वन पर्व
अध्याय
२७४
मातलिरु उवाच
निहतं रावणं दृष्ट्वा रामेणाक्लिष्टकर्मणा ||
२९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२६
सञ्जय़ उवाच
निहतं विद्धि वार्ष्णेय़ धार्तराष्ट्रं सुवालिशम् ||
२४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२६
सञ्जय़ उवाच
निहतं स्ववलं दृष्ट्वा पीडितं चापि पाण्डवैः |
१२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५
धृतराष्ट्र उवाच
निहतः खड्गमुद्यम्य धृष्टद्युम्नेन सञ्जय़ ||
६१ ग
शल्य पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
निहतः पाण्डवैः सङ्ख्ये किमन्यद्भागधेय़तः ||
३१ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
निहतः पाण्डवैः सङ्ख्ये पुत्रो वा मम सञ्जय़ ||
६१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२३
धृतराष्ट्र उवाच
निहतः पार्षतेनाजौ किमन्यद्भागधेय़तः ||
९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५
धृतराष्ट्र उवाच
निहतः पुरुषव्याघ्रः प्रसह्यासह्यविक्रमः ||
१४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
निहतः सवलो वीरः किमन्यद्भागधेय़तः ||
३७ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
२४
गान्धार्यु उवाच
निहतः सहदेवेन भागिनेय़ेन मातुलः ||
२१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५१
सञ्जय़ उवाच
निहतः सैन्धवो राजा त्वय़ास्त्रवलतेजसा ||
४४ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३७
वैशम्पाय़न उवाच
निहतः सोमदत्तश्च पित्रा सह महारणे ||
१० ख
सभा पर्व
अध्याय
१८
वैशम्पाय़न उवाच
निहतश्च जरासन्धो मोक्षिताश्च महीक्षितः |
११ क
विराट पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
निहतस्तत्र गन्धर्वैः पापकर्मा नृशंसवान् ||
५ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
निहता ज्ञातय़श्चान्ये दिष्टं मन्ये दुरत्ययम् ||
२२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८४
सञ्जय़ उवाच
निहता भ्रातरः शूरा भीमसेनेन मे युधि |
३६ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४५
सञ्जय़ उवाच
निहता रथिनः पेतुः पार्थचापच्युतैः शरैः |
१० क
शल्य पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
निहता वहवो यत्र किमन्यद्भागधेय़तः ||
३८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
३
सात्यकिरु उवाच
निहता वा रणे सर्वे स्वप्स्यन्ति वसुधातले ||
२३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६५
सञ्जय़ उवाच
निहता हय़भूय़िष्ठाः सङ्ग्रामे निशितैः शरैः |
५९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३०
श्रीभगवानु उवाच
निहतांस्तेन वै पूर्वं हतवानसि वै रिपून् ||
७० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९२
सञ्जय़ उवाच
निहताः कौरवैः सङ्ख्ये तथास्माभिश्च ते हताः ||
४ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१
सञ्जय़ उवाच
निहताः पाण्डवेय़ैः स्म मन्ये कालस्य पर्ययम् ||
६४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६०
सञ्जय़ उवाच
निहताः पुरुषेन्द्रेण तच्चापि विदितं तव ||
१६ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
निहताः प्रत्यदृश्यन्त मद्रराजपदानुगाः ||
२८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५१
वैशम्पाय़न उवाच
निहताः शत्रवश्चापि प्राप्तं राज्यमकण्टकम् ||
६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६८
सञ्जय़ उवाच
निहताः शेरते स्मान्ये वीभत्सोर्निशितैः शरैः |
३७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३३
सञ्जय़ उवाच
निहताः समरे शूराः पाण्डवैर्वलवत्तराः |
६१ क
शल्य पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
निहताः समरे सर्वे किमन्यद्भागधेय़तः ||
३९ ख
वन पर्व
अध्याय
२६९
मार्कण्डेय़ उवाच
निहताः सर्वशो राजन्महीं जग्मुर्गतासवः ||
४ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
१३
गान्धार्यु उवाच
निहताः सहिताश्चान्यैस्तत्र नास्त्यप्रिय़ं मम ||
१६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
निहताः सादय़ः क्रोधाच्चेदय़श्च परःशताः ||
४९ ख
वन पर्व
अध्याय
१३
वैशम्पाय़न उवाच
निहताञ्जीवितं त्यक्त्वा शय़ानान्वसुधातले ||
११५ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२७
सञ्जय़ उवाच
निहतानां हय़ानां च सहैव हय़योधिभिः |
९ क
स्त्री पर्व
अध्याय
१०
वैशम्पाय़न उवाच
निहतानात्मजाञ्श्रुत्वा प्रमत्तान्पुरुषर्षभाः |
१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९६
सञ्जय़ उवाच
निहतानाहवे पश्य पदात्यश्वरथद्विपान् |
१८ क
वन पर्व
अध्याय
१०३
लोमश उवाच
निहतान्दानवान्दृष्ट्वा त्रिदशा मुनिपुङ्गवम् |
१३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
७
सञ्जय़ उवाच
निहतान्पाण्डवान्मेने तव पुत्रः सहान्वय़ः ||
३३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
निहतान्पाण्डवान्मेने पाञ्चालानथ सृञ्जय़ान् ||
२८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४
धृतराष्ट्र उवाच
निहतान्पाण्डवेय़ानां मामकैर्व्रूहि सञ्जय़ ||
५८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
निहतान्प्राणिनः सङ्ख्ये द्रोणेन वलिना शरैः |
१७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३९
सञ्जय़ उवाच
निहतान्मेनिरे सर्वान्पाण्डून्द्रोणसुतेन वै ||
२९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
निहतान्युधि संस्मृत्य कच्चिन्न कुरुषे व्यथाम् ||
३२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६
सञ्जय़ उवाच
निहताभ्यां प्रधानाभ्यां ताभ्याममितविक्रम |
२६ क
शल्य पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
निहतारिः स्वकां दीप्तां श्रिय़ं प्राप्तो न संशय़ः ||
२० ख
शल्य पर्व
अध्याय
२७
सञ्जय़ उवाच
निहतास्ते दुरात्मानो येऽस्मानवहसन्पुरा |
४८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३१
सञ्जय़ उवाच
निहताय़ां तु माय़ाय़ाममर्षी स घटोत्कचः |
३७ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५९
वासुदेव उवाच
निहते कौरवेन्द्रे च सानुवन्धे सुय़ोधने |
३४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०१
सञ्जय़ उवाच
निहते चेदिराजे तु तत्खण्डं पित्र्यमाविशत् |
३८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१०
शल्य उवाच
निहते तु ततो वृत्रे दिशो वितिमिराभवन् |
३९ क