शल्य पर्व
अध्याय
१६
सञ्जय़ उवाच
ततो द्रुतं मद्रजनाधिपो रणे; युधिष्ठिरं सप्तभिरभ्यविध्यत् |
११ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१७२
सञ्जय़ उवाच
ततो द्रुतमतिक्रम्य सिंहलाङ्गूलकेतनम् |
४ क
आदि पर्व
अध्याय
१२२
वैशम्पाय़न उवाच
ततो द्रुपदमागम्य सखिपूर्वमहं प्रभो |
३३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१५४
वैशम्पाय़न उवाच
ततो द्रुपदमानाय़्य विराटं शिनिपुङ्गवम् |
१० क
उद्योग पर्व
अध्याय
१९०
भीष्म उवाच
ततो द्रुपदमासाद्य दूतः काञ्चनवर्मणः |
२० क
आदि पर्व
अध्याय
१२२
वैशम्पाय़न उवाच
ततो द्रुपदमासाद्य भारद्वाजः प्रतापवान् |
१ क
आदि पर्व
अध्याय
१५४
व्राह्मण उवाच
ततो द्रुपदमासाद्य भारद्वाजः प्रतापवान् |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय
२५
सूत उवाच
ततो द्रुमं पतगसहस्रसेवितं; महीधरप्रतिमवपुः प्रकम्पय़न् |
३३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१४५
भीष्म उवाच
ततो द्रुमाणां महतां पवनेन वने तदा |
८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९८
सञ्जय़ उवाच
ततो द्रोणं महाराज पाञ्चाल्यः क्रोधमूर्छितः |
४६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४५
सञ्जय़ उवाच
ततो द्रोणं महाराज पाञ्चाल्यः पञ्चभिः शरैः |
६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
ततो द्रोणं महेष्वासं गाङ्गेय़स्य प्रिय़े रतम् |
३० क
द्रोण पर्व
अध्याय
७२
सञ्जय़ उवाच
ततो द्रोणं शिनेः पौत्रो ग्रसन्तमिव सृञ्जय़ान् |
३४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९३
सञ्जय़ उवाच
ततो द्रोणं शिनेः पौत्रो राजन्विव्याध पत्रिणा |
२१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८
धृतराष्ट्र उवाच
ततो द्रोणं समारोहत्पार्षतः पापकर्मकृत् ||
२५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
४५
सञ्जय़ उवाच
ततो द्रोणः कृपः कर्णो द्रोणपुत्रो वृहद्वलः |
१९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
५१
युधिष्ठिर उवाच
ततो द्रोणः कृपः कर्णो द्रौणिश्च स वृहद्वलः |
१० क
द्रोण पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
ततो द्रोणः कृपः कर्णो द्रौणी राजा जय़द्रथः |
३७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३०
सञ्जय़ उवाच
ततो द्रोणः केकय़ांश्च धृष्टद्युम्नस्य चात्मजान् |
१२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५९
वासुदेव उवाच
ततो द्रोणः परिश्रान्तो धृष्टद्युम्नवशं गतः ||
१८ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२२
वैशम्पाय़न उवाच
ततो द्रोणः पाण्डुपुत्रानस्त्राणि विविधानि च |
४५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९३
सञ्जय़ उवाच
ततो द्रोणः शिनेः पौत्रं चित्रैः सर्वाय़सैः शरैः |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२०
सञ्जय़ उवाच
ततो द्रोणः सत्यसन्धः प्रभिन्न इव कुञ्जरः |
४० क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६१
सञ्जय़ उवाच
ततो द्रोणः सुपीताभ्यां भल्लाभ्यामरिमर्दनः |
३४ क
सभा पर्व
अध्याय
६६
वैशम्पाय़न उवाच
ततो द्रोणः सोमदत्तो वाह्लीकश्च महारथः |
२५ क
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
ततो द्रोणवधः पर्व विज्ञेय़ं लोमहर्षणम् |
५८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४७
सञ्जय़ उवाच
ततो द्रोणश्च कर्णश्च परान्ममृदतुर्युधि ||
३१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९७
सञ्जय़ उवाच
ततो द्रोणश्च पार्थश्च समेय़ातां महामृधे |
५७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६५
सञ्जय़ उवाच
ततो द्रोणश्च भीष्मश्च तथा शल्यश्च मारिष |
२४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४७
सञ्जय़ उवाच
ततो द्रोणश्च भीष्मश्च तव पुत्रश्च मारिष |
१० क
भीष्म पर्व
अध्याय
५३
सञ्जय़ उवाच
ततो द्रोणश्च भीष्मश्च सैन्धवश्च जय़द्रथः |
२५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७३
सञ्जय़ उवाच
ततो द्रोणस्य दाशार्हः शरांश्चिच्छेद संय़ुगे |
३३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९३
सञ्जय़ उवाच
ततो द्रोणस्य यन्तारं निपात्यैकेषुणा भुवि |
२८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०१
सञ्जय़ उवाच
ततो द्रोणाङ्किता वाणाः स्वर्णपुङ्खाः शिलाशिताः |
४६ क
आदि पर्व
अध्याय
१२६
वैशम्पाय़न उवाच
ततो द्रोणाभ्यनुज्ञातः कर्णः प्रिय़रणः सदा |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय
१२६
वैशम्पाय़न उवाच
ततो द्रोणाभ्यनुज्ञातः पार्थः परपुरञ्जय़ः |
२१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११५
सञ्जय़ उवाच
ततो द्रोणाय़ निहतं भीष्ममाचष्ट कौरवः |
२४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४२
सञ्जय़ उवाच
ततो द्रोणिः सुसङ्क्रुद्धः शरैः संनतपर्वभिः |
२९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६५
सञ्जय़ उवाच
ततो द्रोणे हते राजन्कुरवः शस्त्रपीडिताः |
६८ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
ततो द्रोणे हते राजन्दुर्योधनमुखा नृपाः |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
ततो द्रोणेन विहितो राजन्व्यूहो व्यरोचत |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८२
सञ्जय़ उवाच
ततो द्रोणो भृशं क्रुद्धः सहसोद्वृत्य चक्षुषी |
३९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८१
सञ्जय़ उवाच
ततो द्रोणो भृशं क्रुद्धो धर्मराजस्य मारिष |
३९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८१
सञ्जय़ उवाच
ततो द्रोणो भृशं क्रुद्धो धर्मराजस्य संय़ुगे |
२२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६५
सञ्जय़ उवाच
ततो द्रोणो महाराज अभ्यद्रवत तं रणे |
२९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०१
सञ्जय़ उवाच
ततो द्रोणो महाराज केकय़ं वै विशेषय़न् |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९८
सञ्जय़ उवाच
ततो द्रोणो महाराज नाम विश्राव्य संय़ुगे |
२६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
ततो द्रोणो महाराज पार्षतस्य महद्धनुः |
४४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११०
सञ्जय़ उवाच
ततो द्रोणो महाराज मागधश्च महारथः |
२९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
ततो द्रोणो महेष्वासः पाञ्चालानां रथव्रजान् |
५ क