आदि पर्व
अध्याय
७१
वैशम्पाय़न उवाच
पुष्पैः फलैः प्रेषणैश्च तोषय़ामास भारत ||
२३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
९९
भीष्म उवाच
पुष्पैः सुरगणान्वृक्षाः फलैश्चापि तथा पितॄन् |
२८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८१
वैशम्पाय़न उवाच
पुष्पैश्च विविधैश्चित्रं मणिरत्नैश्च सर्वशः ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय
२५९
मार्कण्डेय़ उवाच
पुष्पोत्कटा च राका च मालिनी च विशां पते |
५ क
वन पर्व
अध्याय
२५९
मार्कण्डेय़ उवाच
पुष्पोत्कटाय़ां जज्ञाते द्वौ पुत्रौ राक्षसेश्वरौ |
७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५७
वैशम्पाय़न उवाच
पुष्पोपगं वाथ फलोपगं वा; यः पादपं स्पर्शय़ते द्विजाय़ |
३६ क
विराट पर्व
अध्याय
६३
वैशम्पाय़न उवाच
पुष्पोपहारैरर्च्यन्तां देवताश्चापि सर्वशः ||
२३ ख
वन पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
पुष्पोपहारैर्वलिभिरर्चय़ित्वा दिवाकरम् |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२९
व्यास उवाच
पुष्यते च पुनः सर्वान्प्रज्ञय़ा मुक्तहेतुकः ||
३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
६३
नारद उवाच
पुष्ये तु कनकं दत्त्वा कृतं चाकृतमेव च |
१० क
भीष्म पर्व
अध्याय
११
सञ्जय़ उवाच
पुष्ये भवन्ति मर्त्यानां रागो लोभश्च भारत ||
१३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३३
सञ्जय़ उवाच
पुष्येण सम्प्रय़ातोऽस्मि श्रवणे पुनरागतः |
५ ख
आदि पर्व
अध्याय
१६८
गन्धर्व उवाच
पुष्येण सहितं काले दिवाकरमिवोदितम् ||
१७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
वासुदेव उवाच
पूगैश्च मृगजातीनां महिषर्क्षनिषेवितम् ||
३३ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
१३७
भीष्म उवाच
पूजनी दुःखसन्तप्ता रुदती वाक्यमव्रवीत् ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३७
भीष्म उवाच
पूजनी नाम शकुनी दीर्घकालं सहोषिता ||
५ ख
आदि पर्व
अध्याय
२१९
वैशम्पाय़न उवाच
पूजनीय़तमावेतावपि सर्वैः सुरासुरैः |
१७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३८
विदुर उवाच
पूजनीय़ा महाभागाः पुण्याश्च गृहदीप्तय़ः |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३७
भीष्म उवाच
पूजन्या सह संवादो व्रह्मदत्तस्य पार्थिव ||
४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
९२
वैशम्पाय़न उवाच
पूजा प्रय़ुज्यतामाशु मुनीनां भावितात्मनाम् ||
४३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२५५
तुलाधार उवाच
पूजा स्याद्देवतानां हि यथा शास्त्रनिदर्शनम् ||
८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८९
वैशम्पाय़न उवाच
पूजां कृतां प्रीय़माणैर्नामंस्थाः पुरुषोत्तम ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२२
भीष्म उवाच
पूजां गुरूणां सततं करोमि; परस्य गुह्यं न च भिन्नपूर्वम् ||
३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८२
वैशम्पाय़न उवाच
पूजां चक्रुर्यथान्याय़माशीर्मङ्गलसंय़ुताम् ||
२६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१६५
भीष्म उवाच
पूजां चाप्यकरोद्धीमान्भोजनं चाप्यकल्पय़त् ||
२७ ख
वन पर्व
अध्याय
६१
दमय़न्त्यु उवाच
पूजां चास्या यथान्याय़ं कृत्वा तत्र तपोधनाः |
६५ क
सभा पर्व
अध्याय
५२
वैशम्पाय़न उवाच
पूजापूर्वं प्रतिगृह्याजमीढ; स्ततोऽपृच्छद्धृतराष्ट्रं सपुत्रम् ||
४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१७४
भीष्म उवाच
पूजाभिः स्वागताद्याभिरासनेनोदकेन च ||
१५ ख
सभा पर्व
अध्याय
३४
शिशुपाल उवाच
पूजामनर्हः कस्मात्त्वमभ्यनुज्ञातवानसि ||
१८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११२
वैशम्पाय़न उवाच
पूजामनुपमां चक्रे सर्वे ते च सभासदः ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१४२
भीष्म उवाच
पूजामस्मै प्रय़ुङ्क्ष्व त्वं प्रीय़ेतास्य मनो यथा ||
१९ ग
शल्य पर्व
अध्याय
३४
वैशम्पाय़न उवाच
पूजार्थं तत्र कॢप्तानि विप्राणां सुखमिच्छताम् ||
२३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७०
वैशम्पाय़न उवाच
पूजार्हं पूजय़ामासुः कृष्णं देवकिनन्दनम् ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
९७
भीष्म उवाच
पूजार्हाः पूजिता यस्य स वै लोकजिदुच्यते ||
१७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९२
वैशम्पाय़न उवाच
पूजार्हाः पूजिताश्चात्र विधिवच्छास्त्रचक्षुषा |
१२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१७
शल्य उवाच
पूजितं चोपविष्टं तमासने मुनिसत्तमम् |
५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
वासुदेव उवाच
पूजितं देवगन्धर्वैर्व्राह्म्या लक्ष्म्या समन्वितम् ||
२८ ख
विराट पर्व
अध्याय
३८
वृहन्नडो उवाच
पूजितं सुरमर्त्येषु विभर्ति परमं वपुः ||
४२ ख
आदि पर्व
अध्याय
५
सूत उवाच
पूजितः प्रवरो वंशो भृगूणां भृगुनन्दन ||
५ ग
उद्योग पर्व
अध्याय
८१
वैशम्पाय़न उवाच
पूजितः प्रय़यौ कृष्णः कुरूणां सदनं प्रति ||
२९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३१
सञ्जय़ उवाच
पूजितः सर्वभूतैश्च तव पुत्रैश्च भारत ||
१३३ ग
आदि पर्व
अध्याय
३८
सूत उवाच
पूजितश्च नरेन्द्रेण द्विजो गौरमुखस्ततः |
१६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१९३
भीष्म उवाच
पूजितश्च प्रतिय़यौ निवर्त्य तनय़ां किल ||
२८ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
१४१
भीष्म उवाच
पूजितश्च यथान्याय़ं स्वैश्च मांसैर्निमन्त्रितः ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२१
भीष्म उवाच
पूजितश्चैव विधिना यथाप्रोक्तेन शास्त्रतः ||
२१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४१
सञ्जय़ उवाच
पूजितस्तव पुत्रैश्च सर्वय़ोधैश्च भारत |
३९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५२
वैशम्पाय़न उवाच
पूजितस्तेन च तदा पर्यपृच्छदनामय़म् ||
८ ख
आदि पर्व
अध्याय
८२
वैशम्पाय़न उवाच
पूजितस्त्रिदशैः साध्यैर्मरुद्भिर्वसुभिस्तथा ||
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३७
पूजन्यु उवाच
पूजितस्यार्थमानाभ्यां जन्तोः पूर्वापकारिणः |
२८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८९
धृतराष्ट्र उवाच
पूजिता हि यथाशक्त्या दानमानासनैर्मय़ा |
२४ क