वन पर्व
अध्याय
८१
पुलस्त्य उवाच
ततश्च पापान्मुक्तस्त्वं कर्मभिस्ते च पातिताः |
३० क
वन पर्व
अध्याय
८१
पुलस्त्य उवाच
ततश्च पापान्मुच्येय़ं युष्माकं तेजसा ह्यहम् |
२७ ख
वन पर्व
अध्याय
१८१
मार्कण्डेय़ उवाच
ततश्च पुनराय़ान्ति सर्वे स्वच्छन्दचारिणः ||
१३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१४९
वैशम्पाय़न उवाच
ततश्च पुनरुत्थाय़ सुखी विश्रान्तवाहनः |
७० क
वन पर्व
अध्याय
२०६
व्याध उवाच
ततश्च प्रतिकुर्वन्ति यदि पश्यन्त्युपक्रमम् |
१८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१८६
भीष्म उवाच
ततश्च प्रतिसंहृत्य तदस्त्रं स्वापनं मृधे |
७ क
वन पर्व
अध्याय
१३
वैशम्पाय़न उवाच
ततश्च प्राद्रवन्सर्वे सह मात्रा यशस्विनः |
९८ क
वन पर्व
अध्याय
१७४
वैशम्पाय़न उवाच
ततश्च यात्वा मरुधन्वपार्श्वं; सदा धनुर्वेदरतिप्रधानाः |
२१ क
वन पर्व
अध्याय
८२
पुलस्त्य उवाच
ततश्च वाहुदां गच्छेद्व्रह्मचारी समाहितः |
६० क
आदि पर्व
अध्याय
८१
वैशम्पाय़न उवाच
ततश्च वाय़ुभक्षोऽभूत्संवत्सरमतन्द्रितः |
१५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६०
भीष्म उवाच
ततश्च व्रह्मभूय़स्त्वमवाप्स्यसि धनानि च |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय
१८४
वैशम्पाय़न उवाच
ततश्च शेषं प्रविभज्य शीघ्र; मर्धं चतुर्णां मम चात्मनश्च ||
५ ख
आदि पर्व
अध्याय
९०
वैशम्पाय़न उवाच
ततश्च हिडिम्वमन्तरा हत्वा एकचक्रां गताः ||
७९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४३
भीष्म उवाच
ततश्चकारावनिमारुतौ च; खं ज्योतिरापश्च तथैव पार्थ ||
३८ ख
आदि पर्व
अध्याय
५३
सूत उवाच
ततश्चकारावभृथं विधिदृष्टेन कर्मणा ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७१
सञ्जय़ उवाच
ततश्चकृषतुर्भीमं तस्य सर्वाय़ुधानि च |
१३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६६
कृष्ण उवाच
ततश्चक्रमपतत्तस्य भूमौ; स विह्वलः समरे सूतपुत्रः |
४२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८४
वैशम्पाय़न उवाच
ततश्चक्रे निषादैः स सङ्ग्रामं रोमहर्षणम् ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
ततश्चक्रे महीग्रस्ते मूर्धानं ते विचेतसः |
२५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१०३
कण्व उवाच
ततश्चक्रे स भगवान्प्रसादं वै गरुत्मतः |
३० क
आदि पर्व
अध्याय
१६९
वसिष्ठ उवाच
ततश्चक्षुर्विय़ुक्तास्ते गिरिदुर्गेषु वभ्रमुः ||
२१ ग
उद्योग पर्व
अध्याय
१८५
भीष्म उवाच
ततश्चचाल पृथिवी सपर्वतवनद्रुमा |
२० क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६३
सञ्जय़ उवाच
ततश्चचाल पृथिवी सपर्वतवनद्रुमा |
४४ क
वन पर्व
अध्याय
४१
वैशम्पाय़न उवाच
ततश्चचाल पृथिवी सपर्वतवनद्रुमा |
२० क
वन पर्व
अध्याय
४०
वैशम्पाय़न उवाच
ततश्चटचटाशव्दः सुघोरः समजाय़त |
४५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२९
भीष्म उवाच
ततश्चतुःशते काले श्रोत्रिय़ो नाम जाय़ते |
१३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७५
वैशम्पाय़न उवाच
ततश्चतुर्थे दिवसे वज्रदत्तो महावलः |
२ क
वन पर्व
अध्याय
११७
वैशम्पाय़न उवाच
ततश्चतुर्दशीं रामः समय़ेन महामनाः |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय
५५
वैशम्पाय़न उवाच
ततश्चतुर्दशे वर्षे याचमानाः स्वकं वसु |
४१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६५
सञ्जय़ उवाच
ततश्चतुर्दिशं सैन्यैर्द्रुपदस्याभिसंवृतः |
१४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५४
वैशम्पाय़न उवाच
ततश्चन्दनकाष्ठैश्च तथा कालेय़कैरपि |
१३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
ततश्चन्द्रार्धविम्वेन शरेण नतपर्वणा |
४० क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
ततश्चर्म च खड्गं च समुत्क्षिप्य महावलः |
७० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६५
भीष्म उवाच
ततश्चर्मण्वती राजन्गोचर्मभ्यः प्रवर्तिता ||
४१ ख
सभा पर्व
अध्याय
२८
वैशम्पाय़न उवाच
ततश्चर्मण्वतीकूले जम्भकस्यात्मजं नृपम् |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
ततश्चर्मण्वतीत्येवं विख्याता सा महानदी ||
११६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५३
वैशम्पाय़न उवाच
ततश्चलवलिर्भीष्मः प्रगृह्य विपुलं भुजम् |
२५ क
वन पर्व
अध्याय
६८
वृहदश्व उवाच
ततश्चानाय़्य तं विप्रं दमय़न्ती युधिष्ठिर |
२० क
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
ततश्चाप्यभिनिर्यात्रा रथाश्वनरदन्तिनाम् |
१४९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६२
सञ्जय़ उवाच
ततश्चाभ्यधिकं भूय़ः पाण्डवैर्धर्मचारिभिः ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०८
भीष्म उवाच
ततश्चारुतरं वाक्यं प्रचक्रामाथ भाषितुम् ||
७७ ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
ततश्चार्घाभिहरणं शिशुपालवधस्ततः |
४१ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३१
वैशम्पाय़न उवाच
ततश्चाश्रममागच्छत्सिद्धचारणसेवितम् |
२० क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२१
व्राह्मण उवाच
ततश्चाहवनीय़स्तु तस्मिन्सङ्क्षिप्यते हविः ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३६
भीष्म उवाच
ततश्चिच्छेद तं तन्तुं मार्जारस्य स मूषकः |
११५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१६७
भीष्म उवाच
ततश्चितां वकपतेः कारय़ामास राक्षसः |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८०
सञ्जय़ उवाच
ततश्चित्राणि शुभ्राणि सुमहान्ति महारथाः |
३० क
शान्ति पर्व
अध्याय
१४४
भीष्म उवाच
ततश्चित्राम्वरधरं भर्तारं सान्वपश्यत |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय
२६३
भीष्म उवाच
ततश्चिन्तां पुनः प्राप्तः कतमद्दैवतं नु तत् |
५ क
वन पर्व
अध्याय
५१
वृहदश्व उवाच
ततश्चिन्तापरा दीना विवर्णवदना कृशा |
२ क