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वन पर्व
अध्याय १२६
लोमश उवाच
नूनं दैवकृतं ह्येतद्यदेवं कृतवानसि ||
२२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६४
सञ्जय़ उवाच
नूनं नाश्रद्दधद्वाक्यमेष मे पुरुषर्षभः |
१०३ क
द्रोण पर्व
अध्याय ११३
सञ्जय़ उवाच
नूनं पार्थार्थमेवास्मान्मोहय़न्ति दिवौकसः |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३३
नारद उवाच
नूनं पुरैतद्विदितं युवय़ोर्भावितात्मनोः |
९ क
सभा पर्व
अध्याय ३८
शिशुपाल उवाच
नूनं प्रकृतिरेषा ते जघन्या नात्र संशय़ः |
१८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५४
उत्तङ्क उवाच
नूनं भवत्प्रसादोऽय़मिति मे नास्ति संशय़ः ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय ५७
वृहदश्व उवाच
नूनं मन्ये न शेषोऽस्ति नैषधस्य महात्मनः ||
१५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १४१
सञ्जय़ उवाच
नूनं महद्भय़ं कृष्ण कुरूणां समुपस्थितम् |
९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १२५
भीष्म उवाच
नूनं मित्रमुखः शत्रुः कश्चिदार्यवदाचरन् |
१७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १२५
भीष्म उवाच
नूनं मित्राणि ते रक्षः साधूपचरितान्यपि |
१० क
आदि पर्व
अध्याय ५१
ऋत्विज ऊचुः
नूनं मुक्तो वज्रभृता स नागो; भ्रष्टश्चाङ्कान्मन्त्रविस्रस्तकाय़ः |
१३ क
शल्य पर्व
अध्याय ६३
सञ्जय़ उवाच
नूनं लक्ष्मणमातापि हतपुत्रा हतेश्वरा |
३७ क
द्रोण पर्व
अध्याय १५७
धृतराष्ट्र उवाच
नूनं वुद्धिविहीनश्चाप्यसहाय़श्च मे सुतः |
५ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
नूनं वैवस्वतश्च त्वा वरुणश्च प्रिय़ातिथिः |
४३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०२
सञ्जय़ उवाच
नूनं व्यसनमापन्ने सुमहत्सव्यसाचिनि |
६० क
द्रोण पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
नूनं वय़ं वध्यपक्षे भवतो व्रह्मवित्तम |
६ क
आदि पर्व
अध्याय १३७
वैशम्पाय़न उवाच
नूनं शान्तनवो भीष्मो न धर्ममनुवर्तते |
५ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५५
सञ्जय़ उवाच
नूनं शूरं निपतितं त्वां पश्यन्त्यनिवर्तिनम् |
४ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय १७
वासुदेव उवाच
नूनं स देवदेवानामीश्वरेश्वरमव्ययम् |
६ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
नूनं स पतितः शेते धरण्यां रुधिरोक्षितः |
५२ क
वन पर्व
अध्याय ११९
वैशम्पाय़न उवाच
नूनं समृद्धान्पितृलोकभूमौ; चामीकराभान्क्षितिजान्प्रफुल्लान् |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय ३३
वासुकिरु उवाच
नूनं सर्वविनाशोऽय़मस्माकं समुदाहृतः |
६ क
सभा पर्व
अध्याय ७१
विदुर उवाच
नूनं सोऽय़मनुप्राप्तस्त्वत्कृते कालपर्ययः ||
४२ ख
विराट पर्व
अध्याय १९
द्रौपद्यु उवाच
नूनं हि वालय़ा धातुर्मय़ा वै विप्रिय़ं कृतम् |
१३ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४५
अर्जुन उवाच
नूनं हि विद्धोऽतिभृशं पृषत्कैः; कर्णेन राजा शिविरं गतोऽसौ ||
५९ ख
स्त्री पर्व
अध्याय १
धृतराष्ट्र उवाच
नूनं ह्यपकृतं किञ्चिन्मय़ा पूर्वेषु जन्मसु |
१८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १६
वासुदेव उवाच
नूनमद्य कृतार्थाः स्म नूनं प्राप्ताः सतां गतिम् |
२६ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
नूनमद्य रजोध्वस्तं रणे रेणुः करिष्यति ||
४० ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०२
सञ्जय़ उवाच
नूनमद्य हतः शेते तव भ्राता धनञ्जय़ः ||
३२ ग
वन पर्व
अध्याय १५४
वैशम्पाय़न उवाच
नूनमद्यासि सम्पक्वो यथा ते मतिरीदृशी |
३४ ख
सभा पर्व
अध्याय ६२
भीष्म उवाच
नूनमन्तः कुलस्यास्य भविता नचिरादिव |
१७ क
स्त्री पर्व
अध्याय २०
गान्धार्यु उवाच
नूनमप्सरसां स्वर्गे मनांसि प्रमथिष्यसि |
२४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १२५
भीष्म उवाच
नूनमर्थवतां मध्ये तव वाक्यमनुत्तमम् |
२२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १६
वैशम्पाय़न उवाच
नूनमश्रद्दधानोऽसि दुर्मेधाश्चासि पाण्डव ||
१० ख
स्त्री पर्व
अध्याय १६
वैशम्पाय़न उवाच
नूनमाचरितं पापं मय़ा पूर्वेषु जन्मसु |
५९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १२५
भीष्म उवाच
नूनमात्मकृतं दोषमपश्यन्किञ्चिदात्मनि |
३० क
द्रोण पर्व
अध्याय १२०
सञ्जय़ उवाच
नूनमात्मविनाशाय़ पाण्डवेन किरीटिना |
१७ क
विराट पर्व
अध्याय १८
द्रौपद्यु उवाच
नूनमार्या न जानाति कृच्छ्रं प्राप्तं धनञ्जय़म् |
२३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०२
सञ्जय़ उवाच
नूनमार्या महत्कुन्ती पापमद्य निदर्शनम् |
६१ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८
धृतराष्ट्र उवाच
नूनमावारय़त्पार्थो रथिनोऽन्यानजिह्मगैः |
२५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १२५
भीष्म उवाच
नूनमासञ्जय़ित्वा ते कृत्ये कस्मिंश्चिदीप्सिते |
२४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३६
जनमेजय़ उवाच
नूनमेकान्तधर्मोऽय़ं श्रेष्ठो नाराय़णप्रिय़ः |
४ क
सभा पर्व
अध्याय ३७
वैशम्पाय़न उवाच
नूनमेतत्समादातुं पुनरिच्छत्यधोक्षजः |
११ क
शल्य पर्व
अध्याय ५८
सञ्जय़ उवाच
नूनमेतद्वलवता धात्रादिष्टं महात्मना |
१९ क
सभा पर्व
अध्याय ४१
भीष्म उवाच
नूनमेष जगद्भर्तुः कृष्णस्यैव विनिश्चय़ः ||
१ ख
स्त्री पर्व
अध्याय १७
वैशम्पाय़न उवाच
नूनमेषा पुरा वाला जीवमाने महाभुजे |
२४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११०
भीष्म उवाच
नूपुराणां निनादेन मेखलानां च निस्वनैः ||
२६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १४१
भीष्म उवाच
नृगप्रभृतय़ो राजन्राजानः शरणागतान् |
३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ६९
भीष्म उवाच
नृगस्ततोऽव्रवीत्कृष्णं व्राह्मणस्याग्निहोत्रिणः |
१० क
अनुशासन पर्व
अध्याय ६९
भीष्म उवाच
नृगस्तदात्मानमथो न्यवेदय़; त्पुरातनं यज्ञसहस्रय़ाजिनम् ||
७ ख