विराट पर्व
अध्याय
१२
वैशम्पाय़न उवाच
भीमसेनोऽपि मांसानि भक्ष्याणि विविधानि च |
६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८२
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनोऽपि राजेन्द्र दुर्योधनमुखान्रथान् |
४७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०८
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनोऽपि सङ्क्रुद्धः साश्वय़न्तारमाशुगैः |
३८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७८
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनोऽपि सङ्क्रुद्धस्तव सैन्यमुपाद्रवत् |
५७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२१
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनोऽपि सङ्ग्रामे वोधय़न्निव पाण्डवम् |
४२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९१
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनोऽपि समरे तावुभौ केशवार्जुनौ |
८१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७४
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनोऽपि समरे सम्प्राप्य स्वरथं पुनः |
३ क
शल्य पर्व
अध्याय
५९
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनोऽपि हत्वाजौ तव पुत्रममर्षणः |
३७ क
वन पर्व
अध्याय
२९५
वैशम्पाय़न उवाच
भीमसेनोऽर्जुनश्चैव माद्रीपुत्रौ च पाण्डवौ ||
५ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१०
वैशम्पाय़न उवाच
भीमसेनोऽर्जुनश्चैव माद्रीपुत्रौ च पाण्डवौ ||
८ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२६
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनोऽर्जुनश्चैव सहदेवश्च मारिष |
२७ ख
आदि पर्व
अध्याय
५५
वैशम्पाय़न उवाच
भीमसेनोऽवधीत्क्रुद्धो भुवि भीमपराक्रमः ||
१९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७०
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनोऽव्रवीद्राजन्निदं संहर्षय़न्वचः ||
४४ ख
आदि पर्व
अध्याय
१८५
वैशम्पाय़न उवाच
भीमस्तथा तत्कृतवान्नरेन्द्र; तां चैव पूजां प्रतिसङ्गृहीत्वा ||
२१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९२
सञ्जय़ उवाच
भीमस्तथा द्रोणमुक्तं शरवर्षमदीधरत् ||
३१ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१५
सञ्जय़ उवाच
भीमस्तु तव पुत्रेण रणशौण्डेन सङ्गतः |
३६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
भीमस्तु प्रेक्ष्य यन्तारं विशोकं संय़ुगे तदा |
१४ क
विराट पर्व
अध्याय
३२
वैशम्पाय़न उवाच
भीमस्तु भीमसङ्काशो रथात्प्रस्कन्द्य कुण्डली |
३२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४९
सञ्जय़ उवाच
भीमस्तु मामर्हति गर्हणाय़; यो युध्यते सर्वय़ोधप्रवीरः ||
७३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२६
सञ्जय़ उवाच
भीमस्तु समरे क्रुद्धः पुत्रं तव जनाधिप |
४७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८३
सञ्जय़ उवाच
भीमस्तु समरे राजन्नदृश्ये राक्षसे तदा |
२५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०९
सञ्जय़ उवाच
भीमस्तु समरे विद्ध्वा शल्यं नवभिराय़सैः |
३० क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१९
वैशम्पाय़न उवाच
भीमस्तु सर्वदुःखानि संस्मृत्य वहुलान्युत |
५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८४
सञ्जय़ उवाच
भीमस्तु सारथिं हत्वा भीष्मस्य रथिनां वरः |
१२ क
वन पर्व
अध्याय
२५५
वैशम्पाय़न उवाच
भीमस्त्वापततो राज्ञः कोटिकाश्यस्य सङ्गरे |
२४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५१
वैशम्पाय़न उवाच
भीमस्य च महात्मानौ तथा पादावगृह्णताम् ||
२९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१३६
वैशम्पाय़न उवाच
भीमस्य च महानादं नदतः शुष्मिणो रणे |
२६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
भीमस्य च रणे राजन्धनुश्चिच्छेद भास्वरम् |
१३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३७
सञ्जय़ उवाच
भीमस्य निघ्नतः शत्रून्पार्ष्णिं जग्राह पाण्डवः |
५१ क
वन पर्व
अध्याय
१३
वैशम्पाय़न उवाच
भीमस्य पादौ कृत्वा तु स्व उत्सङ्गे ततो वलात् |
८७ क
वन पर्व
अध्याय
६६
वृहदश्व उवाच
भीमस्य राज्ञः सा दत्ता वीरवाहोरहं पुनः |
१३ क
वन पर्व
अध्याय
६५
वृहदश्व उवाच
भीमस्य वचनाद्राज्ञस्त्वामन्वेष्टुमिहागतः ||
२७ ख
सभा पर्व
अध्याय
६३
दुर्योधन उवाच
भीमस्य वाक्ये तद्वदेवार्जुनस्य; स्थितोऽहं वै यमय़ोश्चैवमेव |
२० क
कर्ण पर्व
अध्याय
५४
सञ्जय़ उवाच
भीमस्य वाहाग्र्यमुदारवेगं; समन्ततो वाणगणैर्निजघ्नुः ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय
१५२
वैशम्पाय़न उवाच
भीमस्य वीर्यं च वलं च सङ्ख्ये; यथावदाचख्युरतीव दीनाः ||
२३ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
११
वैशम्पाय़न उवाच
भीमस्य सेय़ं कौरव्य तवैवोपहृता मय़ा ||
२७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
भीमस्याच्छादनं सङ्ख्ये स्ववाहुवलमाश्रिताः ||
३९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
४२
सञ्जय़ उवाच
भीमस्यापोथय़त्केतुं धनुरश्वांश्च मारिष ||
१३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४४
वैशम्पाय़न उवाच
भीमा गजाननाश्चैव तथा नक्रमुखाः परे ||
७८ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४४
वैशम्पाय़न उवाच
भीमा मकरवक्त्राश्च शिंशुमारमुखास्तथा ||
७५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३१
सञ्जय़ उवाच
भीमात्खल्वहमुत्पन्नः कुरूणां विपुले कुले ||
६० ख
विराट पर्व
अध्याय
६६
अर्जुन उवाच
भीमादवरजः पार्थो यमाभ्यां चापि पूर्वजः ||
९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८९
युधिष्ठिर उवाच
भीमादींश्चापि सम्पूज्य पर्यष्वजत केशवम् ||
२३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८३
सञ्जय़ उवाच
भीमानुगाञ्जघानाशु रथांस्त्रिंशदरिन्दमः |
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२७०
भीष्म उवाच
भीमान्दुष्टप्रलापांस्त्वं तात कस्मात्प्रभाषसे ||
२३ ग
उद्योग पर्व
अध्याय
१९४
सञ्जय़ उवाच
भीमार्जुनप्रभृतिभिर्महेष्वासैर्महावलैः |
३ क
सभा पर्व
अध्याय
२२
वैशम्पाय़न उवाच
भीमार्जुनवलोपेते धर्मस्य परिपालनम् ||
३१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१४२
वैशम्पाय़न उवाच
भीमार्जुनाभ्यां कृष्णेन युय़ुधानय़मैरपि ||
३ ख
सभा पर्व
अध्याय
२२
वैशम्पाय़न उवाच
भीमार्जुनाभ्यां योधाभ्यामास्थितः कृष्णसारथिः |
१५ क
वन पर्व
अध्याय
२५५
वैशम्पाय़न उवाच
भीमार्जुनावपि श्रुत्वा क्रोशमात्रगतं रिपुम् |
५२ क