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भीष्म पर्व
अध्याय ३३
सञ्जय़ उवाच
दर्शय़ामास पार्थाय़ परमं रूपमैश्वरम् ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय २५६
भीमसेन उवाच
दर्शय़ामास भीमस्तु तदवस्थं जय़द्रथम् |
१५ क
वन पर्व
अध्याय १६४
अर्जुन उवाच
दर्शय़ामास मां राजँल्लक्ष्म्या परमय़ा युतः ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय १६४
अर्जुन उवाच
दर्शय़ामास मे प्रीत्या मातलिः शक्रसारथिः ||
४१ ख
वन पर्व
अध्याय १६४
अर्जुन उवाच
दर्शय़ामास मे राजन्विमानानि च भारत ||
४० ख
शल्य पर्व
अध्याय ३६
वैशम्पाय़न उवाच
दर्शय़ामास राजेन्द्र तेषामर्थे सरस्वती ||
५० ख
आदि पर्व
अध्याय ९३
वैशम्पाय़न उवाच
दर्शय़ामास राजेन्द्र पुरा पौरवनन्दन ||
१६ ख
आदि पर्व
अध्याय १२५
वैशम्पाय़न उवाच
दर्शय़ामास वीभत्सुराचार्यादस्त्रलाघवम् ||
१८ ख
वन पर्व
अध्याय २६२
मार्कण्डेय़ उवाच
दर्शय़ामास वैदेहीं मारीचो मृगरूपधृक् |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय ५१
वासुदेव उवाच
दर्शय़ाम्यहमात्मानं न चादान्ताय़ भारत ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १५१
भीष्म उवाच
दर्शय़ाम्येष आत्मानं यथा मामवभोत्स्यसे ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय १७२
वैशम्पाय़न उवाच
दर्शय़ास्त्राणि कौन्तेय़ यैर्जिता दानवास्त्वय़ा ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय २६७
मार्कण्डेय़ उवाच
दर्शय़ित्वा ततः सैन्यं रामः पश्चादवासृजत् ||
५३ ख
विराट पर्व
अध्याय ५७
वैशम्पाय़न उवाच
दर्शय़ित्वा तथात्मानं रौद्रं रुद्रपराक्रमः |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२०
भीष्म उवाच
दर्शय़ित्वा प्रभावं स्वं सर्वभूतोऽभवत्तदा ||
१९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५१
सञ्जय़ उवाच
दर्शय़ित्वात्मनो रूपं रुद्रोपेन्द्रसमं युधि |
३१ क
द्रोण पर्व
अध्याय ७५
सञ्जय़ उवाच
दर्शय़ित्वात्मनो वीर्यं प्रय़ातौ सर्वराजसु ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १५१
भीष्म उवाच
दर्शय़िष्यामि ते तेजस्ततो रात्रिरुपागमत् ||
१२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १४
उपश्रुतिरु उवाच
दर्शय़िष्यामि ते शक्रं देवं वृत्रनिषूदनम् |
४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १६
शल्य उवाच
दर्शय़िष्यामि ते शक्रं सत्यमेतद्व्रवीमि ते ||
९ ग
सभा पर्व
अध्याय ६८
वैशम्पाय़न उवाच
दर्शय़िष्यामि भूय़िष्ठमहं वैवस्वतक्षय़म् ||
४४ ख
वन पर्व
अध्याय १९०
मार्कण्डेय़ उवाच
दलं राजानं व्राह्मणानां हि देय़; मेवं राजन्सर्वधर्मेषु दृष्टम् ||
७० ख
कर्ण पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
दवाग्निना परीताङ्गा यथैव स्युर्महावने ||
१०२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९९
याज्ञवल्क्य उवाच
दश कल्पसहस्राणि पादोनान्यहरुच्यते |
६ ख
सभा पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
दश किष्कुसहस्राणि समन्तादाय़ताभवत् ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय ८०
पुलस्त्य उवाच
दश कोटिसहस्राणि तीर्थानां वै महीपते |
४२ क
वन पर्व
अध्याय १८३
मार्कण्डेय़ उवाच
दश कोट्यो हिरण्यस्य रुक्मभारांस्तथा दश |
३० ख
उद्योग पर्व
अध्याय १५२
वैशम्पाय़न उवाच
दश गुल्मा गणस्त्वासीद्गणास्त्वय़ुतशोऽभवन् |
२५ क
स्त्री पर्व
अध्याय २६
युधिष्ठिर उवाच
दश चान्यानि राजेन्द्र शतं षष्टिश्च पञ्च च ||
१० ख
उद्योग पर्व
अध्याय १९७
वैशम्पाय़न उवाच
दश चाश्वसहस्राणि द्विसाहस्रं च दन्तिनः |
१३ क
शल्य पर्व
अध्याय ७
सञ्जय़ उवाच
दश चाश्वसहस्राणि पत्तिकोटी च भारत ||
३९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ५७
सञ्जय़ उवाच
दश चैका च ताः कृष्ण अक्षौहिण्यः सुदुर्जय़ाः |
१२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०८
भीष्म उवाच
दश चैव पितॄन्माता सर्वां वा पृथिवीमपि ||
१४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ७९
वसिष्ठ उवाच
दश चोभय़तः प्रेत्य मातापित्रोः पितामहान् |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय १२४
दुर्योधन उवाच
दश तानि सहस्राणि स्नातकानां महात्मनाम् |
११ क
अनुशासन पर्व
अध्याय २६
अङ्गिरा उवाच
दश तीर्थसहस्राणि तिस्रः कोट्यस्तथापराः |
३५ क
वन पर्व
अध्याय ८३
पुलस्त्य उवाच
दश तीर्थसहस्राणि षष्टिकोट्त्यस्तथापराः |
७९ क
शल्य पर्व
अध्याय ७
सञ्जय़ उवाच
दश दन्तिसहस्राणि सप्त चैव शतानि च ||
३७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ३३
विदुर उवाच
दश धर्मं न जानन्ति धृतराष्ट्र निवोध तान् |
८२ क
कर्ण पर्व
अध्याय २४
देवा ऊचुः
दश नागपतीनीषां धृतराष्ट्रमुखान्दृढाम् |
७२ क
वन पर्व
अध्याय १७५
वैशम्पाय़न उवाच
दश नागसहस्राणि धारय़न्ति हि यद्वलम् |
१८ क
विराट पर्व
अध्याय १७
द्रौपद्यु उवाच
दश नागसहस्राणि पद्मिनां हेममालिनाम् |
१५ क
विराट पर्व
अध्याय ६७
वैशम्पाय़न उवाच
दश नागसहस्राणि हय़ानां च शताय़ुतम् |
२३ क
आदि पर्व
अध्याय ३९
काश्यप उवाच
दश नागेन्द्र वृक्षं त्वं यमेनमभिमन्यसे |
३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १७
उपमन्युरु उवाच
दश नामसहस्राणि यान्याह प्रपितामहः |
१३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १६
वासुदेव उवाच
दश नामसहस्राणि वेदेष्वाह पितामहः |
७४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०६
याज्ञवल्क्य उवाच
दश पञ्च च प्राप्तानि यजूंष्यर्कान्मय़ानघ |
२१ क
विराट पर्व
अध्याय ३९
उत्तर उवाच
दश पार्थस्य नामानि यानि पूर्वं श्रुतानि मे |
७ क
आदि पर्व
अध्याय १
सूत उवाच
दश पुत्रसहस्राणि दशज्योतेर्महात्मनः |
४३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ८३
भीष्म उवाच
दश पूर्वान्दश परांस्तथा सन्तारय़न्ति ते |
२७ क