chevron_left  दशाश्वमेधाञ्जारूथ्यानाजहारarrow_drop_down
शान्ति पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
दशाश्वमेधाञ्जारूथ्यानाजहार निरर्गलान् ||
५३ ख
वन पर्व
अध्याय २७५
मार्कण्डेय़ उवाच
दशाश्वमेधानाजह्रे जारूथ्यान्स निरर्गलान् ||
६९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ९
वैशम्पाय़न उवाच
दशाश्वमेधानाजह्रे स्वन्नपानाप्तदक्षिणान् |
६१ क
वन पर्व
अध्याय ८२
पुलस्त्य उवाच
दशाश्वमेधानाप्नोति कुलं चैव समुद्धरेत् ||
३१ ख
वन पर्व
अध्याय ८३
पुलस्त्य उवाच
दशाश्वमेधिकं चैव गङ्गाय़ां कुरुनन्दन ||
८२ ख
वन पर्व
अध्याय ८१
पुलस्त्य उवाच
दशाश्वमेधिकं चैव तस्मिंस्तीर्थे महीपते |
५२ ख
वन पर्व
अध्याय ८१
पुलस्त्य उवाच
दशाश्वमेधिके स्नात्वा तदेव लभते फलम् ||
११ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय २
भीष्म उवाच
दशाश्वस्य सुतस्त्वासीद्राजा परमधार्मिकः |
७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७७
सञ्जय़ उवाच
दशाश्वानां सहस्राणि दन्तिनां च तथैव च |
१६ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २०
वैशम्पाय़न उवाच
दशाहमेवं दानानि दत्त्वा राजाम्विकासुतः |
१७ क
भीष्म पर्व
अध्याय १११
सञ्जय़ उवाच
दशाहानि ततस्तप्त्वा भीष्मः पाण्डववाहिनीम् |
१० क
स्त्री पर्व
अध्याय २६
युधिष्ठिर उवाच
दशाय़ुतानामय़ुतं सहस्राणि च विंशतिः |
९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०६
भगीरथ उवाच
दशाय़ुतानि चाश्वानामय़ुतानि च विंशतिम् |
११ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६५
सञ्जय़ उवाच
दशाय़ुतानि तीक्ष्णाग्रैरवधीद्विशिखैः शितैः ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २३८
व्यास उवाच
दशेदमृक्सहस्राणि निर्मथ्यामृतमुद्धृतम् ||
१४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०६
भगीरथ उवाच
दशैकरात्रान्दश पञ्चरात्रा; नेकादशैकादशकान्क्रतूंश्च |
९ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०९
सञ्जय़ उवाच
दशैते तावका योधा भीमसेनमय़ोधय़न् ||
२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १६
सञ्जय़ उवाच
दशैते पुरुषव्याघ्राः शूराः परिघवाहवः |
३५ क
शान्ति पर्व
अध्याय १०९
भीष्म उवाच
दशैव तु सदाचार्यः श्रोत्रिय़ानतिरिच्यते |
१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय २६
सञ्जय़ उवाच
दशैव तु सहस्राणि त्रिगर्तानां नराधिप |
११ क
आदि पर्व
अध्याय ८६
यय़ातिरु उवाच
दशैव पूर्वान्दश चापरांस्तु; ज्ञातीन्सहात्मानमथैकविंशम् |
७ क
वन पर्व
अध्याय १३४
अष्टावक्र उवाच
दशैव मासान्विभ्रति गर्भवत्यो; दशेरका दश दाशा दशार्णाः ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ५९
भीष्म उवाच
दशोक्तानि कुरुश्रेष्ठ व्यसनान्यत्र चैव ह ||
५९ ख
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
दशोत्तराणि षट्प्राहुर्यथावदिह सङ्ख्यया ||
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३१४
भीष्म उवाच
दशय़ोजनविस्तारमग्निज्वालासमावृतम् ||
२० ख
वन पर्व
अध्याय २६७
मार्कण्डेय़ उवाच
दशय़ोजनविस्तारमाय़तं शतय़ोजनम् ||
४४ ख
आदि पर्व
अध्याय ३९
तक्षक उवाच
दष्टं यदि मय़ेह त्वं शक्तः किञ्चिच्चिकित्सितुम् |
१ क
वन पर्व
अध्याय ८२
पुलस्त्य उवाच
दष्टस्याशीविषेणापि न तस्य क्रमते विषम् |
९२ क
वन पर्व
अध्याय १२
विदुर उवाच
दष्टोष्ठदंष्ट्रं ताम्राक्षं प्रदीप्तोर्ध्वशिरोरुहम् |
८ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५४
भीम उवाच
दसीशतं चापि रथांश्च विंशतिं; यदर्जुनं वेदय़से विशोक ||
२९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १६६
भीष्म उवाच
दस्यवश्चापि नैच्छन्त तमत्तुं पापकारिणम् |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २५९
द्युमत्सेन उवाच
दस्यवश्चेन्न हन्येरन्सत्यवन्सङ्करो भवेत् ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ९०
भीष्म उवाच
दस्यवस्तद्वधाय़ेह व्रह्मा क्षत्रमथासृजत् ||
८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४९
कृष्ण उवाच
दस्यवोऽपि गताः क्रूरा व्यमार्गन्त प्रय़त्नतः ||
४३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १३१
भीष्म उवाच
दस्यवोऽप्युपशङ्कन्ते निरनुक्रोशकारिणः ||
११ ख
वन पर्व
अध्याय १८८
मार्कण्डेय़ उवाच
दस्युप्रपीडिता राजन्काका इव द्विजोत्तमाः |
६१ क
शान्ति पर्व
अध्याय १३८
युधिष्ठिर उवाच
दस्युभिः पीड्यमाने च कथं स्थेय़ं पितामह ||
१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ४७
भीष्म उवाच
दस्युभिर्ह्रिय़माणं च धनं दाराश्च सर्वशः |
४४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ९८
भीष्म उवाच
दस्युभ्यः प्राणदानात्स धनदः सुखदो विराट् ||
८ ख
सभा पर्व
अध्याय ३०
वैशम्पाय़न उवाच
दस्युभ्यो वञ्चकेभ्यो वा राजन्प्रति परस्परम् |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ७९
युधिष्ठिर उवाच
दस्युभ्योऽथ प्रजा रक्षेद्दण्डं धर्मेण धारय़न् ||
३५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १६६
भीष्म उवाच
दस्यूनां दीय़तामेष कृतघ्नोऽद्यैव राक्षसाः ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १६६
भीष्म उवाच
दस्यूनां दीय़तामेष साध्वद्य पुरुषाधमः |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय १३४
भीष्म उवाच
दस्यूनां निष्क्रिय़ाणां च क्षत्रिय़ो हर्तुमर्हति ||
२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ९५
सञ्जय़ उवाच
दस्यूनां सशिरस्त्राणैः शिरोभिर्लूनमूर्धजैः |
४० क
शान्ति पर्व
अध्याय १३१
भीष्म उवाच
दस्यूनां सुलभा सेना रौद्रकर्मसु भारत ||
१० ग
विराट पर्व
अध्याय १५
द्रौपद्यु उवाच
दस्यूनामिव धर्मस्ते न हि संसदि शोभते ||
२४ ख
वन पर्व
अध्याय ११
मैत्रेय़ उवाच
दस्यूनामिव यद्वृत्तं सभाय़ां कुरुनन्दन |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय २५९
सत्यवानु उवाच
दस्यून्हिनस्ति वै राजा भूय़सो वाप्यनागसः |
१० क
कर्ण पर्व
अध्याय ५६
सञ्जय़ उवाच
दहंस्तस्थौ महावाहुः पाण्डवानां महाचमूम् ||
३५ ख