chevron_left  दुर्योधनंarrow_drop_down
कर्ण पर्व
अध्याय २०
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनं समुद्दिश्य वाणं जग्राह सत्वरः ||
२५ ख
वन पर्व
अध्याय २२८
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनं सहामात्यमनुजज्ञे न कामतः ||
२२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ३८
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनं सौमदत्तिं शकुनिं च महावलम् ||
५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १९५
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनः किलापृच्छदापगेय़ं महाव्रतम् |
३ क
शल्य पर्व
अध्याय २७
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनः कुलाङ्गारः शिष्टस्त्वं तस्य मातुलः ||
४८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ७२
भीमसेन उवाच
दुर्योधनः कुलाङ्गारो जघन्यः पापपूरुषः ||
१८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८१
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनः क्रोधविषो महात्मा; जघान वाणैरनलप्रकाशैः ||
१५ ख
आदि पर्व
अध्याय १३२
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनः परं हर्षमाजगाम दुरात्मवान् ||
१ ख
विराट पर्व
अध्याय ४८
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनः पार्थजले पुरा नौरिव मज्जति ||
१७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६४
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनः प्रत्यविध्यद्दशभिर्निशितैः शरैः ||
३६ ख
वन पर्व
अध्याय २४३
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनः प्रिय़े नित्यं वर्तमानो महीपतिः |
२३ ख
वन पर्व
अध्याय ५
विदुर उवाच
दुर्योधनः शकुनिः सूतपुत्रः; प्रीत्या राजन्पाण्डुपुत्रान्भजन्ताम् |
१४ क
वन पर्व
अध्याय २२५
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनः शकुनिः सूतपुत्रो; दुःशासनश्चापि सुमन्दचेताः |
२१ क
भीष्म पर्व
अध्याय १५
धृतराष्ट्र उवाच
दुर्योधनः शान्तनवं किं तदा प्रत्यपद्यत ||
५८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६२
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनः सह भ्रात्रा यमाभ्यां समसज्जत |
३३ क
उद्योग पर्व
अध्याय ५६
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनः सहसुतः सार्धं भ्रातृशतेन च |
१४ क
द्रोण पर्व
अध्याय ६३
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनः सहामात्यस्तदनन्तरमेव च ||
२५ ख
विराट पर्व
अध्याय ३३
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनः सहामात्यो विराटमुपय़ादथ ||
१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३१
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनः सोमदत्तं परिवार्य व्यवस्थितः ||
१६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २६
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनः स्म राधेय़मिदं वचनमव्रवीत् ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय ११
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनः स्मितं कृत्वा चरणेनालिखन्महीम् |
२९ क
शल्य पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनः स्वकं सैन्यमव्रवीद्भृशविक्षतम् ||
५५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ७
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनकृते ह्येतत्कुलं नो विनिपातितम् |
३१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८९
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनगृहं शौरिरभ्यगच्छदरिन्दमः ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय १२
विदुर उवाच
दुर्योधननिकाराच्च वाहुवीर्याच्च दर्पितः |
५५ क
सभा पर्व
अध्याय ३१
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनपुरोगाश्च भ्रातरः सर्व एव ते ||
५ ख
आदि पर्व
अध्याय १७६
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनपुरोगाश्च सकर्णाः कुरवो नृप ||
१३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८२
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनपुरोगास्तु पुत्रास्तव विशां पते |
३९ क
द्रोण पर्व
अध्याय १२९
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनपुरोवातां रथनागवलाहकाम् |
३० क
आदि पर्व
अध्याय १९७
विदुर उवाच
दुर्योधनप्रभृतय़ः पुत्रा राजन्यथा तव |
११ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७४
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनप्रभृतय़ः प्रगृहीतशरासनाः |
१९ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४४
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनप्रभृतय़ो दृष्टा लोकान्तरं गताः |
१९ क
आदि पर्व
अध्याय ५७
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनप्रभृतय़ो युय़ुत्सुः करणस्तथा ||
९९ ख
आदि पर्व
अध्याय १३६
पौरा ऊचुः
दुर्योधनप्रय़ुक्तेन पापेनाकृतवुद्धिना |
११ क
आदि पर्व
अध्याय १
सूत उवाच
दुर्योधनमतं ज्ञात्वा कर्णस्य शकुनेस्तथा |
९५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनमनुज्ञाप्य वनं यास्यामि कौरव ||
३७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५
धृतराष्ट्र उवाच
दुर्योधनमपादीनं राज्यकामुकमातुरम् ||
१७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १२३
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनमभिप्रेक्ष्य धार्तराष्ट्रममर्षणम् ||
१८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १२८
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनमभिप्रेक्ष्य धार्तराष्ट्रममर्षणम् ||
४० ख
उद्योग पर्व
अध्याय १२६
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनमभिप्रेक्ष्य भीष्मः शान्तनवोऽव्रवीत् ||
२८ ख
स्त्री पर्व
अध्याय १७
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनमभिप्रेक्ष्य शय़ानं रुधिरोक्षितम् ||
२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनमभिप्रेक्ष्य सव्रीडमिदमव्रवीत् ||
२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २५
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनममित्रघ्नः प्रीतो मद्राधिपस्तदा ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय १२५
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनममित्रघ्नमुत्थितं पर्यवारय़त् ||
३१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५२
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनमराज्यार्हं यय़ा राज्येऽभ्यषेचय़त् ||
९ ख
आदि पर्व
अध्याय १९२
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनमविज्ञानात्प्रज्ञाचक्षुर्नरेश्वरः ||
१९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनमहं पापमन्ववर्तं वृथामतिः ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय २२६
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनमिदं काले कर्णो वचनमव्रवीत् ||
१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३४
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनमिदं वाक्यं त्वरितं समभाषत ||
६८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२०
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनमिदं वाक्यं प्रत्युवाच कुरूत्तमम् ||
२३ ख