहता राजंस्तव तेषां च सङ्कुले ||
७४ ख