द्रोण पर्व
अध्याय
७४
सञ्जय़ उवाच
रथसागरमक्षोभ्यं मातङ्गाङ्गशिलाचितम् |
५३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७४
सञ्जय़ उवाच
रथसिंहं रथोदाराः सिंहं मत्ता इव द्विपाः ||
४५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६८
सञ्जय़ उवाच
रथसिंहासनव्याघ्राः समाय़ान्तश्च संय़ुगे |
१९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
रथसेनं हय़श्रेष्ठाः समूहुर्युद्धदुर्मदम् ||
५२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५१
वैशम्पाय़न उवाच
रथस्थं तु महातेजा वासुदेवं धनञ्जय़ः |
५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
रथस्थं नृपतिं तं तु पदातिः सन्नय़ोधय़त् ||
२५ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
५
सञ्जय़ उवाच
रथस्थं पुरुषव्याघ्रं दृष्ट्वा कर्णमवस्थितम् |
१ क
सभा पर्व
अध्याय
२२
वैशम्पाय़न उवाच
रथस्थं मागधा दृष्ट्वा समपद्यन्त विस्मिताः ||
१९ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१३
वैशम्पाय़न उवाच
रथस्थं शार्ङ्गधन्वानमश्विनाविव वासवम् ||
६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
रथस्थं सूतपुत्रस्य केतुं केतुमतां वर ||
२९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२०
सञ्जय़ उवाच
रथस्थः स तय़ा विद्धो वर्म भित्त्वा महाहवे |
३० क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७२
भीष्म उवाच
रथस्थस्य हि शक्रस्य युद्धकाले महात्मनः |
४४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
रथस्थां शतकुम्भां च सरय़ूं च नरेश्वर |
१८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५३
वैशम्पाय़न उवाच
रथस्थाः संविदं कृत्वा सुखां पृष्ट्वा च शर्वरीम् |
२० क
भीष्म पर्व
अध्याय
४१
सञ्जय़ उवाच
रथस्थान्पुरुषव्याघ्रान्पाण्डवान्प्रेक्ष्य पार्थिवाः |
९९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७४
सञ्जय़ उवाच
रथस्थितः क्रोशमात्रे यानस्यत्यर्जुनः शरान् |
९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
रथस्थे तु नरव्याघ्रे धार्तराष्ट्राः पराङ्मुखाः |
६७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३८
सञ्जय़ उवाच
रथस्थो रथिनः सर्वांस्तावकानप्यहर्षय़त् ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११७
सञ्जय़ उवाच
रथस्थय़ोर्द्वय़ोर्युद्धे क्रुद्धय़ोर्योधमुख्ययोः |
४६ क
विराट पर्व
अध्याय
४१
उत्तर उवाच
रथस्य च निनादेन मनो मुह्यति मे भृशम् ||
१५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०
धृतराष्ट्र उवाच
रथस्य तस्य कः सङ्ख्ये प्रत्यनीको भवेद्रथः ||
३६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१५२
वैशम्पाय़न उवाच
रथस्य नागाः पञ्चाशन्नागस्यासञ्शतं हय़ाः |
२० क
मौसल पर्व
अध्याय
९
व्यास उवाच
रथस्य पुरतो याति यः स चक्रगदाधरः |
२८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१५२
वैशम्पाय़न उवाच
रथस्यासन्दश गजा गजस्य दश वाजिनः |
१९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३३
सञ्जय़ उवाच
रथहस्त्यश्वपत्तीनां सहस्रैः परिवारितः ||
१ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१०
वैशम्पाय़न उवाच
रथह्रदं शरवर्षोर्मिमन्तं; रत्नाचितं वाहनराजिय़ुक्तम् |
१७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९९
सञ्जय़ उवाच
रथह्रदा शरावर्ता हय़मीना दुरासदा ||
३४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५९
भीष्म उवाच
रथा नागा हय़ाश्चैव पादाताश्चैव पाण्डव |
४१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३९
सञ्जय़ उवाच
रथा रथवरैरेव समाजग्मुर्मुदान्विताः |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४४
सञ्जय़ उवाच
रथा रथान्समासाद्य प्रद्रुता वेगवत्तरम् |
३२ क
विराट पर्व
अध्याय
३१
वैशम्पाय़न उवाच
रथा रथैः समाजग्मुः पादातैश्च पदातय़ः |
८ क
कर्ण पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
रथा रथैर्विनिहता मत्ता मत्तैर्द्विपैर्द्विपाः |
९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
रथा वररथैर्नागैरश्वारोहाश्च पत्तिभिः |
१० क
भीष्म पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
रथा विंशतिसाहस्रास्तथैषामनुय़ाय़िनः |
१२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५९
सञ्जय़ उवाच
रथा हीना महाराज रथिभिर्वाजिभिस्तथा |
१७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
रथा हय़ाश्च राजेन्द्र परिवव्रुर्वृकोदरम् ||
३२ ख
आदि पर्व
अध्याय
१९१
वैशम्पाय़न उवाच
रथांश्च दान्तान्सौवर्णैः शुभैः पट्टैरलङ्कृतान् ||
१७ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
२६
वैशम्पाय़न उवाच
रथांश्च मृदितांस्तत्र नानाप्रहरणानि च ||
२९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
रथांश्च रथिनो जघ्नुर्वारणा वरवारणान् ||
३७ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१६
सञ्जय़ उवाच
रथांश्च रथिभिः सार्धं जघान रथिनां वरः ||
४ ग
सभा पर्व
अध्याय
४७
दुर्योधन उवाच
रथांश्च विविधाकाराञ्जातरूपपरिष्कृतान् |
२९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
रथांश्च विविधान्राजन्पताका व्यजनानि च ||
३७ ख
वन पर्व
अध्याय
१४१
भीम उवाच
रथाः कामं निवर्तन्तां सर्वे च परिचारकाः |
१० क
कर्ण पर्व
अध्याय
३५
सञ्जय़ उवाच
रथाः पञ्चशताश्चान्ये ह्रादिनश्चर्मवर्मिणः |
३३ क
शल्य पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
रथाः सप्तशता वीरा निर्ययुर्महतो वलात् ||
१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६५
सञ्जय़ उवाच
रथाः स्वनन्ति चात्यर्थं हय़ाश्चाश्रूण्यवासृजन् ||
१२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५०
सञ्जय़ उवाच
रथाक्षमात्रैरिषुभिः सर्वाः प्रच्छादय़न्दिशः |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३१
सञ्जय़ उवाच
रथाक्षमात्रैरिषुभिरभ्यवर्षद्घटोत्कचः |
६४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४१
सञ्जय़ उवाच
रथाक्षमात्रैरिषुभिरभ्यवर्षद्घटोत्कचः |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५०
सञ्जय़ उवाच
रथाक्षमात्रैरिषुभिरभ्यवर्षद्घटोत्कचः |
६५ क