chevron_left  धृष्टद्युम्नःarrow_drop_down
आदि पर्व
अध्याय १८५
वैशम्पाय़न उवाच
धृष्टद्युम्नः सोमकानां प्रवर्हो; वृत्तं यथा येन हृता च कृष्णा ||
१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५१
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नतनूजांश्च शतानीकं च नाकुलिम् ||
९२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२९
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नपिता राजन्द्रोणमेवाभ्यवर्तत ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय ४८
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नपुरोगास्ते शमय़ामासुरञ्जसा |
३० ख
उद्योग पर्व
अध्याय १४९
वैशम्पाय़न उवाच
धृष्टद्युम्नमहं मन्ये सहेद्भीष्मस्य साय़कान् |
२५ क
उद्योग पर्व
अध्याय ५६
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नमुखा द्रोणमभिय़ास्यन्ति भारत ||
२० ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नमुखा वीरा घ्नन्ति शत्रून्सहस्रशः |
६६ ख
आदि पर्व
अध्याय १९७
विदुर उवाच
धृष्टद्युम्नमुखा वीरा भ्रातरो द्रुपदात्मजाः ||
२१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७०
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नमुखाः पार्था व्यूढानीकाः प्रहारिणः |
५ क
भीष्म पर्व
अध्याय १६
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नमुखाः सर्वे समुद्विविजिरे मुहुः ||
४३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १९७
वैशम्पाय़न उवाच
धृष्टद्युम्नमुखानेतान्प्राहिणोत्पाण्डुनन्दनः ||
६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नमुखान्पार्थान्दृष्ट्वा कर्णो व्यवस्थितान् |
२५ क
उद्योग पर्व
अध्याय १९७
वैशम्पाय़न उवाच
धृष्टद्युम्नमुखान्वीरांश्चोदय़ामास भारत ||
१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३१
धृतराष्ट्र उवाच
धृष्टद्युम्नमुखान्वीरान्भीमसेनाभिरक्षितान् ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६८
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नमुखाश्चापि पार्थाः शान्तनवं रणे |
३२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९२
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नमुखास्त्वन्ये तव सैन्यमय़ोधय़न् |
४२ क
द्रोण पर्व
अध्याय ७३
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नमुखैः सार्धं विराटश्च सकेकय़ः |
५० क
वन पर्व
अध्याय १३
वैशम्पाय़न उवाच
धृष्टद्युम्नमुखैर्वीरैर्भ्रातृभिः परिवारिता ||
४१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नमुखैर्व्यूढमशोभत महद्वलम् ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १५९
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नमुवाचेदं कुम्भय़ोनिं निवारय़ ||
२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १४९
वैशम्पाय़न उवाच
धृष्टद्युम्नमृते राजन्निति मे धीय़ते मतिः ||
२७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३१
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नरथं गत्वा भैमसेनिस्ततो नृप |
१०७ क
द्रोण पर्व
अध्याय १७१
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नरथं भीतास्त्यक्त्वा सम्प्राद्रवन्दिशः ||
६७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६४
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नरथस्याश्वान्स्वरथाश्वैर्महारथः |
१२९ क
शल्य पर्व
अध्याय २८
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नवचः श्रुत्वा शिनेर्नप्ता महारथः |
३६ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४२
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नवधे राजंश्चक्रे यत्नं महावलः ||
४४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नवलं तूर्णं व्यधमन्निशितैः शरैः ||
२७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १६१
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नवशां दुर्गां सागरस्तिमितोपमाम् ||
३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५२
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नशिखण्डिभ्यां पाञ्चालानां च माधव |
२८ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५१
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नशिखण्डिभ्यां भीष्मद्रोणौ निपातितौ ||
११ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १५३
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नशिखण्ड्यादीन्पाञ्चालानां महारथान् ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ६१
धृतराष्ट्र उवाच
धृष्टद्युम्नश्च दुर्धर्षः शिखण्डी चापराजितः |
३९ क
विराट पर्व
अध्याय ६७
वैशम्पाय़न उवाच
धृष्टद्युम्नश्च दुर्धर्षः सर्वशस्त्रभृतां वरः |
१८ क
उद्योग पर्व
अध्याय ६३
धृतराष्ट्र उवाच
धृष्टद्युम्नश्च पाञ्चाल्यः कमिवाद्य न शातय़ेत् |
६ क
उद्योग पर्व
अध्याय ५२
धृतराष्ट्र उवाच
धृष्टद्युम्नश्च पाञ्चाल्यः क्रूरकर्मा महारथः |
५ क
उद्योग पर्व
अध्याय १५०
जनमेजय़ उवाच
धृष्टद्युम्नश्च पाञ्चाल्यः शिखण्डी च महारथः |
६ क
शल्य पर्व
अध्याय २९
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नश्च पाञ्चाल्यः शिखण्डी चापराजितः ||
५१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १९
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नश्च पाञ्चाल्यस्तेषां गोप्ता महारथः |
२१ क
द्रोण पर्व
अध्याय ३१
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नश्च भीमश्च सात्यकिश्च महारथः |
५३ क
द्रोण पर्व
अध्याय ३१
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नश्च भीमश्च सौभद्रोऽर्जुन एव च |
६८ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४०
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नश्च राजानं द्रौपदेय़ाश्च मारिष |
६५ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४४
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नश्च वलवान्सर्वे चापि प्रभद्रकाः ||
७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०२
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नश्च सप्तत्या भीमसेनश्च पञ्चभिः |
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८६
युधिष्ठिर उवाच
धृष्टद्युम्नश्च समरे द्रोणं क्रुद्धं परन्तपः |
४७ क
द्रोण पर्व
अध्याय ७२
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नश्च सम्प्रेक्ष्य द्रोणमभ्याशमागतम् |
२३ क
उद्योग पर्व
अध्याय १६८
भीष्म उवाच
धृष्टद्युम्नश्च सेनानीः सर्वसेनासु भारत |
४ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नस्ततः कर्णमविध्यद्दशभिः शरैः |
७० क
भीष्म पर्व
अध्याय १०४
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नस्ततः पश्चात्पाञ्चालैरभिरक्षितः ||
६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४९
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नस्ततो द्रोणं नवत्या निशितैः शरैः |
७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नस्ततो द्रोणमभ्यद्रवत भारत |
२९ क