उद्योग पर्व
अध्याय
१२२
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवैर्निर्जितां भूमिं भुञ्जानो राजसत्तम |
४३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
९३
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवैर्निहतैः सङ्ख्ये पुत्रैर्वापि महावलैः |
२९ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१५
द्रौणिरु उवाच
पाण्डवैर्यानि रत्नानि यच्चान्यत्कौरवैर्धनम् |
२८ क
सभा पर्व
अध्याय
७२
धृतराष्ट्र उवाच
पाण्डवैर्युद्धशौण्डैर्हि मित्रवद्भिर्महारथैः ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवैर्वा हते भीष्मे त्वय़ि स्वर्गमुपेय़ुषि |
३८ क
वन पर्व
अध्याय
२३८
दुर्योधन उवाच
पाण्डवैर्विक्रमाढ्यैश्च सावमानमवेक्षितः ||
२० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१२७
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवैर्विग्रहस्तात भ्रंशय़ेन्महतः सुखात् ||
४४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९१
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवैर्विग्रहो घोरः समारव्धो मय़ा प्रभो ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७०
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवैर्हन्यमानाश्च द्रोणमेवापरेऽव्रजन् ||
२१ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवैश्च हृते राज्ये को नु जीवति मादृशः ||
५० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४५
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवैस्तु महाराज धार्तराष्ट्री महाचमूः |
२२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवो जीविताकाङ्क्षी राधेय़ं नाभ्यहारय़त् ||
६३ ख
वन पर्व
अध्याय
१२
विदुर उवाच
पाण्डवो धर्मराजोऽहं यदि ते श्रोत्रमागतः |
२६ क
वन पर्व
अध्याय
१७६
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवो भिमसेनोऽहं धर्मराजादनन्तरः |
३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११३
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवो भीमसेनश्च धृष्टद्युम्नश्च पार्षतः ||
३६ ख
वन पर्व
अध्याय
१५२
भीम उवाच
पाण्डवो भीमसेनोऽहं धर्मपुत्रादनन्तरः |
१ क
सभा पर्व
अध्याय
२७
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवो वाहुवीर्येण निजघान महामृधे ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय
१४७
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवो वाय़ुतनय़ो भीमसेन इति श्रुतः ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१११
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवो व्यकिरत्कर्णं घनोऽद्रिमिव वृष्टिभिः ||
३२ ख
आदि पर्व
अध्याय
१५९
गन्धर्व उवाच
पाण्डुं च कुरुशार्दूल षडेतान्कुलवर्धनान् |
७ ख
आदि पर्व
अध्याय
१०५
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डुं दृष्ट्वा नरव्याघ्रं व्यस्मय़न्त नरा भुवि ||
६ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३९
व्यास उवाच
पाण्डुं मरुद्गणं विद्धि विशिष्टतममच्युतम् |
९ क
आदि पर्व
अध्याय
१००
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डुं लक्षणसम्पन्नं दीप्यमानमिव श्रिय़ा |
२१ ख
आदि पर्व
अध्याय
११८
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डुं संस्कारय़ामास देशे परमसंवृते ||
५ ख
आदि पर्व
अध्याय
११६
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डुः परमधर्मात्मा युय़ुजे कालधर्मणा ||
१२ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२६
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डुः स्मरति नित्यं च वलहन्तुः समीपतः |
१७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
७८
वसिष्ठ उवाच
पाण्डुकम्वलवर्णां तु सवत्सां कांस्यदोहनाम् |
२० क
शल्य पर्व
अध्याय
२९
दुर्योधन उवाच
पाण्डुकौरवसंमर्दाज्जीवमानान्नरर्षभान् ||
१४ ख
आदि पर्व
अध्याय
१०५
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डुना नरसिंहेन कौरवाणां यशोभृता ||
८ ख
आदि पर्व
अध्याय
१०५
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डुना मिथिलां गत्वा विदेहाः समरे जिताः ||
११ ख
आदि पर्व
अध्याय
१०५
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डुना वशगाः कृत्वा करकर्मसु योजिताः ||
१४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६२
सञ्जय़ उवाच
पाण्डुनावर्जितं राज्यं कौरवाणां यशस्तथा |
१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९८
सञ्जय़ उवाच
पाण्डुपाञ्चालमत्स्यानां प्रचक्रे कदनं महत् ||
२६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९३
सञ्जय़ उवाच
पाण्डुपाञ्चालसम्भग्नं व्यूहमालोक्य वीर्यवान् |
३४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३९
सञ्जय़ उवाच
पाण्डुपाञ्चालसेनानां कौरवाणां च मारिष |
३२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२
सञ्जय़ उवाच
पाण्डुपाञ्चालसैन्येषु द्रक्ष्यथापि महात्मनोः ||
१५ ख
आदि पर्व
अध्याय
१०५
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डुपावकमासाद्य व्यदह्यन्त नराधिपाः ||
१३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
पाण्डुपुत्रस्त्रिभिर्वाणैर्वक्षस्यभिहतो वली ||
३२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२६
सञ्जय़ उवाच
पाण्डुपुत्रस्य सैन्यानि कुरु सर्वाणि भस्मसात् ||
२१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१६४
भीष्म उवाच
पाण्डुपुत्रस्य सैन्यानि प्रधक्ष्यति जय़े धृतः ||
१३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
२०
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डुपुत्राः कथं नाम न प्राप्ताः पैतृकं वसु ||
५ ख
सभा पर्व
अध्याय
४
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डुपुत्रानृषींश्चैव रमय़न्त उपासते ||
३३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४७
सञ्जय़ उवाच
पाण्डुपुत्रान्रणे हन्तुं ससैन्यान्किमु संहताः ||
५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६०
सञ्जय़ उवाच
पाण्डुपुत्रान्हनिष्यामः सहिताः समरे त्रय़ः ||
३३ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
१६
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डुपुत्राश्च ते सर्वे युधिष्ठिरपुरोगमाः ||
९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
११
सञ्जय़ उवाच
पाण्डुपुत्रेण वै तस्य केतुं छिन्नं महात्मना |
५७ क
स्त्री पर्व
अध्याय
१२
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डुपुत्रेषु मे शर्म प्रीतिश्चाप्यवतिष्ठते ||
१४ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३६
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डुपुत्रैः परिवृतो निषसाद कुरूद्वहः ||
१२ ख
आदि पर्व
अध्याय
१८०
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डुपुत्रौ महावीर्यौ प्रतीय़तुररिन्दमौ ||
१३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४०
सञ्जय़ उवाच
पाण्डुपुत्रौ महेष्वासौ वारय़ामास पत्रिभिः ||
१४ ख