महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
भ्रातरः पञ्च कृष्णा च षष्ठी श्वा चैव सप्तमः |
२३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९
वैशम्पाय़न उवाच
भ्रातरः पञ्च कैकेय़ा धार्मिकाः सत्यविक्रमाः |
५२ क
महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
भ्रातरः पतिता मेऽत्र आगच्छेय़ुर्मय़ा सह |
३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४०
सञ्जय़ उवाच
भ्रातरः पर्यरक्षन्त सोदर्या भरतर्षभ ||
३७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२६८
युधिष्ठिर उवाच
भ्रातरः पितरः पुत्रा ज्ञातय़ः सुहृदस्तथा |
१ क
वन पर्व
अध्याय
३४
वैशम्पाय़न उवाच
भ्रातरः पूर्वजाताश्च सुसमृद्धाश्च सर्वशः |
५८ क
सभा पर्व
अध्याय
४५
धृतराष्ट्र उवाच
भ्रातरः सुहृदश्चैव नाचरन्ति तवाप्रिय़म् ||
८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९३
सञ्जय़ उवाच
भ्रातरश्च महेष्वासास्त्रिदशा इव वासवम् ||
२३ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
भ्रातरश्चापि विक्रान्ता वहुलानि वलानि च |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२६
वैशम्पाय़न उवाच
भ्रातरश्चास्य ते सर्वे नाराय़णपराभवन् ||
१२१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३३
कृप उवाच
भ्रातरश्चास्य वलिनः सर्वास्त्रेषु कृतश्रमाः |
३५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५९
सञ्जय़ उवाच
भ्रातरश्चैव पुत्राश्च धृष्टद्युम्नश्च पार्षतः ||
९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४६
सञ्जय़ उवाच
भ्रातरश्चैव मे वीराः कर्शिताः शरपीडिताः ||
१२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०३
सञ्जय़ उवाच
भ्रातरश्चैव मे शूराः साय़कैर्भृशपीडिताः ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय
२३८
दुर्योधन उवाच
भ्रातरश्चैव मे सर्वे प्रय़ान्त्वद्य पुरं प्रति ||
१० ग
शान्ति पर्व
अध्याय
३४६
भीष्म उवाच
भ्रातरस्तनय़ा भार्या यय़ुस्तं व्राह्मणं प्रति ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय
२८१
मार्कण्डेय़ उवाच
भ्रातरस्ते भविष्यन्ति क्षत्रिय़ास्त्रिदशोपमाः ||
५८ ग
शल्य पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
भ्रातरस्ते हताः शूराः पुत्राश्च सहसैनिकाः |
४२ क
शल्य पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
भ्रातरस्ते हताः सर्वे शूरा विक्रान्तय़ोधिनः ||
३३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
भ्रातरो वास्य ते शूरा दृश्यन्ते नेह केचन ||
१२ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
२
युधिष्ठिर उवाच
भ्रातरौ च महात्मानौ युधामन्यूत्तमौजसौ ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय
२९६
वैशम्पाय़न उवाच
भ्रातरौ ते चिरगतौ वीभत्सो शत्रुकर्शन |
२० ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१३
वैशम्पाय़न उवाच
भ्रातरौ पृष्ठतश्चास्य जनार्दनरथे स्थितौ |
१६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
भ्रातरौ रभसौ राजन्ननय़द्यमसादनम् ||
३१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
३०
युधिष्ठिर उवाच
भ्राता कनीय़ानपि तस्य मन्द; स्तथाशीलः सञ्जय़ सोऽपि शश्वत् |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय
१४७
वैशम्पाय़न उवाच
भ्राता च मम वालोऽय़ं गते लोकममुं त्वय़ि |
७ क
वन पर्व
अध्याय
१२०
सात्यकिरु उवाच
भ्राता च मे यश्च सखा गुरुश्च; जनार्दनस्यात्मसमश्च पार्थः |
७ क
वन पर्व
अध्याय
२५४
द्रौपद्यु उवाच
भ्राता च शिष्यश्च युधिष्ठिरस्य; धनञ्जय़ो नाम पतिर्ममैषः ||
१२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
७०
युधिष्ठिर उवाच
भ्राता चासि सखा चासि वीभत्सोर्मम च प्रिय़ः |
९१ क
वन पर्व
अध्याय
२६४
मार्कण्डेय़ उवाच
भ्राता चास्य महावाहुः सौमित्रिरपराजितः |
२२ क
वन पर्व
अध्याय
२९६
वैशम्पाय़न उवाच
भ्राता चिराय़ते तात सहदेव तवाग्रजः |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२३५
व्यास उवाच
भ्राता ज्येष्ठः समः पित्रा भार्या पुत्रः स्वका तनुः |
१८ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३५
वैशम्पाय़न उवाच
भ्राता तव महाराज देवदेवः सनातनः |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय
९०
वैशम्पाय़न उवाच
भ्राता तवानपत्य एव स्वर्यातो विचित्रवीर्यः |
५९ ख
आदि पर्व
अध्याय
२५
कश्यप उवाच
भ्राता तस्यानुजश्चासीत्सुप्रतीको महातपाः ||
१० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४९
वासुदेव उवाच
भ्राता प्राज्ञस्तव कोपं न जातु; कुर्याद्राजा कञ्चन पाण्डवेय़ः |
७१ क
आदि पर्व
अध्याय
१२६
वैशम्पाय़न उवाच
भ्राता भ्रातरमज्ञातं सावित्रः पाकशासनिम् ||
८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
३१
युधिष्ठिर उवाच
भ्राता भ्रातरमन्वेतु पिता पुत्रेण युज्यताम् |
२१ क
वन पर्व
अध्याय
१५८
वैशम्पाय़न उवाच
भ्राता भ्रातरमासीनमभ्यभाषत पाण्डवम् ||
९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८२
सञ्जय़ उवाच
भ्राता भ्रातरमाय़ान्तं विव्याध प्रहसन्निव ||
२० ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४१
वैशम्पाय़न उवाच
भ्राता भ्रात्रा सखा चैव सख्या राजन्समागताः ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय
१४७
भीम उवाच
भ्राता मम गुणश्लाघ्यो वुद्धिसत्त्ववलान्वितः |
११ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७
व्यास उवाच
भ्राता मम समर्थश्च वासवेन च सत्कृतः |
९ क
वन पर्व
अध्याय
७
वैशम्पाय़न उवाच
भ्राता मम सुहृच्चैव साक्षाद्धर्म इवापरः |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१६५
भीष्म उवाच
भ्राता मे वान्धवश्चासौ सखा च हृदय़ङ्गमः ||
८ ख
सभा पर्व
अध्याय
१३
श्रीकृष्ण उवाच
भ्राता यस्याहृतिः शूरो जामदग्न्यसमो युधि |
२१ क
वन पर्व
अध्याय
२६३
मार्कण्डेय़ उवाच
भ्राता वानरराजस्य वालिनो हेममालिनः ||
४१ ख
वन पर्व
अध्याय
१५
कृष्ण उवाच
भ्राता वालश्च राजा च न च सङ्ग्राममूर्धनि |
१४ क
सभा पर्व
अध्याय
३८
शिशुपाल उवाच
भ्राता विचित्रवीर्यस्ते सतां वृत्तमनुष्ठितः ||
२२ ख
आदि पर्व
अध्याय
९९
वैशम्पाय़न उवाच
भ्राता विचित्रवीर्यस्य यथा वा पुत्र मन्यसे ||
३० ख