वन पर्व
अध्याय
३९
वैशम्पाय़न उवाच
महावलो महावाहुरर्जुनः कार्यसिद्धय़े |
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
उपमन्युरु उवाच
महावलो महावीर्यः शक्रतुल्यपराक्रमः |
१३४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८५
सञ्जय़ उवाच
महावलो महावीर्यः स महात्मा महारथः ||
५६ ख
वन पर्व
अध्याय
१२६
लोमश उवाच
महावलो महावीर्यस्तपोवलसमन्वितः |
२० क
आदि पर्व
अध्याय
९४
वैशम्पाय़न उवाच
महावलो महासत्त्वो महावीर्यो महारथः ||
२० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१९२
भीष्म उवाच
महावलो महोत्साहः स हेमकवचो नृपः |
२८ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४९
सञ्जय़ उवाच
महावलो वैश्रवणान्तकोपमः; प्रसह्य हन्ता द्विषतां यथार्हम् |
७७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९६
सञ्जय़ उवाच
महावलौ महाराज क्रोधसंरक्तलोचनौ |
५० ख
वन पर्व
अध्याय
२०९
मार्कण्डेय़ उवाच
महावाचं त्वजनय़त्सकामाश्वं हि यं विदुः ||
२५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
महावात इवाभ्राणि विधमित्वा स वारणान् |
६१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
महावातसमाविद्धा महानौरिव सागरे ||
१४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
६४
सञ्जय़ उवाच
महावातसमुत्थेन संशुष्कमिव सागरम् |
६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४५
सञ्जय़ उवाच
महावातसमुद्धूतं पक्वं तालफलं यथा ||
२३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३
सञ्जय़ उवाच
महावातसमूहेन समुद्रमिव शोषितम् ||
१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
महावातेरितं मेघं वातोद्धूत इवाम्वुदः ||
३८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
महावितानावततप्रकाश; मालोक्य वीराः सहसाभिपेतुः ||
१४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
महाविद्युत्प्रतीकाशा शल्यस्य शुशुभे गदा ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२१७
वलिरु उवाच
महाविद्योऽल्पविद्यश्च वलवान्दुर्वलश्च यः |
१८ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२७
सञ्जय़ उवाच
महाविषं पूर्णकोशं यत्पार्थं योद्धुमिच्छसि ||
३८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
४
द्रुपद उवाच
महावीरश्च कद्रुश्च निकरस्तुमुलः क्रथः |
२१ क
विराट पर्व
अध्याय
३८
वृहन्नडो उवाच
महावीर्यं महद्दिव्यमेतत्तद्धनुरुत्तमम् |
४२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
महावीर्यवतां सङ्ख्ये सुतरां भीरुदुस्तराम् ||
१४ ख
आदि पर्व
अध्याय
२६
सूत उवाच
महावीर्यवलः पक्षी हर्तुं सोममिहोद्यतः ||
३८ ख
आदि पर्व
अध्याय
२८
सूत उवाच
महावीर्या महोत्साहास्तेन ते वहुधा क्षताः |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५२
वासुदेव उवाच
महावीर्ये महासत्त्वे स्थिते सर्वार्थदर्शिनि ||
१४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
११५
गालव उवाच
महावीर्यो महीपालः काशीनामीश्वरः प्रभुः |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
महावुद्धिर्महावीर्यो महाशक्तिर्महाद्युतिः |
३२ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३५
वैशम्पाय़न उवाच
महावुद्धिर्महाय़ोगी महात्मा सुमहामनाः ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
९२
उतथ्य उवाच
महावृक्षो जाय़ते वर्धते च; तं चैव भूतानि समाश्रय़न्ति |
२५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१३३
मातो उवाच
महावेग इवोद्धूतो मातरिश्वा वलाहकान् ||
३१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
महावेगान्प्रदीप्ताग्रान्मुमोचाधिरथिः शरान् ||
२७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०८
सञ्जय़ उवाच
महावेगैः प्रसन्नाग्रैः शातकुम्भपरिष्कृतैः |
१८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
५०
धृतराष्ट्र उवाच
महावेगो महोत्साहो महावाहुर्महावलः |
६ क
शल्य पर्व
अध्याय
२१
सञ्जय़ उवाच
महावेणुवनस्येव दह्यमानस्य सर्वतः ||
४४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०१
सञ्जय़ उवाच
महाव्याघ्रो महारण्ये मृगशावं यथा वली ||
३९ ख
वन पर्व
अध्याय
२१०
मार्कण्डेय़ उवाच
महाव्याहृतिभिर्ध्यातः पञ्चभिस्तैस्तदा त्वथ |
३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
महाव्यूहः कलिङ्गानामेकेन मृदितस्त्वय़ा ||
११३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३६
व्यास उवाच
महाव्रतं चरेद्यस्तु दद्यात्सर्वस्वमेव तु |
१९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३७
सञ्जय़ उवाच
महाशनिमुचः काले पय़ोदस्येव निस्वनः ||
१८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९१
सञ्जय़ उवाच
महाशनिर्यथा भ्रष्टा शक्रमुक्ता नभोगता ||
५९ ख
वन पर्व
अध्याय
२७१
मार्कण्डेय़ उवाच
महाशनिविनिर्दग्धः पादपोऽङ्कुरवानिव ||
१७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५९
वैशम्पाय़न उवाच
महाशनिसमः शव्दः शात्रवाणां भय़ङ्करः ||
१४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
२५
श्रीभगवानु उवाच
महाशनो महापाप्मा विद्ध्येनमिह वैरिणम् ||
३७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५४
सञ्जय़ उवाच
महाशिलाश्चापतंस्तत्र तत्र; सहस्रशः साशनय़ः सवज्राः |
२८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२६
अङ्गिरा उवाच
महाश्रम उपस्पृश्य योऽग्निहोत्रपरः शुचिः |
१६ क
वन पर्व
अध्याय
८२
पुलस्त्य उवाच
महाश्रमे वसेद्रात्रिं सर्वपापप्रमोचने |
४८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
६३
भीष्म उवाच
महाश्रय़ं वहुकल्याणरूपं; क्षात्रं धर्मं नेतरं प्राहुरार्याः ||
२६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७८
सञ्जय़ उवाच
महाश्वेताश्वय़ुक्तेन भीमवानरकेतुना |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२५७
भीष्म उवाच
महासत्त्वैः शुद्धभावैः सर्वं देवार्हमेव तत् ||
११ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
३०८
भीष्म उवाच
महासत्त्वोऽल्पसत्त्वो वा जन्तुर्येनानुमीय़ते ||
१०४ ख