अनुशासन पर्व
अध्याय
२७
सिद्ध उवाच
दधार शिरसा देवीं तामेव दिवि सेवते ||
७१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०६
सञ्जय़ उवाच
दधार समरे वीरः स्वरश्मीनिव भास्करः ||
४६ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२०
सञ्जय़ उवाच
दधार समरे शूरः शत्रुसैन्यं महावलः ||
२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४५
सञ्जय़ उवाच
दधार सहसा पार्थो वेलेव मकरालय़म् ||
२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९१
सञ्जय़ उवाच
दधार सुप्रतीकोऽपि वेलेव मकरालय़म् ||
४३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८६
सञ्जय़ उवाच
दधार सुमहद्रूपमनन्त इव भोगवान् |
६७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८०
सञ्जय़ उवाच
दधारात्मवपुर्घोरं युगान्तादित्यसंनिभम् ||
१२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४२
सञ्जय़ उवाच
दधारैको रणे कर्णो जलौघानिव पर्वतः ||
५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९०
सञ्जय़ उवाच
दधारैको रणे पाण्डून्कृतवर्मा महारथः ||
७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५
सञ्जय़ उवाच
दधारैको रणे पाण्डून्वृषसेनोऽस्त्रमाय़या ||
१ ख
शल्य पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
दधारैको रणे शल्यो वेलेवोद्धृतमर्णवम् ||
५ ख
विराट पर्व
अध्याय
१२
वैशम्पाय़न उवाच
दधि क्षीरं घृतं चैव पाण्डवेभ्यः प्रय़च्छति ||
८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०७
भीष्म उवाच
दधि चाप्यनुपानं वै न कर्तव्यं भवार्थिना ||
९२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११२
वृहस्पतिरु उवाच
दधि हृत्वा वकश्चापि प्लवो मत्स्यानसंस्कृतान् ||
९५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८७
वैशम्पाय़न उवाच
दधिकुल्याश्च ददृशुः सर्पिषश्च ह्रदाञ्जनाः ||
१२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०१
शुक्र उवाच
दधिद्रप्सय़ुताः पुण्याः सुगन्धाः प्रिय़दर्शनाः ||
५९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
दधिपृष्ठाश्चन्द्रमुखाः पाञ्चाल्यमवहन्द्रुतम् ||
४५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
४९
वासुदेव उवाच
दधिवाहनपौत्रस्तु पुत्रो दिविरथस्य ह |
७२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०७
भीष्म उवाच
दधिसक्तून्न भुञ्जीत वृथामांसं च वर्जय़ेत् ||
८६ ख
वन पर्व
अध्याय
९८
लोमश उवाच
दधीच इति विख्यातो महानृषिरुदारधीः ||
७ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५०
वैशम्पाय़न उवाच
दधीच इति विख्यातो व्रह्मचारी जितेन्द्रिय़ः ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय
९०
लोमश उवाच
दधीच इव देवेन्द्रं यथा चाप्यङ्गिरा रविम् |
६ क
आदि पर्व
अध्याय
१२७
वैशम्पाय़न उवाच
दधीचस्यास्थितो वज्रं कृतं दानवसूदनम् ||
१२ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५०
वैशम्पाय़न उवाच
दधीचास्थीनि देहीति तैर्वधिष्यामहे रिपून् ||
२८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
दध्मतुः पुरुषव्याघ्रौ दिव्यौ शङ्खौ रथे स्थितौ ||
१७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४६
सञ्जय़ उवाच
दध्मतुर्मुदितौ शङ्खौ वासुदेवधनञ्जय़ौ ||
४१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७९
सञ्जय़ उवाच
दध्मतुर्मुदितौ शङ्खौ सिंहनादं विनेदतुः ||
५४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
दध्मतुर्वारिजौ तत्र सिंहनादं च नेदतुः ||
३८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०१
सञ्जय़ उवाच
दध्मुः शङ्खांश्च भेरीश्च ताडय़ामासुराहवे ||
२४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५४
सञ्जय़ उवाच
दध्मुः शङ्खांश्च भेरीश्च मुरजांश्च व्यनादय़न् ||
४४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५४
सञ्जय़ उवाच
दध्मुः शङ्खान्मुदा युक्ता भेरीश्च जघ्निरे भृशम् ||
४३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४७
सञ्जय़ उवाच
दध्मुः शङ्खान्मुदा युक्ताः सिंहनादांश्च नादय़न् ||
२१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
दध्मुः सर्वे महाशङ्खान्भेरीर्जघ्नुः सहस्रशः ||
१५ ख
शल्य पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
दध्मुरन्ये महाशङ्खानन्ये जघ्नुश्च दुन्दुभीः ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४१
सञ्जय़ उवाच
दध्मुश्च मुदिताः शङ्खान्वीराः सागरसम्भवान् ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय
१४६
वैशम्पाय़न उवाच
दध्मौ च शङ्खं स्वनवत्सर्वप्राणेन पाण्डवः ||
५५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७१
सञ्जय़ उवाच
दध्मौ प्रमुदितः शङ्खं वृहन्तमपराजितः ||
६६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
दध्मौ वेगेन महता फल्गुनः पूरय़न्दिशः ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३१
सञ्जय़ उवाच
दध्मौ शङ्खं च तारेण सिंहनादं ननाद च ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२२
सञ्जय़ उवाच
दध्मौ शङ्खं महावेगमार्षभेणाथ माधवः ||
४२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२७
सञ्जय़ उवाच
दध्मौ सागरसम्भूतं सुस्वनं शङ्खमुत्तमम् ||
१३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
दध्युश्चैव महाराज न युद्धे दधिरे मनः |
१०४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५२
सञ्जय़ उवाच
दध्रे कर्णविनाशाय़ केशवं चाभ्यभाषत ||
२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९०
सञ्जय़ उवाच
दध्रे नीलविनाशाय़ मतिं मतिमतां वरः ||
३१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८८
सञ्जय़ उवाच
दध्रे मतिं विनाशाय़ राज्ञः स पिशिताशनः |
४ ख
आदि पर्व
अध्याय
५९
वैशम्पाय़न उवाच
दनुपुत्रा महाराज दश दानवपुङ्गवाः ||
२७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
७०
युधिष्ठिर उवाच
दन्तदर्शनमारावस्ततो युद्धं प्रवर्तते ||
७१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१६
सञ्जय़ उवाच
दन्तपूर्णैः सरुधिरैर्वक्त्रैर्दाडिमसंनिभैः |
२८ क
आदि पर्व
अध्याय
६१
वैशम्पाय़न उवाच
दन्तवक्त्रश्च नामासीद्दुर्जय़श्चैव नामतः |
५७ क
सभा पर्व
अध्याय
१३
श्रीकृष्ण उवाच
दन्तवक्रः करूषश्च कलभो मेघवाहनः |
१२ क