अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
मेढ्रजो वलचारी च महाचारी स्तुतस्तथा ||
५८ ख
आदि पर्व
अध्याय
११४
वैशम्पाय़न उवाच
मेदसा सर्वभूतानां तृप्तिं यास्यति वै पराम् ||
३२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२३
भीष्म उवाच
मेदानां पुल्कसानां च तथैवान्तावसाय़िनाम् |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१४
भीष्म उवाच
मेदिनी कम्पिता सर्वा सशैलवनकानना ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
मेदिन्यामन्वकीर्यन्त वातनुन्ना इव द्रुमाः ||
८१ ख
शल्य पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
मेदोमज्जाकर्दमिनी छत्रहंसा गदोडुपा ||
३० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३६
सञ्जय़ उवाच
मेदोमज्जावसातृप्तास्तृप्ता मांसस्य चैव हि |
३५ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
मेदोमज्जास्थिरक्तानां वसानां च भृशासिताः |
१३२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
मेदोमज्जास्थिसिकतामुष्णीषवरफेनिलाम् |
११ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
मेदोरुधिरदिग्धाङ्गो वसामज्जासमुक्षितः |
५१ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
मेदोरुधिरय़ुक्तैश्च छिन्नवाहूरुपाणिभिः |
२१ क
सभा पर्व
अध्याय
११
नारद उवाच
मेधा धृतिः श्रुतिश्चैव प्रज्ञा वुद्धिर्यशः क्षमा ||
२५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२५८
भीष्म उवाच
मेधातिथिर्महाप्राज्ञो गौतमस्तपसि स्थितः |
४२ क
सभा पर्व
अध्याय
७
नारद उवाच
मेधातिथिर्वामदेवः पुलस्त्यः पुलहः क्रतुः |
१५ क
वन पर्व
अध्याय
८३
पुलस्त्य उवाच
मेधाविकं समासाद्य पितॄन्देवांश्च तर्पय़ेत् |
५२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
२६
युधिष्ठिर उवाच
मेधाविनं ह्यर्थकामं कुरूणां; वहुश्रुतं वाग्मिनं शीलवन्तम् |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२५
वैशम्पाय़न उवाच
मेधाविनां विदुषां संमतानां; तनुत्यजां लोकमाक्रम्य राजा ||
३० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३३
महेश्वर उवाच
मेधावी धारणाय़ुक्तः प्राज्ञस्तत्राभिजाय़ते ||
५५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
११८
भीष्म उवाच
मेधावी धारणाय़ुक्तो यथान्याय़ोपपादकः |
१८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९
वैशम्पाय़न उवाच
मेधावी निपुणो धीमान्युधि सत्यपराक्रमः ||
२५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५२
धृतराष्ट्र उवाच
मेधावी सुकृतप्रज्ञो धर्मात्मा पाण्डुनन्दनः ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
८१
भीष्म उवाच
मेधावी स्मृतिमान्दक्षः प्रकृत्या चानृशंसवान् |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
६८
भीष्म उवाच
मेधावी स्मृतिमान्दक्षः संश्रय़ेत महीपतिम् ||
५५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२३
भीष्म उवाच
मेधाव्यसि कुले जातः श्रुतवाननृशंसवान् ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१६३
भीष्म उवाच
मेध्यं सुरगृहप्रख्यं पुष्पितैः पादपैर्वृतम् |
१४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७१
व्यास उवाच
मेध्यमश्वं परीक्षन्तां तव यज्ञार्थसिद्धय़े ||
५ ख
आदि पर्व
अध्याय
८८
यय़ातिरु उवाच
मेध्यानश्वानेकशफान्सुरूपां; स्तदा देवाः पुण्यभाजो भवन्ति ||
२२ ख
वन पर्व
अध्याय
१५७
वैशम्पाय़न उवाच
मेध्यानि हिमवत्पृष्ठे मधूनि विविधानि च |
८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२८
महेश्वर उवाच
मेध्यान्वेषी महीं कृत्स्नां विचरामि निशास्वहम् |
१६ क
वन पर्व
अध्याय
२७९
मार्कण्डेय़ उवाच
मेध्यारण्यं स गत्वा च द्युमत्सेनाश्रमं नृपः |
३ क
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
मेध्यारण्येषु पुण्येषु महतामाश्रमेषु च ||
७० ख
आदि पर्व
अध्याय
६९
शकुन्तलो उवाच
मेनका त्रिदशेष्वेव त्रिदशाश्चानु मेनकाम् |
२ क
आदि पर्व
अध्याय
६८
दुःषन्त उवाच
मेनका निरनुक्रोशा वन्धकी जननी तव |
७३ क
आदि पर्व
अध्याय
११४
वैशम्पाय़न उवाच
मेनका सहजन्या च पर्णिका पुञ्जिकस्थला ||
५३ ख
आदि पर्व
अध्याय
६८
दुःषन्त उवाच
मेनकाप्सरसां श्रेष्ठा महर्षीणां च ते पिता |
७५ क
आदि पर्व
अध्याय
६५
शकुन्तलो उवाच
मेनके तव भारोऽय़ं विश्वामित्रः सुमध्यमे |
२४ क
शल्य पर्व
अध्याय
६
सञ्जय़ उवाच
मेनिरे निहतान्पार्थान्मद्रराजवशं गतान् ||
१९ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४१
वैशम्पाय़न उवाच
मेनिरे परितोषेण नृपाः स्वर्गसदो यथा ||
८ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
मेनिरे सर्वभूतानि दण्डहस्तमिवान्तकम् ||
३९ ख
आदि पर्व
अध्याय
१७४
वैशम्पाय़न उवाच
मेनिरे सहिता गन्तुं पाञ्चाल्यास्तं स्वय़ंवरम् ||
१२ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२५
सञ्जय़ उवाच
मेने कृतार्थमात्मानं सफलं जन्म च प्रभो ||
३४ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२३
वैशम्पाय़न उवाच
मेने च द्रुपदं सङ्ख्ये सानुवन्धं पराजितम् ||
६७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
३१
राजो उवाच
मेने च मनसा दग्धान्वैतहव्यान्स पार्थिवः ||
३२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६३
सञ्जय़ उवाच
मेने चात्मानमधिकं पृथिव्यामपि भारत |
३२ क
मौसल पर्व
अध्याय
५
वैशम्पाय़न उवाच
मेने ततः सङ्क्रमणस्य कालं; ततश्चकारेन्द्रिय़संनिरोधम् ||
१८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२७
वैशम्पाय़न उवाच
मेने दिविस्थमात्मानं तुष्ट्या परमय़ा युतः ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३१२
भीष्म उवाच
मेने पुत्रं यदा व्यासो मोक्षविद्याविशारदम् ||
५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५४
वैशम्पाय़न उवाच
मेने प्रलव्धमात्मानं कृष्णेनामित्रघातिना ||
२१ ख
मौसल पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
मेने प्राप्तं स षट्त्रिंशं वर्षं वै केशिसूदनः ||
१८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
मेनेऽभ्यधिकमात्मानमवमेने पुरन्दरम् ||
९ ख