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अनुशासन पर्व
अध्याय ४९
भीष्म उवाच
पुत्रकामो हि पुत्रार्थे यां वृणीते विशां पते |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय १३
पितर ऊचुः
पुत्रकास्मन्निय़ोगात्त्वमेतन्नः परमं हितम् ||
२२ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय १०
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रक्षय़भ्रातृवधप्रणुन्ना; प्रदह्यमानेव हुताशनेन ||
२५ ख
स्त्री पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रगृद्ध्या त्वय़ा राजन्प्रिय़ं तस्य चिकीर्षता |
२९ क
आदि पर्व
अध्याय ९२
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रघ्नि सुमहत्पापं मा प्रापस्तिष्ठ गर्हिते ||
४७ ख
आदि पर्व
अध्याय १५५
व्राह्मण उवाच
पुत्रजन्म परीप्सन्वै शोकोपहतचेतनः |
२ क
आदि पर्व
अध्याय १२८
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रजन्म परीप्सन्वै स राजा तदधारय़त् |
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय ९२
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रजन्म प्रतीक्षंस्तु स राजा तदधारय़त् ||
१६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ३
युधिष्ठिर उवाच
पुत्रतामनुसम्प्राप्तो विश्वामित्रस्य धीमतः ||
७ ख
आदि पर्व
अध्याय ३८
शमीक उवाच
पुत्रत्वं वालतां चैव तवावेक्ष्य च साहसम् ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७८
भीष्म उवाच
पुत्रत्वमगमद्देव्या वारिते शङ्करे च सः ||
३४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ४९
वासुदेव उवाच
पुत्रत्वमगमद्राजंस्तस्य लोकेश्वरेश्वरः |
६ क
वन पर्व
अध्याय १९४
मधुकैटभावू ऊचतुः
पुत्रत्वमभिगच्छाव तव चैव सुलोचन |
२७ क
आदि पर्व
अध्याय १०४
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रत्वे कल्पय़ामास सभार्यः सूतनन्दनः ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय १०६
लोमश उवाच
पुत्रत्वे कल्पय़ामास समुद्रं वरुणालय़म् ||
३३ ख
सभा पर्व
अध्याय १६
कृष्ण उवाच
पुत्रदर्शननैराश्याद्वाष्पगद्गदय़ा गिरा ||
२५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३१६
नारद उवाच
पुत्रदारकुटुम्वेषु सक्ताः सीदन्ति जन्तवः |
३० क
वन पर्व
अध्याय २
युधिष्ठिर उवाच
पुत्रदारभृताश्चैव निर्दहेय़ुरपूजिताः ||
५५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २७
सञ्जय़ उवाच
पुत्रदारान्विहारांश्च यदन्यद्वित्तमस्ति मे |
११ क
आदि पर्व
अध्याय १४५
व्राह्मण उवाच
पुत्रदारेण वा सार्धं प्राद्रवेय़ामनामय़म् ||
२५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २२०
भीष्म उवाच
पुत्रदारैः सुखैश्चैव विय़ुक्तस्य धनेन च |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३१८
भीष्म उवाच
पुत्रदारैर्महान्क्लेशो विद्याम्नाय़े महाञ्श्रमः |
४७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ४५
भीष्म उवाच
पुत्रदौहित्रय़ोर्नेह विशेषो धर्मतः स्मृतः ||
१४ ख
स्त्री पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रनाशेऽर्थनाशे च ज्ञातिसम्वन्धिनामपि |
७ क
आदि पर्व
अध्याय १८०
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रपौत्रं च यच्चान्यदस्माकं विद्यते धनम् ||
९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २२
सञ्जय़ उवाच
पुत्रपौत्रप्रतिष्ठा ते भविष्यत्यद्य पार्थिव ||
४२ ख
शल्य पर्व
अध्याय ६२
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रपौत्रवधं श्रुत्वा ध्रुवं नः सम्प्रधक्ष्यति |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २५८
भीष्म उवाच
पुत्रपौत्रसमाकीर्णो जननीं यः समाश्रितः |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय ११६
युधिष्ठिर उवाच
पुत्रपौत्राभिरामं च राष्ट्रवृद्धिकरं च यत् |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय १३७
पूजन्यु उवाच
पुत्रपौत्रे विनष्टे तु परलोकं निगच्छति ||
२३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १४९
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रपौत्रैः परिवृतः शतशाख इव द्रुमः ||
१४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३१
सञ्जय़ उवाच
पुत्रपौत्रैः परिवृतो भ्रातृभिश्चेन्द्रविक्रमैः |
१७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९३
पितो उवाच
पुत्रपौत्रैश्च निय़तं साधुलोकानुपाश्नुते ||
४५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९३
नकुल उवाच
पुत्रप्रदानाद्वरदस्तस्मात्सक्तून्गृहाण मे ||
२६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५
व्यास उवाच
पुत्रमङ्गिरसो ज्येष्ठं विप्रश्रेष्ठं वृहस्पतिम् ||
७ ग
आदि पर्व
अध्याय १२७
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रमङ्गेश्वरं स्नेहाच्छन्ना प्रीतिरवर्धत ||
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १२६
ऋषभ उवाच
पुत्रमस्यानय़त्क्षिप्रं तपसा च श्रुतेन च ||
४६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११५
भीष्म उवाच
पुत्रमांसोपमं जानन्खादते यो विचेतनः ||
१० ख
शल्य पर्व
अध्याय ५०
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रमादाय़ मुदिता जगाम भरतर्षभ ||
२४ ख
आदि पर्व
अध्याय १०५
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रमासाद्य भीष्मस्तु हर्षादश्रूण्यवर्तय़त् ||
२६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ११९
सञ्जय़ उवाच
पुत्रमिच्छामि भगवन्यो निहन्याच्छिनेः सुतम् |
१७ क
वन पर्व
अध्याय २७२
मार्कण्डेय़ उवाच
पुत्रमिन्द्रजितं शूरं रावणः प्रत्यभाषत |
२ क
शल्य पर्व
अध्याय ४४
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रमेषः प्रवाहश्च तथा नन्दोपनन्दकौ |
५९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६०
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रमेषा हि तस्याशु जनय़िष्यति भामिनी ||
३५ ख
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
पुत्रराज्यं परित्यज्य गुरुशुश्रूषणे रता ||
२१३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ४९
भीष्म उवाच
पुत्ररेतो न शक्यं हि मिथ्या कर्तुं नराधिप ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ६७
यम उवाच
पुत्रलाभो हि कौरव्य सर्वलाभाद्विशिष्यते ||
३३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८८
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रलोकात्पतिलोकान्वृण्वाना सत्यवादिनी |
४३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३४
भीष्म उवाच
पुत्रवक्त्रमिवाभीक्ष्णं भर्तुर्वदनमीक्षते |
३६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ८
भीष्म उवाच
पुत्रवच्च ततो रक्ष्या उपास्या गुरुवच्च ते |
२२ क