स्त्री पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
नारदस्य वचः श्रुत्वा तदाशोचन्त पाण्डवाः |
३४ क
शल्य पर्व
अध्याय
५३
वैशम्पाय़न उवाच
नारदस्य वचः श्रुत्वा तानभ्यर्च्य द्विजर्षभान् |
३२ क
वन पर्व
अध्याय
५१
वृहदश्व उवाच
नारदस्य वचः श्रुत्वा पप्रच्छ वलवृत्रहा |
१५ क
महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
नारदस्य वचः श्रुत्वा राजा वचनमव्रवीत् |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१५
भीष्म उवाच
नारदस्य वचः श्रुत्वा व्यासः परमधर्मवित् |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१८
भीष्म उवाच
नारदस्य वचः श्रुत्वा शुकः परमवुद्धिमान् |
४६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१६
भीष्म उवाच
नारदस्य वचः श्रुत्वा शुकः प्रोवाच भारत |
४ क
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
नारदस्याज्ञय़ा चैव द्रौपद्याः समय़क्रिय़ा |
९० क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०६
विश्वावसुरु उवाच
नारदस्यासुरेश्चैव पुलस्त्यस्य च धीमतः |
५९ क
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
नारदागमनं पर्व ततः परमिहोच्यते ||
६७ ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
नारदाच्चैव शुश्राव वृष्णीनां कदनं महत् ||
२१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९६
भीष्म उवाच
नारदाद्विदितं मह्यमेतद्व्रह्म सनातनम् |
४५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२१
भीष्म उवाच
नारदानुगतः साक्षान्मघवांस्तामुपागमत् |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१५१
भीष्म उवाच
नारदे यन्मय़ा प्रोक्तं पवनं प्रति तन्मृषा |
१४ क
स्त्री पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
नारदेन च भद्रं ते पूर्वमेव न संशय़ः |
३२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५३
वैशम्पाय़न उवाच
नारदेन च राजर्षे देवलेनासितेन च ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३६
वैशम्पाय़न उवाच
नारदेन तु सम्प्राप्तः सरहस्यः ससङ्ग्रहः |
५० क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२४
धृतराष्ट्र उवाच
नारदेन पुरा प्रोक्तं शीलमाश्रित्य भारत ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३४
वैशम्पाय़न उवाच
नारदेन पुरा राजन्गुरवे मे निवेदितम् |
१२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७
मरुत्त उवाच
नारदेन भवान्मह्यमाख्यातो ह्यटता पथि |
३ क
वन पर्व
अध्याय
२७९
मार्कण्डेय़ उवाच
नारदेन यदुक्तं तद्वाक्यं मनसि वर्तते ||
२३ ख
वन पर्व
अध्याय
२७८
मार्कण्डेय़ उवाच
नारदेन सहासीनं दृष्ट्वा सा पितरं शुभा |
३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१४
वैशम्पाय़न उवाच
नारदेनाथ भीमेन नकुलेन च पार्थिवः |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३५३
भीष्म उवाच
नारदेनापि राजेन्द्र देवेन्द्रस्य निवेशने |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१९
भीष्म उवाच
नारदेनाभ्यनुज्ञातस्ततो द्वैपाय़नात्मजः |
९ क
वन पर्व
अध्याय
८१
पुलस्त्य उवाच
नारदेनाभ्यनुज्ञातो लोकान्प्राप्नोति दुर्लभान् ||
६८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१८६
भीष्म उवाच
नारदेनैव सहिताः समागम्येदमव्रुवन् ||
२३ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
नारदेनैवमुक्तस्तु कुरुराजो युधिष्ठिरः |
१९ क
सभा पर्व
अध्याय
६
वैशम्पाय़न उवाच
नारदेनैवमुक्तस्तु धर्मराजो युधिष्ठिरः |
१३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६२
भीष्म उवाच
नारदेनैवमुक्तोऽहमदामन्नं सदा नृप |
४३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३२
नरनाराय़णावू ऊचतुः
नारदैतद्धि ते सत्यं वचनं समुदाहृतम् ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०
वासुदेव उवाच
नारदो मातुलश्चैव भागिनेय़श्च पर्वतः ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३१६
भीष्म उवाच
नारदोऽथाव्रवीत्प्रीतो व्रूहि व्रह्मविदां वर |
३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
९६
कण्व उवाच
नारदोऽथाव्रवीदेनं क्व भवान्गन्तुमुद्यतः |
२ क
वन पर्व
अध्याय
८४
वैशम्पाय़न उवाच
नारदोऽपि तथा वेद सोऽप्यशंसत्सदा मम |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२६
भीष्म उवाच
नारदोऽपि महातेजाः प्राप्यानुग्रहमीप्सितम् |
९९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०१
शुक्र उवाच
नारदोऽपि मय़ि प्राह गुणानेतान्महाद्युते |
६५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२४
भीष्म उवाच
नारदोऽपि यथा श्वेतं द्वीपं स गतवानृषिः |
३९ ख
आदि पर्व
अध्याय
२०४
वैशम्पाय़न उवाच
नारदोऽप्यगमत्प्रीत इष्टं देशं महामुनिः ||
२९ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४७
वैशम्पाय़न उवाच
नारदोऽप्यगमद्राजन्परमर्षिर्यथेप्सितम् ||
२४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२००
भीष्म उवाच
नारदोऽप्यथ कृष्णस्य परं मेने नराधिप |
४५ क
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
नारदोऽश्रावय़द्देवानसितो देवलः पितृन् |
६४ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
५
सूत उवाच
नारदोऽश्रावय़द्देवानसितो देवलः पितॄन् |
४२ क
सभा पर्व
अध्याय
५१
दुर्योधन उवाच
नारभेत्परसामर्थ्यात्पुरुषः कार्यमात्मनः |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२६०
कपिल उवाच
नारभेदिति चान्यत्र नैष्ठिकी श्रूय़ते श्रुतिः ||
१५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२०
भीष्म उवाच
नारमत्तत्र तत्रास्य दृष्टी रूपपराजिता ||
७२ ख
वन पर्व
अध्याय
१००
लोमश उवाच
नारसिंहं वपुः कृत्वा सूदितः पुरुषोत्तम ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२६
भीष्म उवाच
नारसिंहं वपुः कृत्वा हिरण्यकशिपुं पुनः |
७३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
नारसिंहवपुः श्रीमान्केशवः पुरुषोत्तमः ||
१६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
नाराचं क्रोधताम्राक्षः प्रैषीन्मृत्युमिवान्तकः ||
८६ ख