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शल्य पर्व
अध्याय ५९
सञ्जय़ उवाच
प्रतिज्ञापारणं धर्मः क्षत्रिय़स्येति वेत्थ ह |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
प्रतिज्ञापालनं चैव रक्षा चित्राङ्गदस्य च |
८० क
अनुशासन पर्व
अध्याय २
भीष्म उवाच
प्रतिज्ञामकरोद्धीमान्दीप्ततेजा विशां पते ||
४० ख
द्रोण पर्व
अध्याय ५७
सञ्जय़ उवाच
प्रतिज्ञामात्मनो रक्षन्मुमोहाचिन्त्यविक्रमः ||
१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८६
सञ्जय़ उवाच
प्रतिज्ञामात्मनो रक्षन्सत्यां कर्तुं च भारत ||
३५ ख
आदि पर्व
अध्याय १२३
वैशम्पाय़न उवाच
प्रतिज्ञामात्मनो रक्षन्सत्ये च निरतः सदा ||
३६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय २७
व्राह्मण उवाच
प्रतिज्ञावृक्षमफलं शान्तिच्छाय़ासमन्वितम् |
१६ क
कर्ण पर्व
अध्याय २४
दुर्योधन उवाच
प्रतिज्ञाय़ ततो देवो देवतानां रिपुक्षय़म् |
१४५ क
आदि पर्व
अध्याय ६८
वैशम्पाय़न उवाच
प्रतिज्ञाय़ तु दुःषन्ते प्रतिय़ाते शकुन्तला |
१ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०३
श्रीकृष्ण उवाच
प्रतिज्ञाय़ वधं जिष्णो पुरा भीष्मस्य संय़ुगे |
९० क
द्रोण पर्व
अध्याय ५७
सञ्जय़ उवाच
प्रतिज्ञाय़ां च हीनाय़ां कथं जीवेत मद्विधः ||
१२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२०
सञ्जय़ उवाच
प्रतिज्ञेय़ं कृता कर्ण जय़द्रथवधं प्रति ||
१७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२३
सञ्जय़ उवाच
प्रतिज्ञेय़ं मय़ोत्तीर्णा विवुधैरपि दुस्तरा ||
२७ ख
आदि पर्व
अध्याय २०५
वैशम्पाय़न उवाच
प्रतितिष्ठेत लोकेऽस्मिन्नधर्मश्चैव नो भवेत् ||
१५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १९३
शिखण्ड्यु उवाच
प्रतिदास्यामि भगवँल्लिङ्गं पुनरिदं तव |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय ८८
भीष्म उवाच
प्रतिदास्ये च भवतां सर्वं चाहं भय़क्षय़े |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ९८
भीष्म उवाच
प्रतिध्वस्तमुखः पूतिरमात्यान्वहु शोचय़न् ||
२६ ख
विराट पर्व
अध्याय ३२
वैशम्पाय़न उवाच
प्रतिनन्दाम ते वाक्यं सर्वं चैव विशां पते |
४१ क
विराट पर्व
अध्याय ३२
वैशम्पाय़न उवाच
प्रतिनन्दामि ते वाक्यं मनोज्ञं मत्स्य भाषसे ||
४६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ४१
भीष्म उवाच
प्रतिनन्द्य च धर्मात्मा शिष्यं धर्मपराय़णम् |
३४ क
आदि पर्व
अध्याय १८८
वैशम्पाय़न उवाच
प्रतिनन्द्य स तान्सर्वान्पृष्ट्वा कुशलमन्ततः |
२ क
वन पर्व
अध्याय २७२
मार्कण्डेय़ उवाच
प्रतिनन्दय़ मां पुत्र पुरा वद्ध्वेव वासवम् ||
७ ख
वन पर्व
अध्याय २४०
वैशम्पाय़न उवाच
प्रतिनिक्षिप्य तं वीरं कृत्या समभिपूज्य च |
२८ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६३
सञ्जय़ उवाच
प्रतिपक्षग्रहं चक्रुः कर्णार्जुनसमागमे ||
३१ ख
वन पर्व
अध्याय ६६
सुदेव उवाच
प्रतिपत्कलुषेवेन्दोर्लेखा नाति विराजते |
७ क
आदि पर्व
अध्याय ९७
वैशम्पाय़न उवाच
प्रतिपत्तिं च कृच्छ्रेषु शुक्राङ्गिरसय़ोरिव ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ५९
भीष्म उवाच
प्रतिपत्तिविमोहाच्च धर्मस्तेषामनीनशत् ||
१६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १७४
भीष्म उवाच
प्रतिपत्स्यति राजा स पिता ते यदनन्तरम् |
६ क
मौसल पर्व
अध्याय ७
वसुदेव उवाच
प्रतिपत्स्यति वीभत्सुर्भवतश्चौर्ध्वदेहिकम् ||
१६ ख
आदि पर्व
अध्याय ७९
वैशम्पाय़न उवाच
प्रतिपत्स्यामि ते राजन्पाप्मानं जरय़ा सह |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय २७९
भीष्म उवाच
प्रतिपद्य नरो धर्मं स्वर्गलोके महीय़ते |
७ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
प्रतिपद्यस्व राधेय़ं प्राप्तकालमनन्तरम् |
४६ क
सभा पर्व
अध्याय ५०
दुर्योधन उवाच
प्रतिपन्नान्स्वकार्येषु संमोहय़सि नो भृशम् ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय २६७
मार्कण्डेय़ उवाच
प्रतिपन्नौ यदा रूपं राक्षसं तौ निशाचरौ |
५३ क
वन पर्व
अध्याय ७७
वृहदश्व उवाच
प्रतिपाणः प्रदातव्यः परं हि धनमुच्यते ||
७ ख
सभा पर्व
अध्याय ५३
युधिष्ठिर उवाच
प्रतिपाणश्च कोऽन्योऽस्ति ततो द्यूतं प्रवर्तताम् ||
१४ ख
आदि पर्व
अध्याय १३५
वैशम्पाय़न उवाच
प्रतिपादय़ विश्वासादिति किं करवाणि वः ||
३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७३
सञ्जय़ उवाच
प्रतिपालय़ मां सूत निय़म्याश्वान्मुहूर्तकम् |
२२ क
आदि पर्व
अध्याय १४
सूत उवाच
प्रतिपालय़ितव्यस्ते जन्मकालोऽस्य धीरय़ा |
२० क
शल्य पर्व
अध्याय २४
सञ्जय़ उवाच
प्रतिपिष्टैर्महानागैः समन्तात्पर्वतोपमैः |
५३ क
शान्ति पर्व
अध्याय १३८
भीष्म उवाच
प्रतिपुष्कलघाती स्यात्तीक्ष्णतुण्ड इव द्विजः ||
४९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १५५
वैशम्पाय़न उवाच
प्रतिपूज्य च तान्सर्वान्विश्रान्तः सहसैनिकः |
२० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४२
व्राह्मणा ऊचुः
प्रतिपूज्य महावाहो यत्तच्छृणु नराधिप ||
१९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १५१
सञ्जय़ उवाच
प्रतिपूज्याव्रवीद्वाक्यं भ्रातृभिः परिवारितः ||
१० ख
उद्योग पर्व
अध्याय १९३
भीष्म उवाच
प्रतिपेदे चतुष्पादं धनुर्वेदं नृपात्मजः |
५७ क
आदि पर्व
अध्याय ८०
वैशम्पाय़न उवाच
प्रतिपेदे जरां राजा यय़ातिर्नाहुषस्तदा |
११ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३४
वैशम्पाय़न उवाच
प्रतिपेदे तदा व्यासस्तदर्थमुपकल्पितम् ||
२५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ४०
वैशम्पाय़न उवाच
प्रतिपेदे महद्राज्यं सुहृद्भिः सह भारत ||
२२ ख
वन पर्व
अध्याय ४४
वैशम्पाय़न उवाच
प्रतिपेदे महावाहुः शङ्खदुन्दुभिनादितम् ||
११ ख
आदि पर्व
अध्याय २१३
वैशम्पाय़न उवाच
प्रतिपेदे महावाहुः सह रामेण केशवः |
३४ क