chevron_left  नकुलःarrow_drop_down
भीष्म पर्व
अध्याय १०४
सञ्जय़ उवाच
नकुलः सहदेवश्च सात्यकिश्च महारथः |
२० क
उद्योग पर्व
अध्याय १४१
सञ्जय़ उवाच
नकुलः सहदेवश्च सात्यकिश्च महारथः |
३६ क
द्रोण पर्व
अध्याय १५३
सञ्जय़ उवाच
नकुलः सहदेवश्च सात्यकिश्च महारथः |
१० ख
शल्य पर्व
अध्याय १२
सञ्जय़ उवाच
नकुलः सहदेवश्च सात्यकिश्च महारथः |
३० क
भीष्म पर्व
अध्याय २३
सञ्जय़ उवाच
नकुलः सहदेवश्च सुघोषमणिपुष्पकौ ||
१६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४७
सञ्जय़ उवाच
नकुलः सहदेवश्च सुघोषमणिपुष्पकौ ||
२६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८५
सञ्जय़ उवाच
नकुलः सहदेवश्च हय़ानीकमभिद्रुतौ |
३० क
विराट पर्व
अध्याय ६६
विराट उवाच
नकुलः सहदेवो वा द्रौपदी वा यशस्विनी |
२ क
स्त्री पर्व
अध्याय १३
गान्धार्यु उवाच
नकुलः सहदेवो वा नैव जातु युधिष्ठिरः ||
१५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९७
धृतराष्ट्र उवाच
नकुलः सहदेवो वा सात्यकिर्वा महारथः |
४ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
नकुलः सहदेवोऽहं धृष्टद्युम्नोऽहमित्युत |
४१ क
सभा पर्व
अध्याय ४२
वैशम्पाय़न उवाच
नकुलः सुवलं राजन्सहपुत्रं समन्वय़ात् |
४३ क
शल्य पर्व
अध्याय १२
सञ्जय़ उवाच
नकुलप्रेषितां शक्तिं हेमदण्डां भय़ावहाम् |
२३ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६२
सञ्जय़ उवाच
नकुलमथ विदित्वा छिन्नवाणासनासिं; विरथमरिशरार्तं कर्णपुत्रास्त्रभग्नम् |
३२ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८४
सञ्जय़ उवाच
नकुलश्च चतुःषष्ट्या द्रौपदेय़ास्त्रिभिस्त्रिभिः ||
१४ ग
शल्य पर्व
अध्याय २१
सञ्जय़ उवाच
नकुलश्च ततो वीरो राजानं नवभिः शरैः |
१२ क
कर्ण पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
नकुलश्च तदा कर्णं प्रहसन्निदमव्रवीत् |
४९ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५६
सञ्जय़ उवाच
नकुलश्च शतेनाजौ कर्णं विव्याध साय़कैः ||
१७ ग
विराट पर्व
अध्याय ३२
वैशम्पाय़न उवाच
नकुलश्चापि सप्तैव शतानि प्राहिणोच्छरैः ||
२४ ग
कर्ण पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
नकुलस्तं तु विंशत्या विद्ध्वा भारसहैर्दृढैः |
५७ क
वन पर्व
अध्याय २५५
वैशम्पाय़न उवाच
नकुलस्तस्य नागस्य समीपपरिवर्तिनः |
२१ क
आदि पर्व
अध्याय ९०
वैशम्पाय़न उवाच
नकुलस्तु चैद्यां करेणुवतीं नाम भार्यामुदवहत् |
८६ क
कर्ण पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
नकुलस्तु ततः कर्णं विद्ध्वा सप्तभिराय़सैः |
६५ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४०
सञ्जय़ उवाच
नकुलस्तु ततः क्रुद्धस्तव पुत्रं त्रिसप्तभिः |
९ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४४
सञ्जय़ उवाच
नकुलस्तु ततः क्रुद्धो वृषसेनं स्मय़न्निव |
३५ क
कर्ण पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
नकुलस्तु ततो विद्धः सूतपुत्रेण भारत |
५६ क
वन पर्व
अध्याय २९६
वैशम्पाय़न उवाच
नकुलस्तु तथेत्युक्त्वा भ्रातुर्ज्येष्ठस्य शासनात् |
१० क
वन पर्व
अध्याय २९६
वैशम्पाय़न उवाच
नकुलस्तु तथेत्युक्त्वा शीघ्रमारुह्य पादपम् |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४४
सञ्जय़ उवाच
नकुलस्तु भृशं विद्धः स्यालेन तव धन्विना |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८२
सञ्जय़ उवाच
नकुलस्ते सुतं राजन्विकर्णं पृथुलोचनम् |
३० क
कर्ण पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
नकुलस्त्रिंशता वाणैः शतानीकश्च सप्तभिः |
७१ ख
वन पर्व
अध्याय २५५
वैशम्पाय़न उवाच
नकुलस्त्वपभीस्तस्माद्रथाच्चर्मासिपाणिमान् |
१९ क
विराट पर्व
अध्याय ३८
वृहन्नडो उवाच
नकुलस्य कलापोऽय़ं पञ्चशार्दूललक्षणः ||
५० ख
कर्ण पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
नकुलस्य ततो वाणैः सर्वतोऽवारय़द्दिशः ||
६६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
नकुलस्य तथा वाणैर्वध्यमाना चमूस्तव |
७४ क
सभा पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
नकुलस्य तु वक्ष्यामि कर्माणि विजय़ं तथा |
१ क
शल्य पर्व
अध्याय ९
सञ्जय़ उवाच
नकुलस्य महाराज मुष्टिदेशेऽच्छिनद्धनुः ||
१२ ख
विराट पर्व
अध्याय ३८
वृहन्नडो उवाच
नकुलस्यैष निस्त्रिंशो गुरुभारसहो दृढः ||
५७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १०२
भीष्म उवाच
नकुलाक्षास्तथा चैव सर्वे शूरास्तनुत्यजः ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय १४२
युधिष्ठिर उवाच
नकुलात्पूर्वजं पार्थं न पश्याम्यमितौजसम् |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय ४४
वैशम्पाय़न उवाच
नकुलाय़ वरार्हाय़ कर्शिताय़ महावने |
११ क
कर्ण पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
नकुलाय़ शतान्यष्टौ त्रिधैकैकं तु सोऽच्छिनत् ||
१६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४१
सञ्जय़ उवाच
नकुले सहदेवे च भीतोऽभ्येति च पाण्डवः ||
२३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ११८
अर्जुन उवाच
नकुले सहदेवे च सा मे त्वय़ि शलाग्रज ||
२९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
नकुलेन शरा मुक्ताः कङ्कवर्हिणवाससः |
७८ क
सभा पर्व
अध्याय ३२
वैशम्पाय़न उवाच
नकुलेन समानीताः स्वामिवत्तत्र रेमिरे ||
७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ३३
सञ्जय़ उवाच
नकुलेऽप्रातिरूप्यं च शौर्यं च निय़तानि षट् ||
६ ख
सभा पर्व
अध्याय ५८
युधिष्ठिर उवाच
नकुलो ग्लह एको मे यच्चैतत्स्वगतं धनम् ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १५
वैशम्पाय़न उवाच
नकुलो मूषकानत्ति विडालो नकुलं तथा |
२१ क
मौसल पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
नकुलो याज्ञसेनी च षडेकमनसो वय़म् ||
३ ख