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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १८
व्राह्मण उवाच
पूर्वदेहकृतं सर्वमवश्यमुपभुज्यते ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०
राजो उवाच
पूर्वदेहे यथा वृत्तं तन्निवोध द्विजोत्तम |
४८ क
वन पर्व
अध्याय २०१
व्याध उवाच
पूर्वपूर्वगुणाः सर्वे क्रमशो गुणिषु त्रिषु ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय १११
वैशम्पाय़न उवाच
पूर्वपूर्वतमाभावे मत्वा लिप्सेत वै सुतम् |
३० क
अनुशासन पर्व
अध्याय ८९
भीष्म उवाच
पूर्वप्रोष्ठपदाः कुर्वन्वहु विन्देदजाविकम् |
१३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ६३
नारद उवाच
पूर्वभाद्रपदाय़ोगे राजमाषान्प्रदाय़ तु |
३१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११३
वृहस्पतिरु उवाच
पूर्वमन्नं प्रदातव्यमृजुना धर्ममिच्छता ||
७ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय २
कृप उवाच
पूर्वमप्यतिदुःशीलो न दैन्यं कर्तुमर्हति |
२७ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५०
वासुदेव उवाच
पूर्वमप्येतदेवोक्तं युद्धकाल उपस्थिते |
४८ क
आदि पर्व
अध्याय ९६
वैशम्पाय़न उवाच
पूर्वमभ्यर्दितं दृष्ट्वा भीष्मं शाल्वेन ते नृपाः |
३३ क
द्रोण पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
पूर्वमस्मासु भग्नेषु फल्गुनेनामितौजसा |
१ क
आदि पर्व
अध्याय १०५
वैशम्पाय़न उवाच
पूर्वमागस्कृतो गत्वा दशार्णाः समरे जिताः |
८ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय १४
वैशम्पाय़न उवाच
पूर्वमाचार्यपुत्राय़ ततोऽनन्तरमात्मने |
५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ८०
व्यास उवाच
पूर्वमासन्नशृङ्गा वै गाव इत्यनुशुश्रुमः |
१३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९३
सञ्जय़ उवाच
पूर्वमुक्तं महावाहो निहनिष्यामि सोमकान् |
३७ क
द्रोण पर्व
अध्याय ९८
सञ्जय़ उवाच
पूर्वमुक्तश्च ते भ्राता भीष्मेण स सुय़ोधनः |
१९ क
उद्योग पर्व
अध्याय १०५
नारद उवाच
पूर्वमुक्तस्त्वदर्थं च कृतः कामश्च तेन मे ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३४७
भीष्म उवाच
पूर्वमुक्तेन विधिना युक्ता युक्तेन मत्समम् ||
३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १७०
दुर्योधन उवाच
पूर्वमुक्त्वा महावाहो पाण्डवान्सह सोमकैः |
२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १९
युधिष्ठिर उवाच
पूर्वमेकस्तु म्रिय़ते क्व चैकस्तिष्ठते वद ||
४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ११०
गालव उवाच
पूर्वमेतां दिशं गच्छ या पूर्वं परिकीर्तिता |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३५
व्यास उवाच
पूर्वमेव च पद्मस्य पत्रे सूर्यांशुसप्रभे |
२१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७८
वैशम्पाय़न उवाच
पूर्वमेव च वाणौघैर्गाढविद्धोऽर्जुनेन सः ||
३७ ख
आदि पर्व
अध्याय २१०
वैशम्पाय़न उवाच
पूर्वमेव तु कृष्णस्य वचनात्तं महीधरम् |
९ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८५
सञ्जय़ उवाच
पूर्वमेव तु यातास्ते कौरवाणां महारथाः ||
६७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २०१
भीष्म उवाच
पूर्वमेव महाभागा वसवोऽष्टौ प्रकीर्तिताः ||
१९ ग
वन पर्व
अध्याय २९०
सूर्य उवाच
पूर्वमेव मय़ा दत्तं दृष्टवत्यसि येन माम् ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय २७७
सावित्र्यु उवाच
पूर्वमेव मय़ा राजन्नभिप्राय़मिमं तव |
१६ क
शल्य पर्व
अध्याय ३४
जनमेजय़ उवाच
पूर्वमेव यदा रामस्तस्मिन्युद्ध उपस्थिते |
१ क
शल्य पर्व
अध्याय ५३
नारद उवाच
पूर्वमेव हतो भीष्मो द्रोणः सिन्धुपतिस्तथा |
२३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १२२
सञ्जय़ उवाच
पूर्वमेव हि कृष्णस्य मनोगतमिदं प्रभो |
३८ क
आदि पर्व
अध्याय १९४
कर्ण उवाच
पूर्वमेव हि ते सूक्ष्मैरुपाय़ैर्यतितास्त्वय़ा |
२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ६८
भीष्म उवाच
पूर्वमेवाक्षरं नान्यदभिधेय़ं कथञ्चन ||
८ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४३
वैशम्पाय़न उवाच
पूर्वमेवादिदेशासौ निकाय़ेषु महात्मनाम् |
४७ क
आदि पर्व
अध्याय ५८
वैशम्पाय़न उवाच
पूर्वमेवाभवद्राजन्विदितं परमेष्ठिनः ||
४१ ख
वन पर्व
अध्याय २७९
द्युमत्सेन उवाच
पूर्वमेवाभिलषितः सम्वन्धो मे त्वय़ा सह |
१३ क
शल्य पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
पूर्वमेवाहमुक्तो वै विदुरेण महात्मना |
५५ क
स्त्री पर्व
अध्याय ४
विदुर उवाच
पूर्वमेवेह कलले वसते किञ्चिदन्तरम् ||
२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १
मृत्युरु उवाच
पूर्वमेवैतदुक्तं हि मय़ा लुव्धक कालतः ||
६० ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३९
व्यास उवाच
पूर्वमेवैष हृदय़े व्यवसाय़ोऽभवन्मम |
३ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १६
व्राह्मण उवाच
पूर्वराजातिसर्गांश्च पालय़त्येव पाण्डवः ||
१५ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १४
धृतराष्ट्र उवाच
पूर्वराज्ञां च पुत्रोऽय़मिति कृत्वानुजानत ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३१२
भीष्म उवाच
पूर्वरात्रे तु तत्रासौ भूत्वा ध्यानपराय़णः |
४४ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९४
वसिष्ठ उवाच
पूर्वरात्रे परे चैव धारय़ेत मनोऽऽत्मनि ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय २०३
व्याध उवाच
पूर्वरात्रे परे चैव युञ्जानः सततं मनः |
३७ क
आदि पर्व
अध्याय ३६
सूत उवाच
पूर्वरूपं तु तन्नूनमासीत्स्वर्गगतिं प्रति |
१३ ख
वन पर्व
अध्याय १४९
भीम उवाच
पूर्वरूपमदृष्ट्वा ते न यास्यामि कथञ्चन |
१ क
उद्योग पर्व
अध्याय ५५
सञ्जय़ उवाच
पूर्वरूपमिदं पश्य वय़ं जेष्याम सञ्जय़ |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय २२१
युधिष्ठिर उवाच
पूर्वरूपाणि मे राजन्पुरुषस्य भविष्यतः |
१ क
वन पर्व
अध्याय ४२
वैशम्पाय़न उवाच
पूर्वर्षिरमितात्मा त्वं नरो नाम महावलः |
१८ क