chevron_left  दौष्कुलेय़ाarrow_drop_down
उद्योग पर्व
अध्याय १२२
वैशम्पाय़न उवाच
दौष्कुलेय़ा दुरात्मानो नृशंसा निरपत्रपाः |
८ क
वन पर्व
अध्याय २८७
वैशम्पाय़न उवाच
दौष्कुलेय़ा विशेषेण कथञ्चित्प्रग्रहं गताः |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय ८४
भीष्म उवाच
दौष्कुलेय़ाश्च लुव्धाश्च नृशंसा निरपत्रपाः |
६ क
वन पर्व
अध्याय १८१
मार्कण्डेय़ उवाच
दौष्कुल्या व्याधिवहुला दुरात्मानोऽप्रतापिनः |
२० क
अनुशासन पर्व
अध्याय ४५
भीष्म उवाच
दौहित्र एव वा रिक्थमपुत्रस्य पितुर्हरेत् ||
१३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ४५
भीष्म उवाच
दौहित्रकेण धर्मेण नात्र पश्यामि कारणम् |
१६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६०
वैशम्पाय़न उवाच
दौहित्रस्तव वार्ष्णेय़ दौःशासनिवशं गतः ||
२० ख
उद्योग पर्व
अध्याय १४७
वासुदेव उवाच
दौहित्रस्तात शुक्रस्य काव्यस्यामिततेजसः ||
६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १२०
नारद उवाच
दौहित्राः स्वेन धर्मेण यज्ञदानकृतेन वै |
१७ क
उद्योग पर्व
अध्याय ११९
नारद उवाच
दौहित्रास्तव राजेन्द्र मम पुत्रा न ते पराः |
२३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १२०
राजान ऊचुः
दौहित्रास्ते वय़ं राजन्दिवमारोह पार्थिवः ||
१८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १७५
होत्रवाहन उवाच
दौहित्रीय़ं मम विभो काशिराजसुता शुभा |
१५ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ७
द्रौणिरु उवाच
द्यां दिशो विदिशः खं च ज्वालाभिरभिपूरय़न् ||
१४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७
सञ्जय़ उवाच
द्यां धरां खं दिशो वारि प्रदिशश्चानुनादय़न् |
३४ क
कर्ण पर्व
अध्याय २४
देवा ऊचुः
द्यां युगं युगचर्माणि संवर्तकवलाहकान् ||
७२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ६६
सञ्जय़ उवाच
द्यामन्तरं समास्थाय़ यथाय़ुक्तं मनस्विनः |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय १७३
व्यास उवाच
द्यामपः पृथिवीं चैव त्र्यम्वकश्च ततः स्मृतः ||
८९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २२
स्त्र्यु उवाच
द्यावापृथिवीमात्रैषा काम्या व्राह्मणसत्तम |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९९
याज्ञवल्क्य उवाच
द्यावापृथिव्योरित्येष राजन्वेदेषु पठ्यते |
५ क
भीष्म पर्व
अध्याय ३३
अर्जुन उवाच
द्यावापृथिव्योरिदमन्तरं हि; व्याप्तं त्वय़ैकेन दिशश्च सर्वाः |
२० क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५४
उत्तङ्क उवाच
द्यावापृथिव्योर्यन्मध्यं जठरेण तदावृतम् |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय १७२
व्यास उवाच
द्यावापृथिव्योर्विवरं तेजसा समपूरय़त् ||
५४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७
सञ्जय़ उवाच
द्यावापृथिव्योर्विवरं पूरय़ामास सर्वतः ||
१३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७०
वैशम्पाय़न उवाच
द्यावापृथिव्यौ खं चैव शव्देनासीत्समावृतम् ||
३ ख
विराट पर्व
अध्याय ३६
वैशम्पाय़न उवाच
द्युतिमन्तो महेष्वासाः सर्वे युद्धविशारदाः ||
१२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १०१
कण्व उवाच
द्युतिमान्दर्शनीय़श्च कस्यैष कुलनन्दनः ||
१९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
द्युतिमान्नाम कौरव्य तृतीय़ः कुमुदो गिरिः |
१० क
वन पर्व
अध्याय २७८
मार्कण्डेय़ उवाच
द्युमत्सेन इति ख्यातः पश्चादन्धो वभूव ह ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २५९
भीष्म उवाच
द्युमत्सेनस्य संवादं राज्ञा सत्यवता सह ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय २८३
मार्कण्डेय़ उवाच
द्युमत्सेनाय़ नातृप्यन्कथय़न्तः पुनः पुनः ||
२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५
धृतराष्ट्र उवाच
द्यूतं कृत्वा पुरा हृष्टो वञ्चय़ित्वा च पाण्डवान् |
९३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३७
व्रह्मो उवाच
द्यूतं च जनवादश्च सम्वन्धाः स्त्रीकृताश्च ये |
१३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ३२
श्रीभगवानु उवाच
द्यूतं छलय़तामस्मि तेजस्तेजस्विनामहम् |
३६ क
वन पर्व
अध्याय ५८
वृहदश्व उवाच
द्यूतं प्रवर्ततां भूय़ः प्रतिपाणोऽस्ति कस्तव ||
२ ख
सभा पर्व
अध्याय ५६
विदुर उवाच
द्यूतं मूलं कलहस्यानुपाति; मिथोभेदाय़ महते वा रणाय़ |
१ क
सभा पर्व
अध्याय ५९
विदुर उवाच
द्यूतं हि वैराय़ महाभय़ाय़; पक्वो न वुध्यत्ययमन्तकाले ||
५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ५३
सञ्जय़ उवाच
द्यूतकाले महाराज स्मय़से स्म कुमारवत् ||
५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ५३
सञ्जय़ उवाच
द्यूतकाले मय़ा चोक्तं विदुरेण च धीमता |
१९ क
स्त्री पर्व
अध्याय १८
गान्धार्यु उवाच
द्यूतक्लेशाननुस्मृत्य द्रौपद्या चोदितेन च ||
२० ख
शल्य पर्व
अध्याय ६२
वैशम्पाय़न उवाच
द्यूतच्छलजितैः शक्तैर्वनवासोऽभ्युपागतः ||
४० ख
विराट पर्व
अध्याय १७
द्रौपद्यु उवाच
द्यूतजेन ह्यनर्थेन महता समुपावृतः ||
१८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५
धृतराष्ट्र उवाच
द्यूततः कृच्छ्रमापन्नो लूनपक्ष इव द्विजः ||
५३ ख
सभा पर्व
अध्याय ४५
वैशम्पाय़न उवाच
द्यूतदोषांश्च जानन्स पुत्रस्नेहादकृष्यत ||
४९ ख
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
द्यूतपर्व ततः प्रोक्तमनुद्यूतमतः परम् ||
४१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ५०
धृतराष्ट्र उवाच
द्यूतप्रमुखमाभाति कुरूणां व्यसनं महत् |
५७ क
सभा पर्व
अध्याय ४४
शकुनिरु उवाच
द्यूतप्रिय़श्च कौन्तेय़ो न च जानाति देवितुम् |
१८ क
सभा पर्व
अध्याय ४५
शकुनिरु उवाच
द्यूतप्रिय़श्च कौन्तेय़ो न च जानाति देवितुम् |
३८ क
सभा पर्व
अध्याय ६०
द्रौपद्यु उवाच
द्यूतप्रिय़ैर्नातिकृतप्रय़त्नः; कस्मादय़ं नाम निसृष्टकामः ||
४३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय २३
धृतराष्ट्र उवाच
द्यूतव्यसनमासाद्य क्लेशितो हि युधिष्ठिरः |
६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
द्यूतसम्पातमप्येषामप्रमत्तो निवारय़ ||
१३ ख