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शान्ति पर्व
अध्याय ३०९
भीष्म उवाच
पुरा जरा कलेवरं विजर्जरीकरोति ते |
४० क
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
पुरा तक्षशिलातस्तं निवृत्तमपराजितम् |
१७९ क
वन पर्व
अध्याय २५३
वैशम्पाय़न उवाच
पुरा तुषाग्नाविव हूय़ते हविः; पुरा श्मशाने स्रगिवापविध्यते |
१९ क
वन पर्व
अध्याय २४०
दानवा ऊचुः
पुरा त्वं तपसास्माभिर्लव्धो देवान्महेश्वरात् |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय २०२
भीष्म उवाच
पुरा दानवमुख्या हि क्रोधलोभसमन्विताः |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय १२४
भीष्म उवाच
पुरा दुर्योधनेनेह धृतराष्ट्राय़ मानद |
४ क
विराट पर्व
अध्याय ३५
वैशम्पाय़न उवाच
पुरा दूरतरं गावो ह्रिय़न्ते कुरुभिर्हि नः ||
६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १३२
विदुरो उवाच
पुरा दृष्ट्वा सुहृद्वर्गो मामपश्यत्सुदुर्गताम् ||
१५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ११७
सञ्जय़ उवाच
पुरा देवासुरे युद्धे शक्रस्य वलिना यथा ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय ९२
लोमश उवाच
पुरा देवय़ुगे चैव दृष्टं सर्वं मय़ा विभो |
६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ८२
भीष्म उवाच
पुरा देवय़ुगे तात दैत्येन्द्रेषु महात्मसु |
२४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३
नारद उवाच
पुरा देवय़ुगे तात भृगोस्तुल्यवय़ा इव ||
१९ ख
सभा पर्व
अध्याय ११
नारद उवाच
पुरा देवय़ुगे राजन्नादित्यो भगवान्दिवः |
१ क
आदि पर्व
अध्याय १४
सूत उवाच
पुरा देवय़ुगे व्रह्मन्प्रजापतिसुते शुभे |
५ क
महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
पुरा द्वैतवने चासि मय़ा पुत्र परीक्षितः |
१८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७२
धृतराष्ट्र उवाच
पुरा धात्रा यथा सृष्टं तत्तथा न तदन्यथा ||
२६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २५९
द्युमत्सेन उवाच
पुरा धिग्दण्ड एवासीद्वाग्दण्डस्तदनन्तरम् ||
१९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
पुरा नागस्य पतनादवप्लुत्य स्थितो महीम् |
४२ क
आदि पर्व
अध्याय १०४
वैशम्पाय़न उवाच
पुरा नाम तु तस्यासीद्वसुषेण इति श्रुतम् |
२१ क
द्रोण पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
पुरा निघ्नन्ति राधेय़ं भीमचापच्युताः शराः |
१९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ६
भीष्म उवाच
पुरा नृगश्च राजर्षिः कृकलासत्वमागतः ||
३८ ख
आदि पर्व
अध्याय ११२
वैशम्पाय़न उवाच
पुरा परमधर्मिष्ठः पूरोर्वंशविवर्धनः ||
७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ५४
दुर्योधन उवाच
पुरा परेषां पृथिवी कृत्स्नासीद्वशवर्तिनी |
२३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३३
सञ्जय़ उवाच
पुरा पार्थं हि ते दृष्ट्वा दुर्लभं गर्जितं भवेत् ||
२१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १८
वैशम्पाय़न उवाच
पुरा पुत्र मय़ा मेरौ तप्यता परमं तपः |
२ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २६
वैशम्पाय़न उवाच
पुरा प्रजापतिसमो राजासीदकुतोभय़ः |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय ६
वैशम्पाय़न उवाच
पुरा प्रत्यनुनेतुं वा नेतुं वाप्येकतां त्वय़ा ||
७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ९६
भीष्म उवाच
पुरा प्रपश्यामि परेण मर्त्या; न्वलीय़सा दुर्वलान्भुज्यमानान् |
१३ क
उद्योग पर्व
अध्याय ७२
भीमसेन उवाच
पुरा प्रसन्नाः कुरवः सहपुत्रास्तथा वय़म् |
९ क
वन पर्व
अध्याय ३९
जनमेजय़ उवाच
पुरा प्रहरतां श्रेष्ठः सङ्ग्रामेष्वपराजितः ||
५ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय १२
भीष्म उवाच
पुरा भङ्गाश्वनो नाम राजर्षिरतिधार्मिकः |
३ क
वन पर्व
अध्याय ८०
नारद उवाच
पुरा भागीरथीतीरे भीष्मो धर्मभृतां वरः |
१२ क
शल्य पर्व
अध्याय १५
सञ्जय़ उवाच
पुरा भूत्वा मृदुर्दान्तो यत्तदा दारुणोऽभवत् ||
४७ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३७
वैशम्पाय़न उवाच
पुरा मङ्कणकः सिद्धः कुशाग्रेणेति नः श्रुतम् |
३४ क
वन पर्व
अध्याय ८१
पुलस्त्य उवाच
पुरा मङ्कणको राजन्कुशाग्रेणेति नः श्रुतम् |
९८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३७
व्यास उवाच
पुरा मतिमतां श्रेष्ठाः परमेण समाधिना ||
५६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३५०
नाग उवाच
पुरा मध्याह्नसमय़े लोकांस्तपति भास्करे |
९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ५०
भीष्म उवाच
पुरा महर्षिश्च्यवनो भार्गवो भरतर्षभ |
३ क
आदि पर्व
अध्याय ९२
वैशम्पाय़न उवाच
पुरा मां स्त्री समभ्यागाच्छन्तनो भूतय़े तव ||
२० ख
वन पर्व
अध्याय २८१
सत्यवानु उवाच
पुरा मातुः पितुर्वापि यदि पश्यामि विप्रिय़म् |
९८ ख
वन पर्व
अध्याय २८१
सत्यवानु उवाच
पुरा मामूचतुश्चैव रात्रावस्राय़माणकौ |
८५ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०९
भीष्म उवाच
पुरा मृतः प्रणीय़से यमस्य मृत्युशासनात् |
३४ क
शान्ति पर्व
अध्याय २७४
भीष्म उवाच
पुरा मेरोर्महाराज शृङ्गं त्रैलोक्यविश्रुतम् |
५ क
शल्य पर्व
अध्याय ४
सञ्जय़ उवाच
पुरा यच्छ्रुतमेवासीदद्य पश्यामि तत्प्रभो ||
१० ख
शल्य पर्व
अध्याय ४६
वैशम्पाय़न उवाच
पुरा यत्र तपस्तप्तं विपुलं सुमहात्मना ||
२४ ख
वन पर्व
अध्याय ८०
पुलस्त्य उवाच
पुरा यत्र महाराज ऋषिकोटिः समाहिता |
१२४ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४४
वैशम्पाय़न उवाच
पुरा यथा महाराज वरुणं वै जलेश्वरम् |
२० क
उद्योग पर्व
अध्याय ४८
वैशम्पाय़न उवाच
पुरा युद्धात्साधु मन्ये पाण्डवैः सह सङ्गमम् |
४४ क
सभा पर्व
अध्याय ६६
दुर्योधन उवाच
पुरा युद्धाद्वलाद्वापि प्रकुर्वन्ति तवाहितम् ||
८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ६
भीष्म उवाच
पुरा यय़ातिर्विभ्रष्टश्च्यावितः पतितः क्षितौ |
३० क