द्रोण पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
धृतराष्ट्रस्य पुत्रेण सर्वं तस्मै निवेदितम् ||
११ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८०
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रस्य पुत्रेण सामात्येन जनार्दन |
५ क
शल्य पर्व
अध्याय
३
सञ्जय़ उवाच
धृतराष्ट्रस्य मन्येऽहं नापि कृष्णस्य पाण्डवः ||
४८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
२०
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रस्य ये पुत्रास्ते प्राप्ताः पैतृकं वसु |
५ क
स्त्री पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रस्य राजेन्द्र तत्रैवान्तरधीय़त ||
४८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०५
भीष्म उवाच
धृतराष्ट्रस्य रूपेण शक्रो जग्राह हस्तिनम् ||
६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
६
द्रुपद उवाच
धृतराष्ट्रस्य विदिते वञ्चिताः पाण्डवाः परैः |
५ क
आदि पर्व
अध्याय
१०७
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रस्य वैश्याय़ामेकश्चापि शतात्परः ||
१ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२९
सञ्जय़ उवाच
धृतराष्ट्रात्मजं तस्मै भीमसेनाय़ धीमते |
३२ क
विराट पर्व
अध्याय
५०
अर्जुन उवाच
धृतराष्ट्रात्मजः श्रीमानेष राजा सुय़ोधनः ||
१२ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
५
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रात्मजाः सर्वे यातुधाना वलोत्कटाः |
१९ क
आदि पर्व
अध्याय
१२०
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रात्मजाश्चैव पाण्डवाश्च महावलाः |
२१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१५३
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रात्मजो भीष्मं सोऽभिषिक्तो व्यरोचत ||
२६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
७
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रात्मजो राजा दूतैः प्रणिहितैश्चरैः ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रात्मजो राजा पर्यतप्यत दुर्मतिः ||
१ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७०
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रादनु च ते गान्धारीं सुवलात्मजाम् |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
४४
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्राभ्यनुज्ञातं भ्रात्रा दत्तं वृकोदरः |
७ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३६
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्राभ्यनुज्ञातः कुरुराजो युधिष्ठिरः ||
१० ख
आदि पर्व
अध्याय
१०६
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्राभ्यनुज्ञातः स्ववाहुविजितं धनम् |
१ क
आदि पर्व
अध्याय
२००
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्राभ्यनुज्ञाताः कृष्णय़ा सह पाण्डवाः |
५ क
स्त्री पर्व
अध्याय
१३
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्राभ्यनुज्ञातास्ततस्ते कुरुपुङ्गवाः |
१ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२२
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्राभ्यनुज्ञातो निवर्तितुमिय़ेष सः ||
६ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्राभ्यनुज्ञातो विदुरस्तान्यकारय़त् ||
१३ ख
सभा पर्व
अध्याय
८
नारद उवाच
धृतराष्ट्राश्चैकशतमशीतिर्जनमेजय़ाः ||
२१ ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
धृतराष्ट्राश्रमपदं विदुरश्च जगाम ह ||
२१२ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
४५
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्राय़ तद्राज्यं गान्धार्यै विदुराय़ च |
११ क
आदि पर्व
अध्याय
६०
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्री तु हंसांश्च कलहंसांश्च सर्वशः |
५६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
४१
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रे यथापूर्वं वृत्तिं वर्तितुमर्हथ ||
६ ख
सभा पर्व
अध्याय
५२
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रेण चाहूतः कालस्य समय़ेन च ||
२१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६७
अर्जुन उवाच
धृतराष्ट्रेण भीष्माय़ द्रोणाय़ च विशां पते |
४४ क
आदि पर्व
अध्याय
१०८
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रेण समय़े समीक्ष्य विधिवत्तदा ||
१७ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
५
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रेण सहिता गान्धारी च यशस्विनी |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रो ददौ राजा पुत्राणामौर्ध्वदेहिकम् |
२ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
५
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रो धनेशस्य लोकान्प्राप दुरासदान् ||
११ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रो नरव्याघ्रो मुह्यमानो मुहुर्मुहुः ||
४७ ख
आदि पर्व
अध्याय
११०
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रो नरश्रेष्ठः पाण्डुमेवान्वशोचत ||
४१ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२५
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रो नरश्रेष्ठो विदुरं हृष्टमानसः ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय
४६
जनमेजय़ उवाच
धृतराष्ट्रो महातेजाः श्रुत्वा विप्र किमव्रवीत् ||
१ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
८
व्यास उवाच
धृतराष्ट्रो महात्मा त्वां तत्कुरुष्वाविचारय़न् ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय
७
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रो महाप्राज्ञः पर्यतप्यत भारत ||
१ ख
सभा पर्व
अध्याय
४५
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रो महाराज प्राहिणोद्विदुराय़ वै ||
४८ ख
आदि पर्व
अध्याय
१९४
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रो महाराज मन्त्रय़ामास वै तदा ||
२५ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१७
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रो महाराज वनवासाय़ दीक्षितः |
३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१५६
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रो महाराज सञ्जय़ं वाक्यमव्रवीत् ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
४१
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रो महाराजः पिता नो दैवतं परम् |
४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१२९
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रो महाराजः पुनरेवाभ्यभाषत ||
२४ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
१
जनमेजय़ उवाच
धृतराष्ट्रो महाराजः श्रुत्वा किमकरोन्मुने ||
१ ख
शल्य पर्व
अध्याय
६२
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रो महावाहुः केशवं केशिसूदनम् ||
६९ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२२
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रो महीपालः परिदाय़ युधिष्ठिरे ||
५ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१५
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रो महीपालः पुनरेवाभ्यभाषत ||
२ ख