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सभा पर्व
अध्याय २२
वैशम्पाय़न उवाच
पुनः स्वनगरं प्राप्तावक्षताविति भारत ||
४६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ३१
सञ्जय़ उवाच
पुनः स्वरथमास्थाय़ धनुरादाय़ चापरम् |
६२ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५९
सञ्जय़ उवाच
पुनः स्वरथमास्थाय़ पृष्ठतोऽर्जुनमन्वगात् ||
२७ ख
वन पर्व
अध्याय ७८
वृहदश्व उवाच
पुनः स्वे चावसद्राज्ये प्रत्याहृत्य महाय़शाः ||
४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १२
वासुदेव उवाच
पुनरज्ञातचर्याय़ां कीचकेन पदा वधः |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय १६
वैशम्पाय़न उवाच
पुनरज्ञातचर्याय़ां कीचकेन पदा वधम् ||
१९ ग
विराट पर्व
अध्याय १२
वैशम्पाय़न उवाच
पुनरन्तःपुरगतः स्त्रीणां मध्ये वृकोदरः |
२८ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४
सञ्जय़ उवाच
पुनरन्तरमार्गस्थौ मण्डलानि विचेरतुः ||
२७ ख
शल्य पर्व
अध्याय ११
सञ्जय़ उवाच
पुनरन्तरमार्गस्थौ मण्डलानि विचेरतुः ||
१९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ४०
भीष्म उवाच
पुनरन्तर्हितः शक्रो दृश्यते ज्ञानचक्षुषा |
३७ क
शान्ति पर्व
अध्याय ८४
भीष्म उवाच
पुनरन्यैर्गुणैर्युक्तो न मन्त्रं श्रोतुमर्हति ||
३७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ५२
भीष्म उवाच
पुनरन्वेषणे यत्नमकरोत्परमं तदा ||
३९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३१
सञ्जय़ उवाच
पुनरप्यतिसङ्क्रुद्धः सवृकोदरपार्षतान् |
१२५ क
शल्य पर्व
अध्याय १५
सञ्जय़ उवाच
पुनरभ्यद्रवन्पार्थान्वेगेन महता रणे ||
१ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
पुनरभ्यहनत्पार्श्वे स भिन्नहृदय़ोऽपतत् ||
५२ ख
विराट पर्व
अध्याय ५४
वैशम्पाय़न उवाच
पुनरभ्याहनत्पार्थं हृदय़े कङ्कपत्रिभिः ||
७ ख
वन पर्व
अध्याय २६३
मार्कण्डेय़ उवाच
पुनरभ्याहनत्पार्श्वे तद्रक्षो लक्ष्मणो भृशम् |
३५ क
शान्ति पर्व
अध्याय १२५
भीष्म उवाच
पुनरभ्येति जवनो जवेन महता ततः ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १७२
भीष्म उवाच
पुनरल्पगुणं स्तोकं पुनर्नैवोपपद्यते ||
२० ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८२
अर्जुन उवाच
पुनरश्वानुगमनं कर्तासि जय़तां वर ||
२८ ख
आदि पर्व
अध्याय १३७
वैशम्पाय़न उवाच
पुनरस्मानुपादाय़ तथैव व्रज भारत |
२२ क
द्रोण पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
पुनरस्य त्वरन्भीमो नाराचान्दश भारत |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय २५२
युधिष्ठिर उवाच
पुनरस्य प्रमाणं हि निर्दिष्टं शास्त्रकोविदैः |
७ क
आदि पर्व
अध्याय ५३
सूत उवाच
पुनरागमनं कार्यमिति चैनं वचोऽव्रवीत् |
१५ क
वन पर्व
अध्याय ६७
वृहदश्व उवाच
पुनरागमनं चैव तथा कार्यमतन्द्रितैः ||
१८ ख
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
पुनरागमनं चैव तेषां द्वैतवनं सरः |
१२३ क
वन पर्व
अध्याय २४१
वैशम्पाय़न उवाच
पुनरागम्य तं देशममन्त्रय़त मन्त्रिभिः ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय १३९
लोमश उवाच
पुनरागम्य तत्सत्रमव्रवीद्भ्रातरं वचः ||
७ ख
वन पर्व
अध्याय ५०
वृहदश्व उवाच
पुनरागम्य निषधान्नले सर्वं न्यवेदय़त् ||
३१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३५
व्यास उवाच
पुनराजग्मतुस्तत्र वेगितौ पश्यतां च तौ |
५५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९०
भीष्म उवाच
पुनराजन्मलोकौघं पुत्रवान्धवपत्तनम् |
६७ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३४
सञ्जय़ उवाच
पुनरादाय़ तच्चापं निमेषार्धान्महावलः |
४४ क
सभा पर्व
अध्याय १३
श्रीकृष्ण उवाच
पुनरानन्दिताः सर्वे मथुराय़ां वसामहे ||
४४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ६
भीष्म उवाच
पुनरारोपितः स्वर्गं दौहित्रैः पुण्यकर्मभिः ||
३० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५४
सञ्जय़ उवाच
पुनरावर्ततां तेषां वेग आसीद्विशां पते |
३० क
शल्य पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
पुनरावर्तते तूर्णं मामकं वलमोजसा ||
३५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २४३
व्यास उवाच
पुनरावर्तनं नास्ति सम्प्राप्तस्य परात्परम् ||
२३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १००
भीष्म उवाच
पुनरावर्तमानानां निराशानां च जीविते |
१३ क
शल्य पर्व
अध्याय ५७
वासुदेव उवाच
पुनरावर्तमानानां भग्नानां जीवितैषिणाम् |
१३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
पुनरावर्तमानेषु विद्रवत्सु च सङ्घशः ||
८१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६७
सञ्जय़ उवाच
पुनरावर्तितं केन यदि जानासि शंस मे ||
१८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३६
व्रह्मो उवाच
पुनरावृत्तिधर्माणस्ते भवन्तीह मानुषाः ||
२९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९६
भीष्म उवाच
पुनरावृत्तिमाप्नोति परं ज्ञानमवाप्य च |
४२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८४
वैशम्पाय़न उवाच
पुनरावृत्य कौन्तेय़ो दशार्णानगमत्तदा ||
५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २१
सञ्जय़ उवाच
पुनरावृत्य सङ्ग्रामं चक्रुर्देवासुरोपमम् ||
१ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८९
युधिष्ठिर उवाच
पुनरासन्हृषीकेश तत्र तत्रेति मे श्रुतम् ||
२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६१
सञ्जय़ उवाच
पुनराह महाराज स्मय़ंस्तौ केशवार्जुनौ ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३८
वैशम्पाय़न उवाच
पुनराह महावाहुर्यदुश्रेष्ठो महाद्युतिः ||
२० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १२
भीष्म उवाच
पुनराय़ात्पुरं तात स्त्रीभूतो नृपसत्तम ||
१५ ख
आदि पर्व
अध्याय १०३
वैशम्पाय़न उवाच
पुनराय़ात्स्वनगरं भीष्मेण प्रतिपूजितः ||
१५ ख