शल्य पर्व
अध्याय
५३
नारद उवाच
पश्य युद्धं महाघोरं शिष्ययोर्यदि मन्यसे ||
३१ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३३
सञ्जय़ उवाच
पश्य युद्धं महावाहो इति ते राममव्रुवन् |
१० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
पश्य यूथैर्वहुविधैर्मृगाणां सर्वतोदिशम् |
४२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९७
सञ्जय़ उवाच
पश्य योधान्रणे भिन्नान्धावमानांस्ततस्ततः ||
५० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२६३
भीष्म उवाच
पश्य राज्ञां गतिं विप्र लोकांश्चावेक्ष चक्षुषा ||
४२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२१
सञ्जय़ उवाच
पश्य राधेय़ पाञ्चालान्प्रणुन्नान्द्रोणसाय़कैः |
११ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२७
सञ्जय़ उवाच
पश्य राधेय़ राजानः पृथिव्यां प्रवरा युधि |
४ क
वन पर्व
अध्याय
१२९
लोमश उवाच
पश्य रामह्रदानेतान्पश्य नाराय़णाश्रमम् ||
६ ख
आदि पर्व
अध्याय
१४०
भीम उवाच
पश्य वाहू सुवृत्तौ मे हस्तिहस्तनिभाविमौ |
९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
व्रह्मो उवाच
पश्य वाह्वोर्वलं मेऽद्य निघ्नतः शात्रवान्रणे ||
११३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५७
कर्ण उवाच
पश्य वाह्वोर्वलं मेऽद्य शिक्षितस्य च पश्य मे |
३४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७८
अर्जुन उवाच
पश्य वाह्वोश्च मे वीर्यं धनुषश्च जनार्दन |
१८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८६
सञ्जय़ उवाच
पश्य वीर यथा ह्येष फल्गुनस्य सुतो वली |
४६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१४
भीष्म उवाच
पश्य वीर्यं कुमारस्य नैतदन्यः करिष्यति ||
१५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२३
सञ्जय़ उवाच
पश्य वीर्यं ममाद्य त्वं सङ्ग्रामे दहतो रिपून् ||
२४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१०५
मुनिरु उवाच
पश्य वुद्ध्या मनुष्याणां राजन्नापदमात्मनः |
४६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
उपमन्युरु उवाच
पश्य वृक्षान्मनोरम्यान्सदा पुष्पफलान्वितान् |
१९९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११७
सञ्जय़ उवाच
पश्य वृष्णिप्रवीरेण क्रीडन्तं कुरुपुङ्गवम् |
५० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११७
सञ्जय़ उवाच
पश्य वृष्ण्यन्धकव्याघ्रं सौमदत्तिवशं गतम् ||
४७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११७
सञ्जय़ उवाच
पश्य वृष्ण्यन्धकव्याघ्रं सौमदत्तिवशं गतम् |
५५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
९८
नारद उवाच
पश्य वेश्मानि रौक्माणि मातले राजतानि च |
९ क
स्त्री पर्व
अध्याय
२१
गान्धार्यु उवाच
पश्य वैकर्तनं कर्णं निहत्यातिरथान्वहून् |
२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८३
सञ्जय़ उवाच
पश्य व्यूहं महेष्वास निर्मितं सागरोपमम् |
१६ क
स्त्री पर्व
अध्याय
२३
गान्धार्यु उवाच
पश्य शान्तनवं कृष्ण शय़ानं सूर्यवर्चसम् |
१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८५
सञ्जय़ उवाच
पश्य शैनेय़ सैन्यानि द्रवमाणानि संय़ुगे |
७० क
कर्ण पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
पश्य संशप्तकैः क्रुद्धैः सर्वतः समभिद्रुतः |
५७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२३
उग्रसेन उवाच
पश्य सङ्कल्पते लोको नारदस्य प्रकीर्तने |
३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
पश्य सात्वतभीमाभ्यां निरुद्धाधिष्ठितः प्रभुः |
७ क
सभा पर्व
अध्याय
४३
दुर्योधन उवाच
पश्य सात्वतमुख्येन शिशुपालं निपातितम् |
२२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
५
दुर्योधन उवाच
पश्य सेनापतिं युक्तमनु शान्तनवादिह ||
१० ख
शल्य पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
पश्य सैन्यं महत्सूत पाण्डवैः समभिद्रुतम् |
३३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०५
सञ्जय़ उवाच
पश्य सैन्यानि गाङ्गेय़ द्रवमाणानि सर्वशः |
१६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५८
सञ्जय़ उवाच
पश्य सैन्यानि वार्ष्णेय़ द्राव्यमाणानि कौरवैः |
३३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
पश्य स्वर्गस्य माहात्म्यं पाञ्चाला हि परन्तप |
६३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२३
सञ्जय़ उवाच
पश्य हीमौ मम भुजौ वज्रसंहननोपमौ ||
२६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२६४
भीष्म उवाच
पश्य ह्यप्सरसो दिव्या मय़ा दत्तेन चक्षुषा |
१४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
दुर्योधन उवाच
पश्य ह्यस्य भुजौ पीनौ नागराजकरोपमौ |
१६१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
पश्य ह्येनं महावाहो विधुन्वानं महद्धनुः |
४१ क
वन पर्व
अध्याय
१६४
अर्जुन उवाच
पश्यंश्चाप्सरसः श्रेष्ठा नृत्यमानाः परन्तप ||
५६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०६
याज्ञवल्क्य उवाच
पश्यंस्तथैवापश्यंश्च पश्यत्यन्यस्तथानघ |
७० क
भीष्म पर्व
अध्याय
२७
श्रीभगवानु उवाच
पश्यञ्शृण्वन्स्पृशञ्जिघ्रन्नश्नन्गच्छन्स्वपञ्श्वसन् ||
८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९१
सञ्जय़ उवाच
पश्यतः पार्थिवेन्द्रस्य तदद्भुतमिवाभवत् ||
६२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
३४
व्राह्मण उवाच
पश्यतः शृण्वतो वुद्धिरात्मनो येषु जाय़ते ||
७ ख
आदि पर्व
अध्याय
११७
वैशम्पाय़न उवाच
पश्यतः सततं पाण्डोः शश्वत्प्रीतिरवर्धत ||
२६ ख
वन पर्व
अध्याय
२०२
व्याध उवाच
पश्यतः सर्वभूतानि सर्वावस्थासु सर्वदा |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१६
नारद उवाच
पश्यतः सर्वभूतानि सर्वावस्थासु सर्वदा ||
५१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४१
सञ्जय़ उवाच
पश्यतः सर्वलोकस्य भीमस्य च महात्मनः ||
५२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६२
सञ्जय़ उवाच
पश्यतः सूतपुत्रस्य पाण्डवस्य भय़ार्दितम् ||
६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४६
सञ्जय़ उवाच
पश्यतस्तव पुत्रस्य कर्णस्य च मदोत्कटाः |
५१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
पश्यतस्तव पुत्रस्य कर्णस्य च महात्मनः |
१५३ ख