आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९५
वैशम्पाय़न उवाच
दमे स्थिताश्च ते सर्वे दम्भमोहविवर्जिताः ||
८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
दुर्योधन उवाच
दमेन तपसा चैव निय़मेन च पार्थिव |
६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
७४
भीष्म उवाच
दमेन यानि नृपते गच्छन्ति परमर्षय़ः |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२८२
पराशर उवाच
दमेन शोभते विप्रः क्षत्रिय़ो विजय़ेन तु |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१५४
भीष्म उवाच
दमेन सदृशं धर्मं नान्यं लोकेषु शुश्रुम |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय
१५४
भीष्म उवाच
दमेन हि समाय़ुक्तो महान्तं धर्ममश्नुते ||
११ ख
आदि पर्व
अध्याय
९४
वैशम्पाय़न उवाच
दमो दानं क्षमा वुद्धिर्ह्रीर्धृतिस्तेज उत्तमम् |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१५४
भीष्म उवाच
दमो दानं तथा यज्ञानधीतं चातिवर्तते ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय
१५९
वैश्रवण उवाच
दमो दानं वलं वुद्धिर्ह्रीर्धृतिस्तेज उत्तमम् |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१५६
भीष्म उवाच
दमो नान्यस्पृहा नित्यं धैर्यं गाम्भीर्यमेव च |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१५४
भीष्म उवाच
दमो हि परमो लोके प्रशस्तः सर्वधर्मिणाम् ||
१० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
४३
सनत्सुजात उवाच
दमोऽष्टादशदोषः स्यात्प्रतिकूलं कृताकृते |
१५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२०
वासुदेव उवाच
दम्पत्योः पार्थ संवादमभय़ं नाम नामतः ||
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२५८
भीष्म उवाच
दम्पत्योः प्राणसंश्लेषे योऽभिसन्धिः कृतः किल |
३२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२८
महेश्वर उवाच
दम्पत्योः समशीलत्वं धर्मश्च गृहमेधिनाम् |
४३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३३
विदुर उवाच
दम्भं मोहं मत्सरं पापकृत्यं; राजद्विष्टं पैशुनं पूगवैरम् |
९६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३३
विदुर उवाच
दम्भं स्तैन्यं पैशुनं मद्यपानं; न सेवते यः स सुखी सदैव ||
८९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३६
व्यास उवाच
दम्भदोषप्रधानेषु विधिरेष न दृश्यते ||
४३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११०
भीष्म उवाच
दम्भद्रोहनिवृत्तेषु कृतवुद्धिषु भारत |
१३७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५८
भीष्म उवाच
दम्भनार्थाय़ लोकस्य धर्मिष्ठामाचरेत्क्रिय़ाम् ||
२० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
३९
श्रीभगवानु उवाच
दम्भाहङ्कारसंय़ुक्ताः कामरागवलान्विताः ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
३८
श्रीभगवानु उवाच
दम्भो दर्पोऽतिमानश्च क्रोधः पारुष्यमेव च |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१५२
भीष्म उवाच
दम्भो द्रोहश्च निन्दा च पैशुन्यं मत्सरस्तथा |
१४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
दम्भो ह्यदम्भो वैदम्भो वश्यो वश्यकरः कविः |
७६ क
सभा पर्व
अध्याय
२०
वासुदेव उवाच
दम्भोद्भवः कार्तवीर्य उत्तरश्च वृहद्रथः |
२२ क
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
दम्भोद्भवः परो वेनः सगरः सङ्कृतिर्निमिः |
१७४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
९४
राम उवाच
दम्भोद्भवस्तापसं तं जिघांसुः सहसैनिकः ||
२६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६५
सञ्जय़ उवाच
दम्भोद्भवाश्चासुराश्चाहवेषु; तय़ा धृत्या त्वं जहि सूतपुत्रम् ||
१८ ख
आदि पर्व
अध्याय
५०
आस्तीक उवाच
दम्भोद्भवेनासि समो वलेन; रामो यथा शस्त्रविदस्त्रविच्च |
१६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
९४
राम उवाच
दम्भोद्भवो युद्धमिच्छन्नाह्वय़त्येव तापसौ ||
२२ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
१७१
भीष्म उवाच
दम्यनाशकृते मङ्किरमरत्वं किलागमत् |
५४ क
वन पर्व
अध्याय
५०
वृहदश्व उवाच
दमय़न्ति नलो नाम निषधेषु महीपतिः |
२६ क
वन पर्व
अध्याय
७७
वृहदश्व उवाच
दमय़न्ती च यच्चान्यन्मय़ा वसु समर्जितम् |
५ क
वन पर्व
अध्याय
७१
वृहदश्व उवाच
दमय़न्ती च शुश्राव रथघोषं नलस्य तम् |
४ क
वन पर्व
अध्याय
५७
वृहदश्व उवाच
दमय़न्ती ततो दृष्ट्वा पुण्यश्लोकं नराधिपम् |
१ क
वन पर्व
अध्याय
७४
वृहदश्व उवाच
दमय़न्ती ततो भूय़ः प्रेषय़ामास केशिनीम् |
२ क
वन पर्व
अध्याय
६१
दमय़न्त्यु उवाच
दमय़न्ती ततो भूय़ो जगाम दिशमुत्तराम् ||
५६ ख
वन पर्व
अध्याय
५४
वृहदश्व उवाच
दमय़न्ती ततो रङ्गं प्रविवेश शुभानना |
८ क
वन पर्व
अध्याय
६०
वृहदश्व उवाच
दमय़न्ती तथा तेन पृच्छ्यमाना विशां पते |
३० क
वन पर्व
अध्याय
६७
वृहदश्व उवाच
दमय़न्ती तव सुता भर्तारमनुशोचति ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय
६०
वृहदश्व उवाच
दमय़न्ती तु तं दुष्टमुपलभ्य पतिव्रता |
३४ क
वन पर्व
अध्याय
७४
वृहदश्व उवाच
दमय़न्ती तु तच्छ्रुत्वा नलस्य परिदेवितम् |
२४ क
वन पर्व
अध्याय
७३
वृहदश्व उवाच
दमय़न्ती तु तच्छ्रुत्वा पुण्यश्लोकस्य चेष्टितम् |
१८ क
वन पर्व
अध्याय
७३
वृहदश्व उवाच
दमय़न्ती तु तच्छ्रुत्वा भृशं शोकपराय़णा |
१ क
वन पर्व
अध्याय
५१
वृहदश्व उवाच
दमय़न्ती तु तच्छ्रुत्वा वचो हंसस्य भारत |
१ क
वन पर्व
अध्याय
६०
वृहदश्व उवाच
दमय़न्ती तु दुःखार्ता पतिराज्यविनाकृता |
३६ क
वन पर्व
अध्याय
५०
वृहदश्व उवाच
दमय़न्ती तु यं हंसं समुपाधावदन्तिके |
२५ क
वन पर्व
अध्याय
५०
वृहदश्व उवाच
दमय़न्ती तु रूपेण तेजसा यशसा श्रिय़ा |
१० क
वन पर्व
अध्याय
७१
वृहदश्व उवाच
दमय़न्ती तु शोकार्ता दृष्ट्वा भाङ्गस्वरिं नृपम् |
३० क
वन पर्व
अध्याय
५२
वृहदश्व उवाच
दमय़न्ती नलं वीरमभ्यभाषत विस्मिता ||
१८ ख