अनुशासन पर्व
अध्याय
११२
वृहस्पतिरु उवाच
पूर्वं दत्त्वा तु यः कन्यां द्वितीय़े सम्प्रय़च्छति |
७३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६५
सञ्जय़ उवाच
पूर्वं दृष्ट्वा वधं घोरं वलस्य वलिनां वरः |
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१८८
भीष्म उवाच
पूर्वं ध्यानपथं प्राप्य नित्ययोगेन शाम्यति ||
२० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२३
सञ्जय़ उवाच
पूर्वं न समरे ह्येवमवधीदर्जुनो रिपून् |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
११४
भीष्म उवाच
पूर्वं न सहते वेगं क्षिप्रमेव स नश्यति ||
१२ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
पूर्वं नरकभाग्यस्तु पश्चात्स्वर्गमुपैति सः ||
१२ ग
उद्योग पर्व
अध्याय
२७
सञ्जय़ उवाच
पूर्वं नरस्तान्धृतिमान्विनिघ्नँ; ल्लोके प्रशंसां लभतेऽनवद्याम् ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३६
भीष्म उवाच
पूर्वं निविष्टमुन्माथं चपलत्वान्न वुद्धवान् ||
१४२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
पूर्वं निहत्य सङ्ग्रामे पश्चादार्जुनिरन्वगात् ||
३६ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
पूर्वं परीक्षितो हि त्वमासीर्द्वैतवनं प्रति |
३१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
९०
भीष्म उवाच
पूर्वं परोक्षं कर्तव्यमेतत्कौन्तेय़ शासनम् ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
८३
भीष्म उवाच
पूर्वं पर्यचरद्युक्तः प्रवृत्त्यर्थी पुनः पुनः ||
७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
९२
अग्निरु उवाच
पूर्वं पिण्डं पितुर्दद्यात्ततो दद्यात्पितामहे |
१३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३०
सञ्जय़ उवाच
पूर्वं पितृवधात्क्रुद्धो भीमसेनमुपाद्रवत् ||
१८ ख
आदि पर्व
अध्याय
१६४
गन्धर्व उवाच
पूर्वं पुरोहितः कार्यः पार्थ राज्याभिवृद्धय़े ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१०१
भीष्म उवाच
पूर्वं पूर्वं ज्याय़ एषां संनिपाते युधिष्ठिर ||
१७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१९
व्राह्मण उवाच
पूर्वं पूर्वं परित्यज्य स निरारम्भको भवेत् ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय
१३
सूत उवाच
पूर्वं प्रचोदितः सूतः पिता मे लोमहर्षणः |
७ क
वन पर्व
अध्याय
२३१
वैशम्पाय़न उवाच
पूर्वं प्रभग्नैः सहिताः पाण्डवानभ्ययुस्तदा ||
९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
पूर्वं प्रवर्तते पुण्यं तत्सर्वं श्रुतवानसि ||
५० ख
वन पर्व
अध्याय
८५
वैशम्पाय़न उवाच
पूर्वं प्राचीं दिशं राजन्राजर्षिगणसेविताम् |
३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६
सञ्जय़ उवाच
पूर्वं मध्ये च पश्चाच्च तवैव विदितं हि तत् ||
२७ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३४
वैशम्पाय़न उवाच
पूर्वं महाराज यदुप्रवीर; ऋत्विक्सुहृद्विप्रगणैश्च सार्धम् |
३६ क
आदि पर्व
अध्याय
६८
वैशम्पाय़न उवाच
पूर्वं मृतं च भर्तारं पश्चात्साध्व्यनुगच्छति ||
४५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१९३
भीष्म उवाच
पूर्वं ये चापरे तत्र समेता व्राह्मणर्षभाः |
४ क
आदि पर्व
अध्याय
७८
वैशम्पाय़न उवाच
पूर्वं वय़ः परित्यज्य जरां सद्योऽन्वपद्यत ||
३६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३७
पूजन्यु उवाच
पूर्वं संमानना यत्र पश्चाच्चैव विमानना |
२९ क
सभा पर्व
अध्याय
२०
वैशम्पाय़न उवाच
पूर्वं सङ्कथिते पुम्भिर्नृलोके लोकसत्कृते ||
३१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
९२
अग्निरु उवाच
पूर्वं स्ववंशजानां तु कृत्वाद्भिस्तर्पणं पुनः |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२४
युधिष्ठिर उवाच
पूर्वं हि कथितं श्रुत्वा भृगुभाषितमुत्तमम् |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०६
धृतराष्ट्र उवाच
पूर्वं हि निर्जितः कर्णो भीमसेनेन संय़ुगे |
२ क
वन पर्व
अध्याय
१९९
मार्कण्डेय़ उवाच
पूर्वं हि विहितं कर्म देहिनं न विमुञ्चति |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
७४
कश्यप उवाच
पूर्वं हि व्राह्मणाः सृष्टा इति धर्मविदो विदुः |
३० क
भीष्म पर्व
अध्याय
९४
सञ्जय़ उवाच
पूर्वं हि स्त्री समुत्पन्ना शिखण्डी राजवेश्मनि |
१६ क
वन पर्व
अध्याय
७६
नल उवाच
पूर्वं ह्यसि सखा मेऽसि सम्वन्धी च नराधिप |
१४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१५६
सञ्जय़ उवाच
पूर्वकर्मभिरप्यन्ये त्रैधमेतद्विकृष्यते ||
१५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१०६
सुपर्ण उवाच
पूर्वकार्याणि कार्याणि दैवानि सुखमीप्सता ||
९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०५
सञ्जय़ उवाच
पूर्वकालं तव मय़ा प्रतिज्ञातं महावल ||
२४ ख
वन पर्व
अध्याय
२४०
दानवा ऊचुः
पूर्वकाय़श्च सर्वस्ते निर्मितो वज्रसञ्चय़ैः ||
६ ख
आदि पर्व
अध्याय
११५
वैशम्पाय़न उवाच
पूर्वजं नकुलेत्येवं सहदेवेति चापरम् |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१
युधिष्ठिर उवाच
पूर्वजं भ्रातरं कर्णं पृथाय़ा वचनात्प्रभो ||
३७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३७
व्यास उवाच
पूर्वजन्म भविष्यं च भक्तानां स्नेहतो मय़ा ||
५७ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
१८
गान्धार्यु उवाच
पूर्वजातिकृतं पापं मन्ये नाल्पमिवानघ |
११ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७
व्यास उवाच
पूर्वजेन ममाक्षिप्तं शरीरं वर्जितं त्विदम् ||
१० ख
शल्य पर्व
अध्याय
४१
वैशम्पाय़न उवाच
पूर्वतः पश्चिमश्चासीद्विश्वामित्रस्य धीमतः ||
४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
६१
भीष्म उवाच
पूर्वदत्तां हरन्भूमिं नरकाय़ोपगच्छति ||
७१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०
धृतराष्ट्र उवाच
पूर्वदेवौ महात्मानौ नरनाराय़णावुभौ |
४१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
४८
वैशम्पाय़न उवाच
पूर्वदेवौ व्यतिक्रान्तौ नरनाराय़णावृषी ||
५ ख
सभा पर्व
अध्याय
२६
वैशम्पाय़न उवाच
पूर्वदेशं महावीर्यो विजिग्ये कुरुनन्दनः ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१६८
व्राह्मण उवाच
पूर्वदेहकृतं कर्म शुभं वा यदि वाशुभम् |
३७ क