आदि पर्व
अध्याय
८
सूत उवाच
पदा चैनं समाक्रामन्मुमूर्षुः कालचोदिता ||
१५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
पदा चोरः समाक्रम्य स्फुरतो व्यहनच्छिरः ||
६३ ख
वन पर्व
अध्याय
२५६
वैशम्पाय़न उवाच
पदा मूर्ध्नि महावाहुः प्राहरद्विलपिष्यतः ||
४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५९
युधिष्ठिर उवाच
पदा मूर्ध्न्यस्पृशत्क्रोधान्न च हृष्ये कुलक्षय़े ||
३१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४५
सञ्जय़ उवाच
पदा युगमधिष्ठाय़ जघान चतुरो हय़ान् ||
३७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
९६
कविरु उवाच
पदा स गां ताडय़तु सूर्यं च प्रति मेहतु |
३२ क
वन पर्व
अध्याय
२५२
वैशम्पाय़न उवाच
पदा समाहत्य पलाय़मानः; क्रुद्धं यदा द्रक्ष्यसि भीमसेनम् ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय
१२
विदुर उवाच
पदा सव्येन चिक्षेप तद्रक्षः पुनराव्रजत् ||
४५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
४७
वैशम्पाय़न उवाच
पदाङ्गं सन्धिपर्वाणं स्वरव्यञ्जनलक्षणम् |
३० क
भीष्म पर्व
अध्याय
७७
सञ्जय़ उवाच
पदाताश्च तथा शूरा नानाप्रहरणाय़ुधाः |
६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७८
वैशम्पाय़न उवाच
पदातिः पितरं कोपाद्योधय़ामास पाण्डवम् ||
३० ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
९
वैशम्पाय़न उवाच
पदातिः स महीपालो जीर्णो गजपतिर्यथा ||
२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६५
सञ्जय़ उवाच
पदातिगणसंय़ुक्तस्त्रस्तो राजन्भय़ार्दितः |
८० क
द्रोण पर्व
अध्याय
९१
सञ्जय़ उवाच
पदातिजनसम्पूर्णमव्रवीत्सारथिं पुनः ||
११ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७५
सञ्जय़ उवाच
पदातिनं तु कौन्तेय़ं युध्यमानं नरर्षभाः |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९६
सञ्जय़ उवाच
पदातिनं रथं नागं सादिनं तुरगं तथा |
२७ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३०
वैशम्पाय़न उवाच
पदातिनस्तथैवान्ये नखरप्रासय़ोधिनः ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५३
सञ्जय़ उवाच
पदातिना महातेजा गिरौ हिमवति प्रभुः ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१०१
भीष्म उवाच
पदातिनागवहुला प्रावृट्काले प्रशस्यते |
२२ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१२
धृतराष्ट्र उवाच
पदातिनागैर्वहुकर्दमां नदीं; सपत्ननाशे नृपतिः प्रय़ाय़ात् ||
१४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१६१
सञ्जय़ उवाच
पदातिनीं नागवतीं रथिनीमश्ववृन्दिनीम् |
२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१५२
वैशम्पाय़न उवाच
पदातिनो नरास्तत्र वभूवुर्हेममालिनः ||
१८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७४
सञ्जय़ उवाच
पदातिमत्स्यकलिलं शङ्खदुन्दुभिनिस्वनम् ||
५१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
पदातिरथनागाश्वैर्गजाश्वरथपत्तय़ः |
७० क
भीष्म पर्व
अध्याय
७८
सञ्जय़ उवाच
पदातिरसिमुद्यम्य प्राद्रवत्पार्षतं प्रति ||
४८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४४
वासुदेव उवाच
पदातिरुत्पथेनैव प्राधावद्दक्षिणामुखः ||
३१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
पदातिरेकः सङ्क्रुद्धः शत्रूणां भय़वर्धनः |
४२ क
शल्य पर्व
अध्याय
३१
दुर्योधन उवाच
पदातिर्गदय़ा सङ्ख्ये स युध्यतु मय़ा सह ||
२७ ख
वन पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
पदातिर्भ्रातृभिः सार्धं प्रातिष्ठत युधिष्ठिरः ||
२६ ख
आदि पर्व
अध्याय
४५
सूत उवाच
पदातिर्वद्धनिस्त्रिंशस्तताय़ुधकलापवान् |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२५
भीष्म उवाच
पदातिर्वद्धनिस्त्रिंशो धन्वी वाणी नरेश्वर |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१०१
भीष्म उवाच
पदातिवहुला सेना दृढा भवति भारत |
२१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७
सञ्जय़ उवाच
पदातिषु रथाश्वेषु वारणेषु च सर्वशः |
२३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
४७
सञ्जय़ उवाच
पदातिसङ्घान्रथसङ्घान्समन्ता; द्व्यात्ताननः काल इवाततेषुः |
५४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
पदातिसङ्घाश्च रथाश्च सङ्ख्ये; हय़ाश्च नागाश्च धनञ्जय़ेन ||
११९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
पदातिसङ्घैश्च हतैर्विविधाय़ुधभूषणैः |
३० क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२३
श्रीकृष्ण उवाच
पदातिसादिसङ्घांश्च क्षतजौघपरिप्लुतान् ||
४० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
पदातिस्तूर्णमभ्यर्छद्रथस्थं द्रुपदात्मजम् ||
२५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८६
सञ्जय़ उवाच
पदातिस्तूर्णमागच्छज्जिघांसुः सौवलान्युधि ||
३६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१०४
भीष्म उवाच
पदातिय़न्त्रवहुला स्वनुरक्ता षडङ्गिनी ||
३७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५३
सञ्जय़ उवाच
पदाती रथिनं सङ्ख्ये रथी चापि पदातिनम् |
१४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
पदातीनन्वपश्याम धावमानान्समन्ततः ||
११४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१०१
भीष्म उवाच
पदातीनां क्षमा भूमिः पर्वतोपवनानि च ||
२० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२४
सञ्जय़ उवाच
पदातीनां च भद्रं ते तव तेषां च सङ्कुलम् ||
५९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
पदातीनां च सङ्घेषु विनिघ्नञ्शोणितोक्षितः |
४० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
पदातीनां च समरे तव तेषां च सङ्कुलम् ||
७७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
पदातीनां तु सहसा प्रद्रुतानां महामृधे |
५५ क
वन पर्व
अध्याय
२५३
वैशम्पाय़न उवाच
पदातीनां मध्यगतं च धौम्यं; विक्रोशन्तं भीममभिद्रवेति ||
२३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८२
वैशम्पाय़न उवाच
पदातीनां सहस्रं च सादिनां च परन्तप |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
पदातीनां सहस्राणि दंशितान्येकविंशतिः |
१४ क