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आदि पर्व
अध्याय १३३
वैशम्पाय़न उवाच
पौरेषु तु निवृत्तेषु विदुरः सर्वधर्मवित् |
१८ क
महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
पौरैरनुगतो दूरं सर्वैरन्तःपुरैस्तथा ||
२३ ग
आदि पर्व
अध्याय १३४
युधिष्ठिर उवाच
पौरो वापि जनः कश्चित्तथा कार्यमतन्द्रितैः ||
२८ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १०
धृतराष्ट्र उवाच
पौरोगवाश्च सभ्याश्च कुर्युर्ये व्यवहारिणः ||
१३ ख
विराट पर्व
अध्याय २
भीम उवाच
पौरोगवो व्रुवाणोऽहं वल्लवो नाम नामतः |
१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५
व्यास उवाच
पौरोहित्यं कथं कृत्वा तव देवगणेश्वर |
२३ क
आदि पर्व
अध्याय ७१
वैशम्पाय़न उवाच
पौरोहित्येन याज्यार्थे काव्यं तूशनसं परे |
६ ख
वन पर्व
अध्याय ६५
सुदेव उवाच
पौर्णमासीमिव निशां राहुग्रस्तनिशाकराम् |
१३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३०
महेश्वर उवाच
पौर्णमास्यां तु यो यज्ञो नित्ययज्ञस्तथैव च ||
१५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०१
सञ्जय़ उवाच
पौर्णमास्यामम्वुवेगं यथा वेला महोदधेः ||
१७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ९६
सञ्जय़ उवाच
पौर्णमास्यामिवोद्धूतं वेलेव सलिलाशय़म् ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय २०९
मार्कण्डेय़ उवाच
पौर्णमास्येषु सर्वेषु हविषाज्यं स्रुवोद्यतम् |
६ क
वन पर्व
अध्याय १७५
जनमेजय़ उवाच
पौलस्त्यं योऽऽह्वय़द्युद्धे धनदं वलदर्पितः |
२ क
आदि पर्व
अध्याय ६१
वैशम्पाय़न उवाच
पौलस्त्या भ्रातरः सर्वे जज्ञिरे मनुजेष्विह |
८२ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३१
सञ्जय़ उवाच
पौलस्त्यैर्यातुधानैश्च तामसैश्चोग्रविक्रमैः ||
७६ ख
वन पर्व
अध्याय १७०
मातलिरु उवाच
पौलोमाध्युषितं वीर कालकेय़ैश्च दानवैः ||
१० ख
उद्योग पर्व
अध्याय ४८
वैशम्पाय़न उवाच
पौलोमान्कालखञ्जांश्च सहस्राणि शतानि च ||
१४ ख
विराट पर्व
अध्याय ५६
वैशम्पाय़न उवाच
पौलोमान्कालखञ्जांश्च सहस्राणि शतानि च ||
९ ख
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
पौलोमे भृगुवंशस्य विस्तारः परिकीर्तितः ||
७२ ख
वन पर्व
अध्याय १७०
अर्जुन उवाच
पौलोमैः कालकेय़ैश्च नित्यहृष्टैरधिष्ठितम् ||
२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०९
अङ्गिरा उवाच
पौषमासं तु कौन्तेय़ भक्तेनैकेन यः क्षपेत् |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३०
श्रीभगवानु उवाच
पौष्करे व्रह्मसदने सत्यं मामृषय़ो विदुः ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ६५
भीष्म उवाच
पौष्टिका रूपदाश्चैव तथा पापविनाशनाः |
१० क
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
पौष्यं पौलोममास्तीकमादिवंशावतारणम् ||
३४ ख
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
पौष्ये पर्वणि माहात्म्यमुत्तङ्कस्योपवर्णितम् |
७२ क
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
प्र पूर्वगौ पूर्वजौ चित्रभानू; गिरा वा शंसामि तपनावनन्तौ |
६० क
शान्ति पर्व
अध्याय ६९
भीष्म उवाच
प्रकण्ठीः कारय़ेत्सम्यगाकाशजननीस्तथा |
४१ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५१
सञ्जय़ उवाच
प्रकम्पमानः पततु भूमावाधिरथेर्ध्वजः ||
८८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३८
सञ्जय़ उवाच
प्रकम्पितानामभिघातवेगै; रभिघ्नतां चापततां जवेन |
२२ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८८
सञ्जय़ उवाच
प्रकम्प्यमाना महती तव पुत्रस्य वाहिनी |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय ११९
भीष्म उवाच
प्रकर्तव्या वुधा भृत्या नास्थाने प्रक्रिय़ा क्षमा ||
३ ख
शल्य पर्व
अध्याय ५३
वैशम्पाय़न उवाच
प्रकर्ता कलहानां च नित्यं च कलहप्रिय़ः |
१८ क
सभा पर्व
अध्याय २१
वैशम्पाय़न उवाच
प्रकर्षणाकर्षणाभ्यामभ्याकर्षविकर्षणैः |
१४ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५६
सञ्जय़ उवाच
प्रकर्षता गुप्तमुदाय़ुधेन; किरीटिना लोकमहारथेन |
१० क
वन पर्व
अध्याय १५९
वैशम्पाय़न उवाच
प्रकर्षन्त इवाभ्राणि पिवन्त इव मारुतम् ||
३२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
प्रकर्षन्निव सेनाग्रं मागधश्च नृपो यय़ौ ||
२७ ख
वन पर्व
अध्याय १६०
वैशम्पाय़न उवाच
प्रकर्षन्सर्वभूतानि सविता परिवर्तते ||
३५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ६४
सञ्जय़ उवाच
प्रकाल्यमानं तत्सैन्यं नाशकत्प्रतिवीक्षितुम् ||
५७ ख
वन पर्व
अध्याय १३८
शूद्र उवाच
प्रकाल्यमानस्तेनाय़ं शूलहस्तेन रक्षसा |
७ क
आदि पर्व
अध्याय १८५
वैशम्पाय़न उवाच
प्रकालय़न्नेव स पार्थिवौघा; न्क्रुद्धोऽन्तकः प्राणभृतो यथैव ||
५ ख
सभा पर्व
अध्याय ५०
दुर्योधन उवाच
प्रकालय़ेद्दिशः सर्वाः प्रतोदेनेव सारथिः |
१६ क
भीष्म पर्व
अध्याय ३६
श्रीभगवानु उवाच
प्रकाशं च प्रवृत्तिं च मोहमेव च पाण्डव |
२२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ६७
सञ्जय़ उवाच
प्रकाशं चक्रुराकाशमुद्यतानि भुजोत्तमैः |
२७ क
उद्योग पर्व
अध्याय १९१
भीष्म उवाच
प्रकाशं चोदिता देवी प्रत्युवाच महीपतिम् ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय २१०
गुरुरु उवाच
प्रकाशं भगवानेतदृषिर्नाराय़णोऽमृतम् |
३६ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७०
सञ्जय़ उवाच
प्रकाशं लघु चित्रं च दर्शय़न्नस्त्रलाघवम् ||
२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय २
व्यास उवाच
प्रकाशं वा रहस्यं वा रात्रौ वा यदि वा दिवा |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय १३७
पूजन्यु उवाच
प्रकाशं वाप्रकाशं वा वुद्ध्वा देशवलादिकम् ||
३९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३६
व्रह्मो उवाच
प्रकाशं सर्वभूतेषु लाघवं श्रद्दधानता |
१० क
आदि पर्व
अध्याय १०४
वैशम्पाय़न उवाच
प्रकाशकर्मा तपनस्तस्यां गर्भं दधौ ततः |
१० क