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कर्ण पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
येन त्वं युध्यसे पार्थ तस्मान्नास्ति त्वय़ा समः ||
५६ ख
वन पर्व
अध्याय २३
वासुदेव उवाच
येन त्वं योधितो वीर द्वारका चावमर्दिता ||
२५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १२१
नारद उवाच
येन त्वां नाभिजानन्ति ततोऽज्ञात्वासि पातितः ||
८ ख
आदि पर्व
अध्याय ४१
पितर ऊचुः
येन त्वां नाभिजानीमो लोके विख्यातपौरुषम् ||
१४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ३७
विदुर उवाच
येन त्वेतानि सर्वाणि सङ्गृहीतानि भारत |
५१ क
द्रोण पर्व
अध्याय १७३
व्यास उवाच
येन दत्तानि तेऽस्त्राणि यैस्त्वय़ा दानवा हताः ||
१०० ख
वन पर्व
अध्याय २९२
वैशम्पाय़न उवाच
येन दत्तोऽसि मे पुत्र दिव्येन विधिना किल ||
१३ ख
स्त्री पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
येन दह्यन्ति गात्राणि येन प्रज्ञा विनश्यति |
८ क
कर्ण पर्व
अध्याय २
सञ्जय़ उवाच
येन दिव्यास्त्रविच्छूरो माय़ावी स घटोत्कचः |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३१८
नारद उवाच
येन देवाः परित्यज्य मर्त्यलोकं दिवं गताः ||
४५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ८०
व्यास उवाच
येन देवाः पवित्रेण भुञ्जते लोकमुत्तमम् |
३४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
शक्र उवाच
येन देवादृतेऽन्यस्मात्प्रसादं नाभिकाङ्क्षसि ||
९९ ख
विराट पर्व
अध्याय ३८
वृहन्नडो उवाच
येन देवान्मनुष्यांश्च पार्थो विषहते मृधे ||
३८ ख
विराट पर्व
अध्याय ५
वैशम्पाय़न उवाच
येन देवान्मनुष्यांश्च सर्पांश्चैकरथोऽजय़त् |
१६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७
संवर्त उवाच
येन देवान्सगन्धर्वाञ्शक्रं चाभिभविष्यसि ||
२५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ५७
सञ्जय़ उवाच
येन देवारय़ः सर्वे मय़ा युधि निपातिताः |
६५ क
आदि पर्व
अध्याय ५७
वैशम्पाय़न उवाच
येन देशः स सर्वस्तु तमोभूत इवाभवत् ||
५९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २२
सञ्जय़ उवाच
येन दैत्यगणान्राजञ्जितवान्वै शतक्रतुः |
३७ क
वन पर्व
अध्याय ५३
वृहदश्व उवाच
येन दोषो न भविता तव राजन्कथञ्चन ||
९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ७६
अर्जुन उवाच
येन धर्मसुते दृष्ट्वा न सा श्रीरुपमर्षिता ||
१२ ख
सभा पर्व
अध्याय ३९
शिशुपाल उवाच
येन धर्मात्मनात्मानं व्रह्मण्यमभिजानता |
४ क
आदि पर्व
अध्याय २१५
वैशम्पाय़न उवाच
येन नागान्पिशाचांश्च निहन्यान्माधवो रणे ||
१७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २
सञ्जय़ उवाच
येन नागाय़ुतप्राणो भीमसेनो महावलः |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय २५
सञ्जय़ उवाच
येन नागेन मघवानजय़द्दैत्यदानवान् |
२० क
अनुशासन पर्व
अध्याय २
भीष्म उवाच
येन नाशं जगामाग्निः कृतं कुपुरुषेष्विव ||
२४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १८७
भीष्म उवाच
येन पश्यति तच्चक्षुः शृणोति श्रोत्रमुच्यते |
१८ क
विराट पर्व
अध्याय ३८
वृहन्नडो उवाच
येन पार्थोऽजय़त्कृत्स्नां दिशं प्राचीं परन्तपः ||
४३ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय १
धृतराष्ट्र उवाच
येन पुत्रशतं पूर्णमेकेन निहतं मम ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २३७
व्यास उवाच
येन पूर्णमिवाकाशं भवत्येकेन सर्वदा |
११ क
मौसल पर्व
अध्याय ९
अर्जुन उवाच
येन पूर्वं प्रदग्धानि शत्रुसैन्यानि तेजसा |
२१ क
वन पर्व
अध्याय ४५
वैशम्पाय़न उवाच
येन पूर्वं महात्मानः खनमाना रसातलम् |
२६ क
द्रोण पर्व
अध्याय १७०
सञ्जय़ उवाच
येन प्रव्राज्यमानाश्च राज्याद्वय़मधर्मतः |
३५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ७
भीष्म उवाच
येन प्रीणाति पितरं तेन प्रीतः प्रजापतिः |
२५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ७
भीष्म उवाच
येन प्रीणात्युपाध्याय़ं तेन स्याद्व्रह्म पूजितम् ||
२५ ग
शान्ति पर्व
अध्याय १०९
भीष्म उवाच
येन प्रीणात्युपाध्याय़ं तेन स्याद्व्रह्म पूजितम् |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय १०९
भीष्म उवाच
येन प्रीताश्च पितरस्तेन प्रीतः पितामहः |
२२ क
उद्योग पर्व
अध्याय ५०
धृतराष्ट्र उवाच
येन भीमवला यक्षा राक्षसाश्च समाहताः |
१६ क
भीष्म पर्व
अध्याय २६
श्रीभगवानु उवाच
येन भूतान्यशेषेण द्रक्ष्यस्यात्मन्यथो मय़ि ||
३५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ६९
दुर्योधन उवाच
येन भोजश्च हार्दिक्यो भवांश्च त्रिदशोपमः |
२९ क
द्रोण पर्व
अध्याय १२६
सञ्जय़ उवाच
येन मन्त्रेण निहताः शतशः क्षत्रिय़र्षभाः ||
४ ख
स्त्री पर्व
अध्याय १
धृतराष्ट्र उवाच
येन मां दुःखभागेषु धाता कर्मसु युक्तवान् ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १०७
राजपुत्र उवाच
येन मां नाभिशङ्केत यद्वा कृत्स्नं हितं भवेत् ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १३४
भीष्म उवाच
येन मार्गेण राजानः कोशं सञ्जनय़न्ति च ||
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३८
युधिष्ठिर उवाच
येन मुह्यति मे चेतश्चिन्तय़ानस्य नित्यशः ||
४ ख
आदि पर्व
अध्याय १५५
व्राह्मण उवाच
येन मे कर्मणा व्रह्मन्पुत्रः स्याद्द्रोणमृत्यवे |
११ क
विराट पर्व
अध्याय ६४
विराट उवाच
येन मे त्वं च गावश्च रक्षिता देवसूनुना ||
३१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२७
वैशम्पाय़न उवाच
येन यः कल्पितो भागः स तथा समुपागतः |
५२ क
वन पर्व
अध्याय ८३
पुलस्त्य उवाच
येन यत्पूर्वमभ्यस्तं तत्तस्य समुपस्थितम् ||
४५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३०८
भीष्म उवाच
येन यत्सिध्यते कार्यं तत्प्राधान्याय़ कल्पते ||
१५६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २१२
भीष्म उवाच
येन यस्त्रिविधो भावः पर्याय़ात्समुपस्थितः ||
२४ ख