अनुशासन पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
दर्पहा दर्पदो दृप्तो दुर्धरोऽथापराजितः ||
८९ ख
विराट पर्व
अध्याय
२१
वैशम्पाय़न उवाच
दर्पाच्च सूतपुत्रोऽसौ गन्धर्वानवमन्यते |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२८३
पराशर उवाच
दर्पात्मनां ततः क्रोधः पुनस्तेषामजाय़त ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय
९२
लोमश उवाच
दर्पान्मानः समभवन्मानात्क्रोधो व्यजाय़त |
८ क
वन पर्व
अध्याय
९२
लोमश उवाच
दर्पाभिभूतान्कौन्तेय़ क्रिय़ाहीनानचेतसः ||
११ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१४
शल्य उवाच
दर्पाविष्टश्च दुष्टात्मा मामुवाच शतक्रतो |
१३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०१
सञ्जय़ उवाच
दर्पितानां सुवेगानां वलस्थानां पताकिनाम् |
९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१२
वृहस्पतिरु उवाच
दर्पितो वलवांश्चापि नहुषो वरसंश्रय़ात् ||
२६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
९४
वैशम्पाय़न उवाच
दर्पेण महता मत्तः कञ्चिदन्यमचिन्तय़न् ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०१
याज्ञवल्क्य उवाच
दर्पो द्वेषोऽतिवादश्च एते प्रोक्ता रजोगुणाः ||
२३ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
९१
उतथ्य उवाच
दर्पो नाम श्रिय़ः पुत्रो जज्ञेऽधर्मादिति श्रुतिः |
२४ क
वन पर्व
अध्याय
३९
वैशम्पाय़न उवाच
दर्भचीरं निवस्याथ दण्डाजिनविभूषितः |
२१ क
वन पर्व
अध्याय
२३९
वैशम्पाय़न उवाच
दर्भप्रस्तरमास्तीर्य निश्चय़ाद्धृतराष्ट्रजः |
१६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
दर्वीकाः सकचा दर्वा वातजामरथोरगाः |
५३ क
वन पर्व
अध्याय
८२
पुलस्त्य उवाच
दर्वीसङ्क्रमणं प्राप्य तीर्थं त्रैलोक्यविश्रुतम् |
४० क
सभा पर्व
अध्याय
१२
वैशम्पाय़न उवाच
दर्वीहोमानुपादाय़ सर्वान्यः प्राप्नुते क्रतून् |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२६१
कपिल उवाच
दर्शं च पौर्णमासं च अग्निहोत्रं च धीमताम् |
१९ क
वन पर्व
अध्याय
२४६
व्यास उवाच
दर्शं च पौर्णमासं च कुर्वन्विगतमत्सरः |
६ क
वन पर्व
अध्याय
२११
मार्कण्डेय़ उवाच
दर्शं च पौर्णमासं च यस्य तिष्ठेत्प्रतिष्ठितम् |
३० क
शल्य पर्व
अध्याय
४९
वैशम्पाय़न उवाच
दर्शं च पौर्णमासं च ये यजन्ति तपोधनाः |
३० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५१
निषादा ऊचुः
दर्शनं कथनं चैव सहास्माभिः कृतं मुने |
३५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१४
उपश्रुतिरु उवाच
दर्शनं चैव सम्प्राप्ता तव सत्येन तोषिता ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
४६
वैशम्पाय़न उवाच
दर्शनं तस्य लाभः स्यात्त्वं हि व्रह्ममय़ो निधिः ||
३० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१६४
भीष्म उवाच
दर्शनं राक्षसेन्द्रस्य काङ्क्षमाणो द्विजस्तदा ||
२६ ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
दर्शनं लोकपालानां स्वर्गारोहणमेव च ||
१०७ ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
दर्शनं वृहदश्वस्य महर्षेर्भावितात्मनः |
१०८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२६७
असित उवाच
दर्शनं श्रवणं घ्राणं स्पर्शनं रसनं तथा |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२८
व्यास उवाच
दर्शनस्पर्शनवहो घ्राणश्रवणवाहनः ||
९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१६०
सञ्जय़ उवाच
दर्शनस्य च वक्रस्य कृत्स्नस्यापनय़स्य च |
१९ क
सभा पर्व
अध्याय
१२
वैशम्पाय़न उवाच
दर्शनाकाङ्क्षिणं पार्थं दर्शनाकाङ्क्षय़ाच्युतः |
३० क
वन पर्व
अध्याय
३८
वैशम्पाय़न उवाच
दर्शनात्तस्य कौन्तेय़ संसिद्धः स्वर्गमेष्यसि ||
४४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
५३
भीष्म उवाच
दर्शनात्तस्य च मुनेर्विश्रान्तौ सम्वभूवतुः ||
५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२७
सिद्ध उवाच
दर्शनात्स्पर्शनात्पानात्तथा गङ्गेति कीर्तनात् |
६३ क
वन पर्व
अध्याय
४५
वैशम्पाय़न उवाच
दर्शनादेव निहताः सगरस्यात्मजा विभो ||
२६ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३६
वैशम्पाय़न उवाच
दर्शनादेव भवतां पूतोऽहं नात्र संशय़ः |
२५ क
आदि पर्व
अध्याय
१६१
तपत्यु उवाच
दर्शनादेव भूय़स्त्वं तथा प्राणान्ममाहरः ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय
२५१
वैशम्पाय़न उवाच
दर्शनादेव हि मनस्तय़ा मेऽपहृतं भृशम् |
४ क
आदि पर्व
अध्याय
६५
वैशम्पाय़न उवाच
दर्शनादेव हि शुभे त्वय़ा मेऽपहृतं मनः |
१३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४८
भीष्म उवाच
दर्शनानां परं ज्ञानं सन्तोषः परमं सुखम् ||
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२३१
व्यास उवाच
दर्शनानीन्द्रिय़ोक्तानि द्वाराण्याहारसिद्धय़े ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय
२२१
रुद्र उवाच
दर्शनान्मम भक्त्या च श्रेय़ः परमवाप्स्यसि ||
२८ ख
वन पर्व
अध्याय
२८
वैशम्पाय़न उवाच
दर्शनीय़ं च शूरं च माद्रीपुत्रं युधिष्ठिर |
३१ क
सभा पर्व
अध्याय
६८
वैशम्पाय़न उवाच
दर्शनीय़तमो नॄणामिदं वचनमव्रवीत् ||
४२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
४१
भीष्म उवाच
दर्शनीय़तमो भूत्वा प्रविवेश तमाश्रमम् ||
२ ख
सभा पर्व
अध्याय
७१
विदुर उवाच
दर्शनीय़तमो लोके राजानमनुगच्छति ||
५ ख
सभा पर्व
अध्याय
७१
विदुर उवाच
दर्शनीय़ा प्ररुदती राजानमनुगच्छति ||
६ ख
आदि पर्व
अध्याय
१७५
व्राह्मणा ऊचुः
दर्शनीय़ांश्च वः सर्वान्देवरूपानवस्थितान् |
१८ क
आदि पर्व
अध्याय
११६
वैशम्पाय़न उवाच
दर्शनीय़ांस्ततः पुत्रान्पाण्डुः पञ्च महावने |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०
वासुदेव उवाच
दर्शनीय़ानवद्याङ्गी शीलवृत्तसमन्विता |
१२ ख
आदि पर्व
अध्याय
१७५
व्राह्मणा ऊचुः
दर्शनीय़ानवद्याङ्गी सुकुमारी मनस्विनी |
८ क