कर्ण पर्व
अध्याय
६८
सञ्जय़ उवाच
प्राणान्निरस्याशु महीमतीय़ु; र्महोरगा वासमिवाभितोऽस्त्रैः ||
२१ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३३
वैशम्पाय़न उवाच
प्राणान्प्राणेषु च दधदिन्द्रिय़ाणीन्द्रिय़ेषु च ||
२५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५४
दुर्योधन उवाच
प्राणान्वा सम्परित्यज्य प्रतिय़ुध्यामहे परान् ||
११ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
प्राणान्सन्त्यजतां युद्धे प्राणद्यूताभिदेवने ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२५
वैशम्पाय़न उवाच
प्राणान्हुत्वा चावभृथे रणे स; वाजिग्रीवो मोदते देवलोके ||
२७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९५
सञ्जय़ उवाच
प्राणापहारिणं रौद्रं वादित्रोत्क्रुष्टनादितम् |
३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
२६
श्रीभगवानु उवाच
प्राणापानगती रुद्ध्वा प्राणाय़ामपराय़णाः ||
२९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
३७
श्रीभगवानु उवाच
प्राणापानसमाय़ुक्तः पचाम्यन्नं चतुर्विधम् ||
१४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२१
व्राह्मण उवाच
प्राणापानान्तरे देवी वाग्वै नित्यं स्म तिष्ठति |
१४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२४
नारद उवाच
प्राणापानावाज्यभागौ तय़ोर्मध्ये हुताशनः |
१२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२४
नारद उवाच
प्राणापानाविदं द्वन्द्वमवाक्चोर्ध्वं च गच्छतः |
९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२३
व्राह्मण उवाच
प्राणापानावुदानश्च व्यानश्चैव तमव्रुवन् |
१८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२३
व्राह्मण उवाच
प्राणापानावुदानश्च समानश्च तमव्रुवन् |
१५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२३
व्राह्मण उवाच
प्राणापानावुदानश्च समानो व्यान एव च |
२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४२
व्रह्मो उवाच
प्राणापानावुदानश्च समानो व्यान एव च ||
८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
३९
व्रह्मो उवाच
प्राणापानावुदानश्चाप्येत एव त्रय़ो गुणाः ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२३१
व्यास उवाच
प्राणापानाश्रय़ो वाय़ुः खेष्वाकाशं शरीरिणाम् ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२३१
व्यास उवाच
प्राणापानौ च जीवश्च नित्यं देहेषु देहिनाम् ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१९३
भीष्म उवाच
प्राणापानौ तथोदानं समानं व्यानमेव च |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१२
भीष्म उवाच
प्राणापानौ विकारश्च धातवश्चात्र निःसृताः ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९०
भीष्म उवाच
प्राणापानौ समानं च व्यानोदानौ च तत्त्वतः ||
२६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२३
व्राह्मण उवाच
प्राणापानौ समानश्च व्यानश्चैव तमव्रुवन् |
२१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
२७
श्रीभगवानु उवाच
प्राणापानौ समौ कृत्वा नासाभ्यन्तरचारिणौ ||
२७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२१
भीष्म उवाच
प्राणाश्च सर्वभूतानां नित्यमन्ने प्रतिष्ठिताः |
३८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१६
वासुदेव उवाच
प्राणाय़ामपरा नित्यं यं विशन्ति जपन्ति च ||
४४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९४
वसिष्ठ उवाच
प्राणाय़ामस्तु सगुणो निर्गुणो मनसस्तथा ||
८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४८
व्रह्मो उवाच
प्राणाय़ामैरथ प्राणान्संय़म्य स पुनः पुनः |
४ क
वन पर्व
अध्याय
८१
पुलस्त्य उवाच
प्राणाय़ामैर्निर्हरन्ति श्वलोमानि द्विजोत्तमाः ||
५१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०४
याज्ञवल्क्य उवाच
प्राणाय़ामो हि सगुणो निर्गुणं धारणं मनः ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२५०
नारद उवाच
प्राणिनः प्राणिनामीश नमस्तेऽभिप्रसीद मे ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय
१०५
लोमश उवाच
प्राणिनः समदृश्यन्त शतशोऽथ सहस्रशः ||
२२ ख
आदि पर्व
अध्याय
५९
जनमेजय़ उवाच
प्राणिनां चैव सर्वेषां सर्वशः सर्वविद्ध्यसि ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१९२
व्राह्मण उवाच
प्राणिनां जननं सत्यं सत्यं सन्ततिरेव च |
६६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१८
नारद उवाच
प्राणिनां प्राणसंरोधे मांसश्लेष्मविचेष्टितम् ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३१५
भीष्म उवाच
प्राणिनां सर्वतो वाय़ुश्चेष्टा वर्तय़ते पृथक् |
३५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४९
कृष्ण उवाच
प्राणिनां हि वधं पार्थ धार्मिको नाववुध्यते ||
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१७८
भृगुरु उवाच
प्राणिनामनिलो देहान्यथा चेष्टय़ते वली ||
२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४९
कृष्ण उवाच
प्राणिनामवधस्तात सर्वज्याय़ान्मतो मम |
२० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५
भीष्म उवाच
प्राणिनामिह सर्वेषां सर्वं सर्वत्र दृश्यते ||
१० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११२
वृहस्पतिरु उवाच
प्राणिनामिह सर्वेषां साक्षिभूतानि चानिशम् |
२१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५८
सञ्जय़ उवाच
प्राणिनामिह सर्वेषामेषा निष्ठा युधिष्ठिर ||
५९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५
वैशम्पाय़न उवाच
प्राणिनामेतदात्मत्वात्स्यादपीति विनाशनम् |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
प्राणिनो नाप्सु मज्जन्ति नानर्थे पावकोऽदहत् |
४९ क
शल्य पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
प्राणिनो येऽवमन्यन्ते ते भवन्तीह राक्षसाः |
१८ ख
वन पर्व
अध्याय
१९९
मार्कण्डेय़ उवाच
प्राणिनोऽन्योन्यभक्षाश्च तत्र किं प्रतिभाति ते ||
२४ ख
वन पर्व
अध्याय
१६०
वैशम्पाय़न उवाच
प्राणिभिः सततं स्वप्नो ह्यभीक्ष्णं च निषेव्यते ||
३२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२४
भीष्म उवाच
प्राणिविक्रय़वृत्तिश्च राजन्नार्हन्ति केतनम् ||
२२ ख
वन पर्व
अध्याय
१९८
व्याध उवाच
प्राणिहिंसारतश्चापि भवते धार्मिकः पुनः ||
३३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३२
महेश्वर उवाच
प्राणिहिंसाविमोक्षेण व्रह्मणा समुदीरितः ||
५८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२८१
पराशर उवाच
प्राणी करोत्ययं कर्म सर्वमात्मार्थमात्मना ||
१ ख