आदि पर्व
अध्याय
१०९
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्तां च मृगीं तं च रुक्मपुङ्खैः सुपत्रिभिः |
६ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
११
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्तां पतितां दृष्ट्वा संरम्भी सत्यविक्रमः |
८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१९०
भीष्म उवाच
ततस्तां पार्षतो दृष्ट्वा कन्यां सम्प्राप्तय़ौवनाम् |
३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५५
गौतम उवाच
ततस्तां प्रतिजग्राह युवा भूत्वा यशस्विनीम् |
२४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१४
शल्य उवाच
ततस्तां प्रस्थितां देवीमिन्द्राणी सा समन्वगात् |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५९
भीष्म उवाच
ततस्तां भगवान्नीतिं पूर्वं जग्राह शङ्करः |
८६ क
वन पर्व
अध्याय
२६५
मार्कण्डेय़ उवाच
ततस्तां भर्तृशोकार्तां दीनां मलिनवाससम् |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५२
सञ्जय़ उवाच
ततस्तां भीमनिर्घोषामापतन्तीं महागदाम् |
४१ क
शल्य पर्व
अध्याय
३५
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्तां वीरुधं सोमं सङ्कल्प्य सुमहातपाः |
३३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२
भीष्म उवाच
ततस्तां समलङ्कृत्य कन्यामहतवाससम् |
३३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
व्रह्मो उवाच
ततस्तांश्चोदय़ामास वाय़ुवेगसमाञ्जवे |
११४ क
विराट पर्व
अध्याय
३६
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्तांश्चोदय़ामास सदश्वान्पाण्डुनन्दनः |
३ क
आदि पर्व
अध्याय
१०७
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्तांस्तेषु कुण्डेषु गर्भानवदधे तदा |
२१ क
मौसल पर्व
अध्याय
६
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ताः काञ्चने पीठे समुत्थाय़ोपवेश्य च |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय
२०९
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ताः पाण्डवश्रेष्ठः सर्वा एव विशां पते |
२१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ताः सञ्जय़ो राजन्समाश्वासय़दातुराः |
५ क
शल्य पर्व
अध्याय
३४
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ताः सहिताः सर्वा भूय़ः पितरमव्रुवन् |
५० क
वन पर्व
अध्याय
१२७
ऋत्विगु उवाच
ततस्ताः सुमहावीर्याञ्जनय़िष्यन्ति ते सुतान् ||
२० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११०
सञ्जय़ उवाच
ततस्ताञ्शरजालेन संनिवार्य महारथान् |
२४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४
व्यास उवाच
ततस्तानजय़त्सर्वान्प्रातिसीमान्नराधिपान् |
१६ क
वन पर्व
अध्याय
५८
वृहदश्व उवाच
ततस्तानन्तरीय़ेण वाससा समवास्तृणोत् |
१३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
९२
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्तानभिसम्प्रेक्ष्य नारदप्रमुखानृषीन् |
४१ क
सभा पर्व
अध्याय
२५
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्तानव्रवीद्राजन्नर्जुनः पाकशासनिः |
१४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२३
व्राह्मण उवाच
ततस्तानव्रवीद्व्रह्मा समवेतान्प्रजापतिः |
२२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१५
सञ्जय़ उवाच
ततस्तानस्यतः सर्वान्द्रौणेर्वाणान्महात्मनः |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१४९
भीष्म उवाच
ततस्तानाह मनुजान्वरदोऽस्मीति शूलभृत् |
१०७ क
विराट पर्व
अध्याय
५९
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्तानि निकृत्तानि शरजालानि भागशः |
१५ क
वन पर्व
अध्याय
१५३
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्तानि महार्हाणि दिव्यानि भरतर्षभ |
१ क
वन पर्व
अध्याय
१५९
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्तानि शरीराणि गतसत्त्वानि रक्षसाम् |
३३ क
वन पर्व
अध्याय
१७०
अर्जुन उवाच
ततस्तानि सहस्राणि रथानां चित्रय़ोधिनाम् |
३३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२५४
भीष्म उवाच
ततस्तानेव कवय़ः शास्त्रेषु प्रवदन्त्युत |
२७ ख
वन पर्व
अध्याय
१८०
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्तान्परिविश्वस्तान्वसतः पाण्डुनन्दनान् |
२ क
वन पर्व
अध्याय
१५४
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्तान्परिविश्वस्तान्वसतस्तत्र पाण्डवान् |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२६
सञ्जय़ उवाच
ततस्तान्प्राय़शः पार्थो वज्रास्त्रेण निजघ्निवान् ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
८९
भीष्म उवाच
ततस्तान्भेदय़ित्वाथ परस्परविवक्षितान् |
१० क
वन पर्व
अध्याय
१८६
मार्कण्डेय़ उवाच
ततस्तान्यल्पसाराणि सत्त्वानि क्षुधितानि च |
५७ क
वन पर्व
अध्याय
२३३
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्तान्युधि दुर्धर्षः सव्यसाची परन्तपः |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१६५
भीष्म उवाच
ततस्तान्राक्षसेन्द्रश्च द्विजानाह पुनर्वचः |
२२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८७
सञ्जय़ उवाच
ततस्तान्सर्वतो मुक्त्वा सदश्वांश्चतुरो जनाः |
५४ क
वन पर्व
अध्याय
२७०
मार्कण्डेय़ उवाच
ततस्तान्सहसा दीर्णान्दृष्ट्वा वानरपुङ्गवान् |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८१
सञ्जय़ उवाच
ततस्तान्साय़कान्सर्वान्द्रोणमुक्तान्सहस्रशः |
२७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९०
भीष्म उवाच
ततस्तान्सुकृतीन्साङ्ख्यान्सूर्यो वहति रश्मिभिः |
७० क
आदि पर्व
अध्याय
३९
सूत उवाच
ततस्तापसरूपेण प्राहिणोत्स भुजङ्गमान् |
२३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८४
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ताभ्यामनुज्ञातो यय़ौ येन हय़ो गतः ||
१६ ग
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१७
वासुदेव उवाच
ततस्ताभ्यो ददावन्नमोषधीः स्थावराणि च |
१८ क
वन पर्व
अध्याय
२८९
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्तामनवद्याङ्गीं ग्राहय़ामास वै द्विजः |
२० क
वन पर्व
अध्याय
१६४
अर्जुन उवाच
ततस्तामवसं प्रीतो रजनीं तत्र भारत |
१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१७३
भीष्म उवाच
ततस्तामवसद्रात्रिं तापसैः परिवारिता ||
९ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
२५०
नारद उवाच
ततस्तामव्रवीत्तत्र लोकानां प्रभवाप्ययः |
२४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२७
उमो उवाच
ततस्तामव्रवीद्देवः सुभगे श्रूय़तामिति |
५१ क