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अनुशासन पर्व
अध्याय ३५
भीष्म उवाच
मेकला द्रमिडाः काशाः पौण्ड्राः कोल्लगिरास्तथा |
१७ क
कर्ण पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
मेकलाः कोशला मद्रा दशार्णा निषधास्तथा |
३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८३
सञ्जय़ उवाच
मेकलैस्त्रैपुरैश्चैव चिच्छिलैश्च समन्वितः ||
९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
मेकलोत्कलकालिङ्गा निषादास्ताम्रलिप्तकाः |
२० क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४६
व्रह्मो उवाच
मेखला च भवेन्मौञ्जी जटी नित्योदकस्तथा |
६ क
उद्योग पर्व
अध्याय ९९
नारद उवाच
मेघकृत्कुमुदो दक्षः सर्पान्तः सोमभोजनः ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय २९७
वैशम्पाय़न उवाच
मेघगम्भीरय़ा वाचा तर्जय़न्तं महावलम् ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ५३
वैशम्पाय़न उवाच
मेघघोषै रथवरैः प्रय़युस्ते महारथाः ||
२० ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४०
सञ्जय़ उवाच
मेघच्छन्नौ यथा व्योम्नि चन्द्रसूर्यौ हतप्रभौ ||
१६ ख
आदि पर्व
अध्याय १२६
वैशम्पाय़न उवाच
मेघच्छाय़ोपगूढस्तु ततोऽदृश्यत पाण्डवः |
२५ क
वन पर्व
अध्याय ३९
वैशम्पाय़न उवाच
मेघजालं च विततं छादय़ामास सर्वतः ||
१५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ९६
सञ्जय़ उवाच
मेघजालनिभं सैन्यं तव पुत्रस्य मारिष |
२२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७६
वैशम्पाय़न उवाच
मेघजालनिभं सैन्यं विदार्य स रविप्रभः |
३२ क
वन पर्व
अध्याय २३
वासुदेव उवाच
मेघजालमिवाकाशे विदार्याभ्युदितं रविम् |
१९ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४१
सञ्जय़ उवाच
मेघजालसमाच्छन्नौ नभसीवेन्दुभास्करौ ||
४२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९८
सञ्जय़ उवाच
मेघजालस्य महतो यथा मध्यगतो रविः ||
३१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ११
सञ्जय़ उवाच
मेघजालैरिव च्छन्नौ गगने चन्द्रभास्करौ ||
१५ ख
आदि पर्व
अध्याय ७०
वैशम्पाय़न उवाच
मेघजेनाग्निना ये ते पूर्वं दग्धा महौजसः ||
३ ग
वन पर्व
अध्याय २२०
मार्कण्डेय़ उवाच
मेघतूर्यरवाश्चैव क्षुव्धोदधिसमस्वनाः ||
२५ ख
वन पर्व
अध्याय १५५
वैशम्पाय़न उवाच
मेघतूर्यरवोद्दाममदनाकुलितान्भृशम् ||
५३ ग
आदि पर्व
अध्याय २१३
वैशम्पाय़न उवाच
मेघदुन्दुभिनिर्घोषं पूर्णचन्द्रनिभाननम् ||
६९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १५१
वैशम्पाय़न उवाच
मेघदुन्दुभिनिर्घोषः कृष्णो वचनमव्रवीत् ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय १६२
वैशम्पाय़न उवाच
मेघनादिनमारुह्य श्रिय़ा परमय़ा ज्वलन् ||
४ ख
सभा पर्व
अध्याय २२
वैशम्पाय़न उवाच
मेघनिर्घोषनादेन जैत्रेणामित्रघातिना ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय २६३
मार्कण्डेय़ उवाच
मेघपर्वतसङ्काशं शालस्कन्धं महाभुजम् |
२५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ५३
वैशम्पाय़न उवाच
मेघपुष्पं वलाहं च सैन्यं सुग्रीवमेव च |
२१ क
विराट पर्व
अध्याय १५
वैशम्पाय़न उवाच
मेघलेखाविनिर्मुक्तं दिवीव शशिमण्डलम् ||
३७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १८३
भीष्म उवाच
मेघवद्व्यनदच्चोच्चैर्जहृषे च पुनः पुनः ||
९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
मेघवृन्दपरिभ्रष्टा विच्छिन्नेव शतह्रदा ||
२९ ख
आदि पर्व
अध्याय १९९
वैशम्पाय़न उवाच
मेघवृन्दमिवाकाशे वृद्धं विद्युत्समावृतम् ||
३५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३७
सञ्जय़ उवाच
मेघवृन्दाद्यथा मुक्तो भास्करस्तापय़न्प्रजाः ||
२७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १४१
भीष्म उवाच
मेघसङ्कुलमाकाशं विद्युन्मण्डलमण्डितम् |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय १४०
वैशम्पाय़न उवाच
मेघसङ्घातवर्ष्मा च तीक्ष्णदंष्ट्रोज्ज्वलाननः ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२९
श्रीभगवानु उवाच
मेघसदृशं वर्णमगमत्तदस्य शशलक्ष्म विमलमभवत् ||
४६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८३
वैशम्पाय़न उवाच
मेघसन्धिः पदातिं तं धनञ्जय़मुपाद्रवत् ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०४
धृतराष्ट्र उवाच
मेघस्तनितनिर्घोषं के वीराः पर्यवारय़न् ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय २१६
वैशम्पाय़न उवाच
मेघस्तनितनिर्घोषं सर्वभूतानि निर्दहन् ||
३३ ख
आदि पर्व
अध्याय २२
सूत उवाच
मेघस्तनितनिर्घोषमम्वरं समपद्यत ||
४ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४५
वैशम्पाय़न उवाच
मेघस्वना भोगवती सुभ्रूश्च कनकावती |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय १०२
भीष्म उवाच
मेघस्वनाः क्रुद्धमुखाः केचित्करभनिस्वनाः |
९ क
द्रोण पर्व
अध्याय १५४
सञ्जय़ उवाच
मेघानामिव घर्मान्ते वभूव तुमुलो निशि ||
७ ख
शल्य पर्व
अध्याय ९
सञ्जय़ उवाच
मेघाविव यथोद्वृत्तौ दक्षिणोत्तरवर्षिणौ ||
९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ६२
नारद उवाच
मेघेष्वम्भः संनिधत्ते प्राणानां पवनः शिवः |
३६ क
उद्योग पर्व
अध्याय ९७
नारद उवाच
मेघेष्वामुञ्चते शीतं यन्महेन्द्रः प्रवर्षति ||
७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३८
सञ्जय़ उवाच
मेघैरिव परिच्छन्नो भास्करो जलदागमे ||
३५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १४१
भीष्म उवाच
मेघैर्मुक्तं नभो दृष्ट्वा लुव्धकः शीतविह्वलः ||
२४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २९
सञ्जय़ उवाच
मेघो भूत्वा शरवर्षैर्यथाग्निं; तथा पार्थं शमय़िष्यामि युद्धे ||
१४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ३६
विदुर उवाच
मेढीभूतः कौरवाणां त्वमद्य; त्वय़्याधीनं कुरुकुलमाजमीढ |
७१ क
वन पर्व
अध्याय ११
मैत्रेय़ उवाच
मेढीभूतः स्वय़ं राजन्निग्रहे प्रग्रहे भवान् |
१६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
मेढीभूतः स्वय़ं राज्यं प्रतिगृह्णीष्व पार्थिव ||
१५ ख