आदि पर्व
अध्याय
९४
वैशम्पाय़न उवाच
पौरवः स्वपुरं गत्वा पुरन्दरपुरोपमम् |
३८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
पौरवस्तु धनुश्छित्त्वा धृष्टकेतोर्महारथः |
१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
पौरवस्त्वथ सौभद्रं शरव्रातैरवाकिरत् |
४७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४५
सञ्जय़ उवाच
पौरवांश्च महेष्वासान्गाण्डीवनिनदो महान् ||
४६ ख
आदि पर्व
अध्याय
९४
वैशम्पाय़न उवाच
पौरवाञ्शन्तनोः पुत्रः पितरं च महाय़शाः |
३९ क
आदि पर्व
अध्याय
६२
वैशम्पाय़न उवाच
पौरवाणां वंशकरो दुःषन्तो नाम वीर्यवान् |
३ क
आदि पर्व
अध्याय
१०९
मृग उवाच
पौरवाणामृषीणां च तेषामक्लिष्टकर्मणाम् |
२० क
आदि पर्व
अध्याय
११०
वैशम्पाय़न उवाच
पौरवृद्धाश्च ये तत्र निवसन्त्यस्मदाश्रय़ाः |
२४ ख
आदि पर्व
अध्याय
८०
वैशम्पाय़न उवाच
पौरवेणाथ वय़सा यय़ातिर्नहुषात्मजः |
१ क
आदि पर्व
अध्याय
७०
वैशम्पाय़न उवाच
पौरवेणाथ वय़सा राजा यौवनमास्थितः |
४३ क
आदि पर्व
अध्याय
९४
वैशम्पाय़न उवाच
पौरवेषु ततः पुत्रं यौवराज्येऽभ्यषेचय़त् ||
३८ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
पौरवो धृष्टकेतुं च शरैरासाद्य संय़ुगे |
१३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
पौरवो धृष्टकेतुं तु शङ्खदेशे महासिना |
२२ क
आदि पर्व
अध्याय
६१
वैशम्पाय़न उवाच
पौरवो नाम राजर्षिः स वभूव नरेष्विह ||
२८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१६४
भीष्म उवाच
पौरवो राजशार्दूलस्तव राजन्महारथः |
१९ क
आदि पर्व
अध्याय
७०
वैशम्पाय़न उवाच
पौरवो वंश इति ते ख्यातिं लोके गमिष्यति ||
४५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३६
सञ्जय़ उवाच
पौरवो वृषसेनश्च विसृजन्तः शिताञ्शरान् |
६ क
वन पर्व
अध्याय
५८
वृहदश्व उवाच
पौरा न तस्मिन्सत्कारं कृतवन्तो युधिष्ठिर ||
९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४३
भीष्म उवाच
पौराणं ये दण्डमुपासते च; शेषं कृष्णादुपशिक्षस्व पार्थ ||
५ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३३
वैशम्पाय़न उवाच
पौराणमात्मनः सर्वं विद्यावान्स विशां पते |
२९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३५
व्यास उवाच
पौराणमेतदाख्यातं रूपं वरदमैश्वरम् ||
६९ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४५
वैशम्पाय़न उवाच
पौराणां च महाराज श्रुत्वा राज्ञस्तदा गतिम् ||
४० ख
वन पर्व
अध्याय
१०६
लोमश उवाच
पौराणां वचनं श्रुत्वा घोरं नृपतिसत्तमः |
१३ क
वन पर्व
अध्याय
१०६
लोमश उवाच
पौराणां हितकामेन सगरेण विवासितः ||
१६ ख
विराट पर्व
अध्याय
५९
वैशम्पाय़न उवाच
पौराणानां महास्त्राणां विचित्रोऽय़ं समागमः ||
३६ ख
आदि पर्व
अध्याय
४
महाभारत कथा
पौराणिकः पुराणे कृतश्रमः स तान्कृताञ्जलिरुवाच |
२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१००
नारद उवाच
पौराणी श्रूय़ते लोके गीय़ते या मनीषिभिः ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय
२४
वैशम्पाय़न उवाच
पौरानिमाञ्जानपदांश्च सर्वा; न्हित्वा प्रय़ातः क्व नु धर्मराजः ||
९ ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
पौरानुगमनं चैव धर्मपुत्रस्य धीमतः ||
१०५ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२९
वैशम्पाय़न उवाच
पौरानुरागसन्तप्तः पश्चादिदमभाषत ||
११ ख
आदि पर्व
अध्याय
२११
वैशम्पाय़न उवाच
पौराश्च पादचारेण यानैरुच्चावचैस्तथा |
६ क
आदि पर्व
अध्याय
१३३
वैशम्पाय़न उवाच
पौराश्च पुरुषव्याघ्रानन्वय़ुः शोककर्शिताः ||
५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८७
वैशम्पाय़न उवाच
पौराश्च वहुला राजन्हृषीकेशं दिदृक्षवः |
४ क
वन पर्व
अध्याय
२२८
वैशम्पाय़न उवाच
पौराश्चानुय़युः सर्वे सहदारा वनं च तत् ||
२५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२४६
व्यास उवाच
पौराश्चापि मनस्त्रस्तास्तेषामपि चला स्थितिः ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय
९६
लोमश उवाच
पौरुकुत्सं ततो जग्मुस्त्रसदस्युं महाधनम् |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२४
भीष्म उवाच
पौरुषं कर्म दैवं च फलवृत्तिस्वभावतः |
५१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२३०
व्यास उवाच
पौरुषं कर्म दैवं च फलवृत्तिस्वभावतः |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२३०
व्यास उवाच
पौरुषं कारणं केचिदाहुः कर्मसु मानवाः |
४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७९
सञ्जय़ उवाच
पौरुषं ख्यापय़ंस्तूर्णं व्यधमत्तव वाहिनीम् ||
२२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
पौरुषं दर्शय़ञ्शूरो यस्तिष्ठेदग्रतः पुमान् |
५३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१५७
सञ्जय़ उवाच
पौरुषं दर्शय़न्युद्धे कोपस्य कुरु निष्कृतिम् ||
७ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२
भीष्म उवाच
पौरुषं विप्रनष्टं मे स्त्रीत्वं केनापि मेऽभवत् |
१४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१५
धृतराष्ट्र उवाच
पौरुषं सर्वलोकस्य परं यस्य महाहवे |
५० क
शान्ति पर्व
अध्याय
५६
भीष्म उवाच
पौरुषं हि परं मन्ये दैवं निश्चित्यमुच्यते ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय
२२६
वैशम्पाय़न उवाच
पौरुषाद्दिवि देवेषु भ्राजसे रश्मिवानिव ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२५
वैशम्पाय़न उवाच
पौरुषे कर्मणि कृते नास्त्यधर्मो युधिष्ठिर ||
२० ख
आदि पर्व
अध्याय
२१५
वैशम्पाय़न उवाच
पौरुषेण तु यत्कार्यं तत्कर्तारौ स्व पावक |
१९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
७०
युधिष्ठिर उवाच
पौरुषेय़ो हि वलवानाधिर्हृदय़वाधनः |
६५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
६९
भीष्म उवाच
पौरेभ्यो नृपतेर्वापि स्वाधीनान्कारय़ेत तान् ||
५९ ख