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वन पर्व
अध्याय ४३
वैशम्पाय़न उवाच
दृष्ट्वा पार्थो महावाहुर्देवमेवान्वतर्कय़त् ||
९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५७
सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा पार्थो रणे यत्तः सिंहनादमथोऽनदत् ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय १९४
मार्कण्डेय़ उवाच
दृष्ट्वा पितामहं चैव पद्मे पद्मनिभेक्षणम् ||
१६ ख
आदि पर्व
अध्याय २०१
नारद उवाच
दृष्ट्वा पितामहं देवं तस्थतुः प्राञ्जली तदा ||
१७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९७
सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा पुत्रं तथा ग्रस्तं राहुणेव निशाकरम् |
५३ क
द्रोण पर्व
अध्याय ६१
धृतराष्ट्र उवाच
दृष्ट्वा पुत्रपरिद्यूनं किमकुर्वन्त मामकाः ||
४ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४४
जनमेजय़ उवाच
दृष्ट्वा पुत्रांस्तथा पौत्रान्सानुवन्धाञ्जनाधिपः |
१ क
आदि पर्व
अध्याय १३०
दुर्योधन उवाच
दृष्ट्वा प्रकृतय़ः सर्वा अर्थमानेन योजिताः ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १२२
भीष्म उवाच
दृष्ट्वा प्रकृष्टं तपसा विनय़ेनाभ्यतिष्ठत ||
७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६३
सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा प्रजापतिं देवाः स्वय़म्भुवमुपागमन् |
४७ क
शल्य पर्व
अध्याय ४९
सिद्धा ऊचुः
दृष्ट्वा प्रभावं तपसो जैगीषव्यस्य योगजम् ||
५१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २८
सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा प्रमुदिताः काका विनेदुरथ तैः स्वरैः ||
३४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १७२
सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा प्रमुदितान्पार्थांस्त्वदीय़ा व्यथिताभवन् ||
३९ ख
वन पर्व
अध्याय २२३
द्रौपद्यु उवाच
दृष्ट्वा प्रविष्टं त्वरितासनेन; पाद्येन चैव प्रतिपूजय़ त्वम् ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय २९३
वैशम्पाय़न उवाच
दृष्ट्वा प्रस्थापय़ामास पुरं वारणसाह्वय़म् ||
१५ ख
विराट पर्व
अध्याय ५३
वैशम्पाय़न उवाच
दृष्ट्वा प्राकम्पत मुहुर्भरतानां महद्वलम् ||
१३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५९
सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा प्राच्छादय़द्वाणैरर्जुनः प्राणतापनैः ||
२९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ११३
नारद उवाच
दृष्ट्वा प्रिय़सखं तार्क्ष्यं गालवं च द्विजर्षभम् |
३ क
विराट पर्व
अध्याय ६१
वैशम्पाय़न उवाच
दृष्ट्वा प्रय़ातांस्तु कुरून्किरीटी; हृष्टोऽव्रवीत्तत्र स मत्स्यपुत्रम् |
२९ क
आदि पर्व
अध्याय १५५
व्राह्मण उवाच
दृष्ट्वा फलस्य नापश्यद्दोषा येऽस्यानुवन्धिकाः |
१७ क
सभा पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
दृष्ट्वा भागीरथीं गङ्गामुवास वहुलाः समाः ||
९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७
वैशम्पाय़न उवाच
दृष्ट्वा भागीरथीं गङ्गामुवास वहुलाः समाः ||
४१ ग
वन पर्व
अध्याय १५८
वैशम्पाय़न उवाच
दृष्ट्वा भीमं धर्मसुतमव्रवीन्नरवाहनः ||
४० ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४४
सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा भीमं महावाहुं सूतपुत्रः प्रतापवान् |
३ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६२
सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा भीमस्य विक्रान्तमन्तकस्य प्रजास्विव ||
७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४५
सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा भीमोऽनदद्धृष्टः सौभद्रमभिहर्षय़न् ||
२६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०१
सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा भीष्मं रणे क्रुद्धं पाण्डवैरभिसंवृतम् |
१ क
आदि पर्व
अध्याय १५०
कुन्त्यु उवाच
दृष्ट्वा भीष्मस्य विक्रान्तं तदा जतुगृहे महत् |
१४ क
भीष्म पर्व
अध्याय ६७
सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा भीष्मेण संसक्तान्भ्रातॄनन्यांश्च पार्थिवान् |
१ क
विराट पर्व
अध्याय ३३
वैशम्पाय़न उवाच
दृष्ट्वा भूमिञ्जय़ं नाम पुत्रं मत्स्यस्य मानिनम् |
९ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा भ्रातॄंश्च पुत्रांश्च विमना वानरध्वजः |
१८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ६१
सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा भ्रातॄन्रणे सर्वान्निर्जितान्सुमहारथान् ||
२४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ११०
धृतराष्ट्र उवाच
दृष्ट्वा भ्रातॄन्हतान्युद्धे भीमसेनेन दंशितान् |
२० क
भीष्म पर्व
अध्याय ७९
सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा मद्रेश्वररथं धार्तराष्ट्राः पराङ्मुखम् |
५३ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३५
सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा मम महाराज तौ समेतौ महारथौ |
२२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८५
धृतराष्ट्र उवाच
दृष्ट्वा मम हतान्पुत्रान्वहूनेकेन सञ्जय़ |
१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४१
सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा महीक्षितस्तत्र पूजय़ां चक्रिरे भृशम् ||
१०० ख
वन पर्व
अध्याय ४६
धृतराष्ट्र उवाच
दृष्ट्वा मां चक्षुषा हीनं निर्विचेष्टमचेतनम् ||
३४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १८१
भीष्म उवाच
दृष्ट्वा मां तूर्णमाय़ान्तं दंशितं स्यन्दने स्थितम् |
३ क
वन पर्व
अध्याय १७०
अर्जुन उवाच
दृष्ट्वा मां पूजय़ामास मातलिः शक्रसारथिः ||
५२ ख
वन पर्व
अध्याय २३
वासुदेव उवाच
दृष्ट्वा मां वान्धवाः सर्वे हर्षमाहारय़न्पुनः ||
१९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०२
सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा माधवमाक्रन्दे भीष्माय़ोद्यन्तमाहवे |
५६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १२७
भीष्म उवाच
दृष्ट्वा मुनिगणस्यासीत्परा प्रीतिर्जनार्दन ||
१२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ११९
नारद उवाच
दृष्ट्वा मूर्ध्ना नतान्पुत्रांस्तापसी वाक्यमव्रवीत् |
२३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५९
सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा मृत्युमिवाय़ान्तं सर्वे विमनसोऽभवन् ||
१८ ख
स्त्री पर्व
अध्याय १८
गान्धार्यु उवाच
दृष्ट्वा मे पार्थिवसुतामेतां लक्ष्मणमातरम् |
६ क
वन पर्व
अध्याय २२७
वैशम्पाय़न उवाच
दृष्ट्वा यथा पाण्डुसुतान्वल्कलाजिनवाससः ||
९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५९
सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा यदर्जुनं भीमो जगाम भ्रातरं प्रति ||
२२ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३७
वैशम्पाय़न उवाच
दृष्ट्वा यदृच्छय़ा तत्र स्त्रिय़मम्भसि भारत |
३० क
भीष्म पर्व
अध्याय ४१
सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा युधिष्ठिरं दूराद्धार्तराष्ट्रस्य सैनिकाः |
२१ क