उद्योग पर्व
अध्याय
१०२
कण्व उवाच
मातलिर्नारदश्चैव सुमुखश्चैव वासव |
२४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
९६
कण्व उवाच
मातलिर्नारदेनैवं सम्पृष्टः पथि गच्छता |
३ क
वन पर्व
अध्याय
१६४
अर्जुन उवाच
मातलिर्मन्निय़ोगात्त्वां त्रिदिवं प्रापय़िष्यति |
२३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
मातलिर्वासवस्येव वृत्रं हन्तुं प्रय़ास्यतः ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय
१६४
अर्जुन उवाच
मातलिर्हय़शास्त्रज्ञो यथावद्भूरिदक्षिणः ||
३५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
९६
कण्व उवाच
मातलिस्तु व्रजन्मार्गे नारदेन महर्षिणा |
१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
९७
कण्व उवाच
मातलिस्त्वव्रवीच्छ्रुत्वा नारदस्याथ भाषितम् |
२० क
उद्योग पर्व
अध्याय
९८
कण्व उवाच
मातलिस्त्वव्रवीदेनं भाषमाणं तथाविधम् |
१७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१०२
कण्व उवाच
मातलिस्त्वव्रवीदेनं वुद्धिरत्र कृता मय़ा |
१७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१०१
कण्व उवाच
मातलिस्त्वेकमव्यग्रः सततं संनिरीक्ष्य वै |
१८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
९८
नारद उवाच
मातले कश्चिदत्रापि रुचितस्ते वरो भवेत् |
१६ क
वन पर्व
अध्याय
४३
अर्जुन उवाच
मातले गच्छ शीघ्रं त्वमारोहस्व रथोत्तमम् |
१५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१०१
नारद उवाच
मातले पश्य यद्यत्र कश्चित्ते रोचते वरः ||
१७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
९९
नारद उवाच
मातले श्लाघ्यमेतद्धि कुलं विष्णुपरिग्रहम् ||
७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
९५
वैशम्पाय़न उवाच
मातलेर्दातुकामस्य कन्यां मृगय़तो वरम् ||
११ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१०२
नारद उवाच
मातलेस्तस्य संमानं कर्तुमर्हो भवानपि ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०८
भीष्म उवाच
माता गरीय़सी यच्च तेनैतां मन्यते जनः ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय
२९७
युधिष्ठिर उवाच
माता गुरुतरा भूमेः पिता उच्चतरश्च खात् |
४१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११८
कीट उवाच
माता च पूजिता वृद्धा व्राह्मणश्चार्चितो मय़ा ||
२६ ख
वन पर्व
अध्याय
२८१
सत्यवानु उवाच
माता च संशय़ं प्राप्ता मत्कृतेऽनपकारिणी ||
८९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२५८
भीष्म उवाच
माता जानाति यद्गोत्रं माता जानाति यस्य सः |
३३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
४९
वासुदेव उवाच
माता तु तस्याः कौन्तेय़ दुहित्रे स्वं चरुं ददौ |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२५८
भीष्म उवाच
माता देहारणिः पुंसां सर्वस्यार्तस्य निर्वृतिः ||
२४ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
१२१
भीष्म उवाच
माता पिता च भ्राता च भार्या चाथ पुरोहितः |
५७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३७
पूजन्यु उवाच
माता पिता वान्धवानां वरिष्ठौ; भार्या जरा वीजमात्रं तु पुत्रः |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२८७
पराशर उवाच
माता पुत्रः पिता भ्राता भार्या मित्रजनस्तथा |
३८ क
आदि पर्व
अध्याय
२२३
सारिसृक्व उवाच
माता प्रपन्ना पितरं न विद्मः; पक्षाश्च नो न प्रजाताव्जकेतो |
९ क
आदि पर्व
अध्याय
९०
वैशम्पाय़न उवाच
माता भस्त्रा पितुः पुत्रो येन जातः स एव सः |
३१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८७
भीष्म उवाच
माता मम महाभागा स्मय़मानेव भामिनी ||
३६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८३
भीष्म उवाच
माता मे जाह्नवी चैव साहाय़्यमकरोत्तदा ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय
२८१
सत्यवानु उवाच
माता वृद्धा पिता वृद्धस्तय़ोर्यष्टिरहं किल |
८८ क
आदि पर्व
अध्याय
९७
वैशम्पाय़न उवाच
माता सत्यवती भीष्ममुवाच तदनन्तरम् ||
१९ ख
सभा पर्व
अध्याय
६१
विदुर उवाच
माता सुधन्वनश्चापि श्रेय़सी मातृतस्तव |
७८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१७९
भीष्म उवाच
माता स्वरूपिणी राजन्किमिदं ते चिकीर्षितम् ||
२२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११२
वृहस्पतिरु उवाच
मातापितरमाक्रुश्य सारिकः सम्प्रजाय़ते |
५३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०७
भीष्म उवाच
मातापितरमुत्थाय़ पूर्वमेवाभिवादय़ेत् |
६७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३४
भीष्म उवाच
मातापितृपरा नित्यं या नारी सा तपोधना ||
४७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२३५
व्यास उवाच
मातापितृभ्यां जामीभिर्भ्रात्रा पुत्रेण भार्यया ||
१३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१२६
वैशम्पाय़न उवाच
मातापितृभ्यां भीष्मेण द्रोणेन विदुरेण च |
१८ क
वन पर्व
अध्याय
२०६
मार्कण्डेय़ उवाच
मातापितृभ्यां वृद्धाभ्यां यथान्याय़ं सुसंशितः ||
३० ख
वन पर्व
अध्याय
२०५
व्राह्मण उवाच
मातापितृभ्यां शुश्रूषां करिष्ये वचनात्तव |
१८ क
वन पर्व
अध्याय
१९७
स्त्र्यु उवाच
मातापितृभ्यां शुश्रूषुः सत्यवादी जितेन्द्रिय़ः |
४१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
४९
भीष्म उवाच
मातापितृभ्यां सन्त्यक्तं पथि यं तु प्रलक्षय़ेत् |
२० क
वन पर्व
अध्याय
२८१
सत्यवानु उवाच
मातापितृभ्यां हि विना नाहं जीवितुमुत्सहे ||
९० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२७
गौतम उवाच
मातापितृभ्यामानृण्यं किं कृत्वा समवाप्नुय़ात् |
८ क
वन पर्व
अध्याय
२८१
सत्यवानु उवाच
मातापितृभ्यामिच्छामि सङ्गमं त्वत्प्रसादजम् ||
८० ख
वन पर्व
अध्याय
१९६
वैशम्पाय़न उवाच
मातापितृषु शुश्रूषा स्त्रीणां भर्तृषु च द्विज ||
७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११५
भीष्म उवाच
मातापितृसमाय़ोगे पुत्रत्वं जाय़ते यथा |
११ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
५
सूत उवाच
मातापितृसहस्राणि पुत्रदारशतानि च |
४७ क
स्त्री पर्व
अध्याय
२
विदुर उवाच
मातापितृसहस्राणि पुत्रदारशतानि च |
१२ क