chevron_left  रथाग्न्यगारश्चापार्चिरसिशक्तिगदेन्धनःarrow_drop_down
भीष्म पर्व
अध्याय १०२
सञ्जय़ उवाच
रथाग्न्यगारश्चापार्चिरसिशक्तिगदेन्धनः |
१० क
भीष्म पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
रथाग्न्यगारश्चापार्चिरसिशक्तिगदेन्धनः |
६५ क
आदि पर्व
अध्याय १५८
गन्धर्व उवाच
रथाङ्गं वडवा सूते सूताश्चाश्वेषु ये मताः ||
५० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३५
भीष्म उवाच
रथाङ्गपाणिरक्षोभ्यः सर्वप्रहरणाय़ुधः ||
१२० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७५
सञ्जय़ उवाच
रथाच्च स ध्वजः श्रीमान्नानारत्नविभूषितः |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
रथातिरथसङ्ख्या च पर्वोक्तं तदनन्तरम् |
५३ क
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
रथातिरथसङ्ख्यानमम्वोपाख्यानमेव च ||
१५० ग
कर्ण पर्व
अध्याय ३०
शल्य उवाच
रथातिरथसङ्ख्याय़ां यत्त्वा भीष्मस्तदाव्रवीत् |
८४ क
द्रोण पर्व
अध्याय १
सञ्जय़ उवाच
रथातिरथसङ्ख्याय़ां योऽग्रणीः शूरसंमतः |
३५ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०१
सञ्जय़ उवाच
रथात्पुरुषशार्दूलः सम्भिन्नहृदय़ोऽपतत् ||
२१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
रथात्प्रपतितं चैनं दिव्यो भावः समाविशत् ||
८५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५
धृतराष्ट्र उवाच
रथादतिरथो नूनमपतत्साय़कार्दितः ||
४० ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४२
सञ्जय़ उवाच
रथादनवरूढस्य तदद्भुतमिवाभवत् ||
३६ ग
भीष्म पर्व
अध्याय ४९
सञ्जय़ उवाच
रथादनवरूढस्य तदद्भुतमिवाभवत् ||
२९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
रथादनवरूढस्य तदद्भुतमिवाभवत् ||
६५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६१
सञ्जय़ उवाच
रथादवप्लुत्य गतः स भूमौ; यत्नेन तस्मिन्प्रणिधाय़ चक्षुः ||
५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४९
सञ्जय़ उवाच
रथादवप्लुत्य गदां परामृशं; स्तय़ा निहन्त्यश्वनरद्विपान्रणे ||
७५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५५
सञ्जय़ उवाच
रथादवप्लुत्य ततस्त्वरावा; न्पार्थोऽप्यनुद्रुत्य यदुप्रवीरम् |
९६ क
शल्य पर्व
अध्याय ९
सञ्जय़ उवाच
रथादवातरद्वीरः शैलाग्रादिव केसरी ||
१६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४५
भीम उवाच
रथादुभौ प्रत्यवरुह्य तस्मा; द्ववन्दतुर्धर्मराजस्य पादौ ||
७० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
रथाद्रथमभिद्रुत्य पर्यष्वजत पाण्डवम् ||
११४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३०
सञ्जय़ उवाच
रथाद्रथमभिद्रुत्य मुष्टिनाभिजघान ह ||
२० ख
कर्ण पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
रथानधिष्ठाय़ सवाजिसारथी; न्रथांश्च पद्भिस्त्वरितो व्यपोथय़त् |
७ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
रथानश्वान्ध्वजान्नागान्पत्तीन्रथपतीनपि |
११ क
द्रोण पर्व
अध्याय ७
सञ्जय़ उवाच
रथानश्वान्नरान्नागानभिधावंस्ततस्ततः |
९ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३३
सञ्जय़ उवाच
रथानश्वान्नरान्नागानाय़ुधाभरणानि च |
६५ क
आदि पर्व
अध्याय २१३
वैशम्पाय़न उवाच
रथानां काञ्चनाङ्गानां किङ्किणीजालमालिनाम् |
४१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०६
भगीरथ उवाच
रथानां काञ्चनाङ्गानां सहस्राण्यददं दश |
२० ख
उद्योग पर्व
अध्याय १६५
सञ्जय़ उवाच
रथानां क्व च विज्ञानं क्व च भीष्मोऽल्पचेतनः |
२० क
द्रोण पर्व
अध्याय १४४
सञ्जय़ उवाच
रथानां च रणे राजन्नन्योन्यमभिधावताम् |
२९ क
द्रोण पर्व
अध्याय ६९
सञ्जय़ उवाच
रथानां च सहस्रेण त्रिगर्तानां प्रहारिणाम् ||
७२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
रथानां चक्ररक्षाश्च पादरक्षाश्च दन्तिनाम् |
१६ क
उद्योग पर्व
अध्याय १६२
भीष्म उवाच
रथानां तव सेनाय़ां यथामुख्यं तु मे शृणु ||
१८ ख
शल्य पर्व
अध्याय २६
सञ्जय़ उवाच
रथानां तु शते शिष्टे द्वे एव तु जनार्दन |
१५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
रथानां द्रवतां वृन्दं पश्य पार्थ समन्ततः |
२८ क
शल्य पर्व
अध्याय २८
सञ्जय़ उवाच
रथानां द्वे सहस्रे तु सप्त नागशतानि च |
२१ क
भीष्म पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
रथानां नेमिघोषैश्च दीर्यतीव वसुन्धरा ||
२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २३
सञ्जय़ उवाच
रथानां प्रवरः कर्णो यन्तॄणां प्रवरो भवान् |
१६ क
सभा पर्व
अध्याय ५४
युधिष्ठिर उवाच
रथानां शकटानां च हय़ानां चाय़ुतानि मे |
२४ क
शल्य पर्व
अध्याय ७
सञ्जय़ उवाच
रथानां षट्सहस्राणि षट्सहस्राश्च कुञ्जराः |
३९ क
कर्ण पर्व
अध्याय १९
सञ्जय़ उवाच
रथानां सपताकानां तूणीराणां शरैः सह ||
२३ ख
शल्य पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
रथानां सवरूथानां विधूमोऽग्निरिव ज्वलन् ||
१८ ख
सभा पर्व
अध्याय ४८
दुर्योधन उवाच
रथानामर्वुदं चापि पादाता वहवस्तथा ||
३६ ख
विराट पर्व
अध्याय ६७
वैशम्पाय़न उवाच
रथानामर्वुदं पूर्णं निखर्वं च पदातिनाम् ||
२३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७७
सञ्जय़ उवाच
रथानामय़ुतं चापि पुत्राश्च तव दंशिताः |
१६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३७
सञ्जय़ उवाच
रथानामय़ुतं चैव त्रिसाहस्राश्च दन्तिनः ||
३६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७०
सञ्जय़ उवाच
रथानामय़ुतं तस्य प्रेषय़ामास भारत ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४६
सञ्जय़ उवाच
रथानामय़ुतं पक्षौ शिरश्च निय़ुतं तथा |
५२ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६
सञ्जय़ उवाच
रथानामय़ुतेनैव सोऽशपद्भ्रातृभिः सह ||
२० ख
आदि पर्व
अध्याय ९६
वैशम्पाय़न उवाच
रथानास्थाय़ ते वीराः सर्वप्रहरणान्विताः |
१८ ख