स्त्री पर्व
अध्याय
१५
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्य नृपतेर्धर्मज्ञा धर्मदर्शिनी |
६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्य पुरुषाः के नु चक्रुः सभा इमाः |
१० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
४९
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरस्य भद्रं ते स सर्वाननुशास्ति च ||
४ ख
विराट पर्व
अध्याय
३८
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्य भीमस्य वीभत्सोर्यमय़ोस्तथा |
५ क
वन पर्व
अध्याय
२४३
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्य यज्ञेन न समो ह्येष तु क्रतुः |
३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८५
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्य वचनं न च ते जगृहुर्हितम् ||
३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५
धृतराष्ट्र उवाच
युधिष्ठिरस्य वचनं मा युद्धमिति सर्वदा |
४८ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२०
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्य वचनात्तदापृच्छन्ति तं नृपम् ||
७ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३०
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्य वचनात्पुरगुप्तिं प्रचक्रतुः ||
१५ ख
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
युधिष्ठिरस्य शौचेन प्रीताः प्रकृतय़ोऽभवन् |
८० क
शल्य पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरस्य सङ्क्रुद्धो वासुदेवोऽव्रवीदिदम् ||
१ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८३
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्य सन्देशो न हन्तव्या नृपा इति |
२५ क
स्त्री पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्य समितौ राजसूय़े निवेदितम् ||
३२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५४
दुर्योधन उवाच
युधिष्ठिरस्य सर्वे हि पार्थिवा वशवर्तिनः ||
१२ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्य सुहृदो दर्शय़ेति परन्तप ||
१४ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१३
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्यानुमते कदारण्यं गमिष्यसि ||
७ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१३
धृतराष्ट्र उवाच
युधिष्ठिरस्यानुमते गन्तास्मि नचिराद्वनम् ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय
७
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्यानुमते पुनराय़ाद्गजाह्वय़म् ||
१७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
४७
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरस्यानुमते महात्मा; धनञ्जय़ः शृण्वतः केशवस्य ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय
२२२
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्यानुय़ात्रमिन्द्रप्रस्थनिवासिनः ||
४८ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२७
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्याप्यभवत्तदा मति; र्न कर्णतुल्योऽस्ति धनुर्धरः क्षितौ ||
२४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१६
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरस्याभिमुखं जवेन; सिंहो यथा मृगहेतोः प्रय़ातः ||
३४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२०
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरस्याभिमुखं प्रेषय़ामास संय़ुगे ||
८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८२
अर्जुन उवाच
युधिष्ठिरस्याश्वमेधः परां चैत्रीं भविष्यति |
२४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७५
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्याश्वमेधो भवद्भिरनुभूय़ताम् ||
२३ ख
विराट पर्व
अध्याय
६
युधिष्ठिर उवाच
युधिष्ठिरस्यासमहं पुरा सखा; वैय़ाघ्रपद्यः पुनरस्मि व्राह्मणः |
१० क
विराट पर्व
अध्याय
६०
अर्जुन उवाच
युधिष्ठिरस्यास्मि निदेशकारी; पार्थस्तृतीय़ो युधि च स्थिरोऽस्मि |
१७ क
विराट पर्व
अध्याय
११
विराट उवाच
युधिष्ठिरस्येव हि दर्शनेन मे; समं तवेदं प्रिय़दर्श दर्शनम् |
११ क
वन पर्व
अध्याय
२३८
दुर्योधन उवाच
युधिष्ठिरस्योपहृतः किं नु दुःखमतः परम् ||
६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरात्तु तद्वाक्यं श्रुत्वा द्रोणो महारथः |
१०८ क
आदि पर्व
अध्याय
२१३
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरात्प्रतिविन्ध्यं सुतसोमं वृकोदरात् |
७२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरानीकमदीनय़ोधी; द्रोणोऽभ्ययात्कार्मुकवाणपाणिः ||
२४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरानीकमभिद्रवन्तं; प्रोवाच सन्दृश्य शिनिप्रवीरः ||
७८ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२९
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरानुरक्तानां पर्यतप्यत दुर्मतिः ||
९ ख
सभा पर्व
अध्याय
३६
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिराभिषेकं च वासुदेवस्य चार्हणम् |
९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९१
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिराभ्यनुज्ञाताः सर्वं तद्व्यभजन्द्विजाः ||
२४ ग
सभा पर्व
अध्याय
२२
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिराभ्यनुज्ञातास्ते नृपा हृष्टमानसाः |
५० क
वन पर्व
अध्याय
१२७
लोमश उवाच
युधिष्ठिरासीन्नृपतिः सोमको नाम धार्मिकः |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
४८
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिराय़ प्रोवाच जामदग्न्यस्य विक्रमम् ||
७ ख
सभा पर्व
अध्याय
२५
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिराय़ यत्किञ्चित्करवन्नः प्रदीय़ताम् ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
४८
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिराय़ाप्रतिमौजसे तदा; यथाभवत्क्षत्रिय़सङ्कुला मही ||
१५ ख
सभा पर्व
अध्याय
६०
प्रातिकाम्यु उवाच
युधिष्ठिरे द्यूतमदेन मत्ते; दुर्योधनो द्रौपदि त्वामजैषीत् |
४ क
विराट पर्व
अध्याय
२७
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरे समासक्तां धर्मज्ञे धर्मसंश्रिताम् |
३ क
वन पर्व
अध्याय
२७
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरे स्तूय़माने भूय़ः सुमनसोऽभवन् ||
२१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४२
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरेण चादिष्टाः पार्थिवास्ते सहस्रशः |
२७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८०
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरेण दाशार्ह तच्चापि विदितं तव |
६ क
स्त्री पर्व
अध्याय
२३
गान्धार्यु उवाच
युधिष्ठिरेण निहतं शल्यं समितिशोभनम् |
६ क
शल्य पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरेण राजेन्द्र भ्रातृभिः सहितेन ह ||
६ ख
सभा पर्व
अध्याय
४६
दुर्योधन उवाच
युधिष्ठिरेण सत्कृत्य युक्तो रत्नपरिग्रहे ||
२३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१
युधिष्ठिर उवाच
युधिष्ठिरेण सन्धिं च यदि कुर्यां मते तव |
२९ क