सभा पर्व
अध्याय
४७
दुर्योधन उवाच
प्रीत्यर्थं ते महाभागा धर्मराज्ञो महात्मनः |
५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
४६
भीष्म उवाच
प्रीत्यर्थं लोकय़ात्रा च पश्यत स्त्रीनिवन्धनम् ||
१० ख
सभा पर्व
अध्याय
४८
दुर्योधन उवाच
प्रीत्यर्थं व्राह्मणाश्चैव क्षत्रिय़ाश्च विनिर्जिताः |
३२ क
सभा पर्व
अध्याय
४८
दुर्योधन उवाच
प्रीत्या च वहुमानाच्च अभ्यगच्छन्युधिष्ठिरम् ||
३२ ग
सभा पर्व
अध्याय
५०
धृतराष्ट्र उवाच
प्रीत्या च वहुमानाच्च रत्नान्याभरणानि च ||
५ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
प्रीत्या चोच्चैरुदक्रोशंस्तथैवास्फोटय़ंस्तलान् ||
१४१ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
५
नारद उवाच
प्रीत्या ददौ स कर्णाय़ मालिनीं नगरीमथ |
६ क
वन पर्व
अध्याय
२१४
मार्कण्डेय़ उवाच
प्रीत्या देवी च संय़ुक्ता शुक्रं जग्राह पाणिना ||
७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
प्रीत्या परमय़ा युक्तः प्रस्मय़ंश्चाव्रवीज्जय़म् ||
१४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
प्रीत्या परमय़ा युक्तः समाश्लिष्य युधिष्ठिरम् ||
१७ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५४
सञ्जय़ उवाच
प्रीत्या परमय़ा युक्तो युधिष्ठिरमथाव्रवीत् ||
४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१२१
नारद उवाच
प्रीत्या प्रतिगृहीतश्च स्वर्गे दुन्दुभिनिस्वनैः ||
४ ख
आदि पर्व
अध्याय
५३
सूत उवाच
प्रीत्या युक्ता ईप्सितं सर्वशस्ते; कर्तारः स्म प्रवणा भागिनेय़ ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१४०
भीष्म उवाच
प्रीत्या ह्यमृतवद्विप्राः क्रुद्धाश्चैव यथा विषम् ||
३७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१२१
नारद उवाच
प्रीत्यैव चासि दौहित्रैस्तारितस्त्वमिहागतः |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२८२
पराशर उवाच
प्रीत्योपनीता निर्दिष्टा धर्मिष्ठान्कुरुते सदा ||
१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०
राजो उवाच
प्रीय़ता हि तदा व्रह्मन्ममानुग्रहवुद्धिना |
५० क
आदि पर्व
अध्याय
५३
सूत उवाच
प्रीय़तामय़मास्तीकः सत्यं सूतवचोऽस्तु तत् ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय
१५९
वैश्रवण उवाच
प्रीय़ते पार्थ पार्थेन दिवि गाण्डीवधन्वना ||
२२ ग
वन पर्व
अध्याय
२२४
वैशम्पाय़न उवाच
प्रीय़ते भावनिर्द्वन्द्वा तेभ्यश्च विगतज्वरा ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
६७
भीष्म उवाच
प्रीय़ते हि हरन्पापः परवित्तमराजके |
१३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९५
भीष्म उवाच
प्रीय़न्ते पितरश्चास्य ऋषय़ो देवतास्तथा |
८६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११६
भीष्म उवाच
प्रीय़न्ते पितरश्चैव न्याय़तो मांसतर्पिताः ||
५७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
प्रीय़न्ते पितरस्तस्य तथैव च पितामहाः ||
४९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८७
वैशम्पाय़न उवाच
प्रीय़माणस्य सुहृदो विदुषो वुद्धिसत्तमः |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७६
नारद उवाच
प्रीय़माणा नरा यत्र प्रय़च्छेय़ुरय़ाचिताः |
५२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८३
भीष्म उवाच
प्रीय़माणास्तु मामूचुः प्रीताः स्म भरतर्षभ |
२२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६
सञ्जय़ उवाच
प्रीय़माणेन विहितो धर्मराजेन भारत ||
१५ ग
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३६
वैशम्पाय़न उवाच
प्रीय़माणो महातेजाः सर्ववेदविदां वरः ||
१५ ग
आदि पर्व
अध्याय
२१३
वैशम्पाय़न उवाच
प्रीय़माणो हलधरः सम्वन्धप्रीतिमावहन् ||
४९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१५
वैशम्पाय़न उवाच
प्रीय़माणौ महात्मानौ पुराणावृषिसत्तमौ ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१५०
भीष्म उवाच
प्रीय़ामहे त्वय़ा नित्यं तरुप्रवर शल्मले ||
७ ख
सभा पर्व
अध्याय
२५
वैशम्पाय़न उवाच
प्रीय़ामहे त्वय़ा वीर पर्याप्तो विजय़स्तव ||
१० ख
सभा पर्व
अध्याय
५२
विदुर उवाच
प्रीय़ामहे भवतः सङ्गमेन; समागताः कुरवश्चैव सर्वे ||
८ ख
आदि पर्व
अध्याय
१४
शौनक उवाच
प्रीय़ामहे भृशं तात पितेवेदं प्रभाषसे ||
२ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२८
द्रुपद उवाच
प्रीय़े त्वय़ाहं त्वत्तश्च प्रीतिमिच्छामि शाश्वतीम् ||
१३ ख
विराट पर्व
अध्याय
८
द्रौपद्यु उवाच
प्रीय़ेय़ुस्तेन वासेन गन्धर्वाः पतय़ो मम ||
२९ ख
विराट पर्व
अध्याय
५५
अर्जुन उवाच
प्रेक्षकाः कुरवः सर्वे भवन्तु सहसैनिकाः ||
६ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२०
सञ्जय़ उवाच
प्रेक्षकाः समपद्यन्त तय़ोः पुरुषसिंहय़ोः ||
११ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१७९
भीष्म उवाच
प्रेक्षकाः समपद्यन्त परिवार्य रणाजिरम् ||
२१ ख
आदि पर्व
अध्याय
९६
वैशम्पाय़न उवाच
प्रेक्षकाः समपद्यन्त भीष्मशाल्वसमागमे ||
३० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१९
वैशम्पाय़न उवाच
प्रेक्षणीय़तरं राजन्सुवेषं वलवत्तदा ||
१० ख
शल्य पर्व
अध्याय
११
सञ्जय़ उवाच
प्रेक्षणीय़तरावास्तां पुष्पिताविव किंशुकौ ||
१५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०७
सञ्जय़ उवाच
प्रेक्षणीय़तरावास्तां वृष्टिमन्ताविवाम्वुदौ ||
३३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
५७
वैशम्पाय़न उवाच
प्रेक्षणीय़प्रदानेन स्मृतिं मेधां च विन्दति ||
२२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२०
सञ्जय़ उवाच
प्रेक्षणीय़ौ चाभवतां सर्वय़ोधसमागमे ||
७१ ख
वन पर्व
अध्याय
१६३
अर्जुन उवाच
प्रेक्षतश्चैव मे देवस्तत्रैवान्तरधीय़त ||
५३ ख
मौसल पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
प्रेक्षतस्त्वेव पार्थस्य वृष्ण्यन्धकवरस्त्रिय़ः |
६१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८०
सञ्जय़ उवाच
प्रेक्षतां सर्वसैन्यानां छादय़ामास साय़कैः ||
२० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९२
सञ्जय़ उवाच
प्रेक्षतां सर्वसैन्यानां मध्येन शिनिपुङ्गवः |
४३ क