chevron_left  तस्माद्धर्मप्रधानात्माarrow_drop_down
आदि पर्व
अध्याय १६४
गन्धर्व उवाच
तस्माद्धर्मप्रधानात्मा वेदधर्मविदीप्सितः |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय १६१
वैशम्पाय़न उवाच
तस्माद्धर्मप्रधानेन भवितव्यं यतात्मना ||
८ ग
शान्ति पर्व
अध्याय १६१
वैशम्पाय़न उवाच
तस्माद्धर्मप्रधानेन साध्योऽर्थः संय़तात्मना |
२५ क
वन पर्व
अध्याय २
शौनक उवाच
तस्माद्धर्मानिमान्सर्वान्नाभिमानात्समाचरेत् ||
७० ख
कर्ण पर्व
अध्याय २९
सञ्जय़ उवाच
तस्माद्धर्माभिरक्षार्थं नानृतं वक्तुमुत्सहे ||
३८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३०८
भीष्म उवाच
तस्माद्धर्मार्थकामेषु तथा राज्यपरिग्रहे |
५१ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४९
कृष्ण उवाच
तस्माद्धर्मार्थमनृतमुक्त्वा नानृतवाग्भवेत् ||
५५ ग
वन पर्व
अध्याय ३४
वैशम्पाय़न उवाच
तस्माद्धर्मार्थय़ोर्नित्यं न प्रमाद्यन्ति पण्डिताः |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय २६५
भीष्म उवाच
तस्माद्धर्मे प्रवर्तेथाः सर्वावस्थं युधिष्ठिर |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ९४
वामदेव उवाच
तस्माद्धर्मे स्थितो राजा प्रजा धर्मेण पालय़ेत् ||
२३ ख
आदि पर्व
अध्याय २०९
वर्गो उवाच
तस्माद्धर्मेण धर्मज्ञ नास्मान्हिंसितुमर्हसि ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ९६
भीष्म उवाच
तस्माद्धर्मेण योद्धव्यं मनुः स्वाय़म्भुवोऽव्रवीत् |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ९६
भीष्म उवाच
तस्माद्धर्मेण विजय़ं कामं लिप्सेत भूमिपः ||
२१ ग
शान्ति पर्व
अध्याय ६३
भीष्म उवाच
तस्माद्धर्मो विहितो व्राह्मणस्य; दमः शौचं चार्जवं चापि राजन् |
७ क
उद्योग पर्व
अध्याय ४२
सनत्सुजात उवाच
तस्माद्धि किञ्चित्क्षत्रिय़ व्रह्मावसति पश्यति ||
२४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७९
भीष्म उवाच
तस्माद्धि परमं नास्ति यथा प्राहुर्मनीषिणः ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ९१
उतथ्य उवाच
तस्माद्धि राजशार्दूल धर्मः श्रेष्ठ इति स्मृतः |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय ९०
भीष्म उवाच
तस्माद्धेतोर्हि भुञ्जीत मनुष्यानेव मानवः ||
११ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय २७
व्राह्मण उवाच
तस्माद्ध्रस्वतरं नास्ति न ततोऽस्ति वृहत्तरम् |
५ क
आदि पर्व
अध्याय ८९
वैशम्पाय़न उवाच
तस्माद्भरतवंशस्य विप्रतस्थे महद्यशः ||
१६ ख
आदि पर्व
अध्याय ६९
वैशम्पाय़न उवाच
तस्माद्भरस्व दुःषन्त पुत्रं शाकुन्तलं नृप ||
३१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६१
भीष्म उवाच
तस्माद्भव विशालाक्ष यदुवंशविवर्धनः ||
६२ ख
आदि पर्व
अध्याय ७२
कच उवाच
तस्माद्भवत्या यः कामो न तथा स भविष्यति |
१९ क
आदि पर्व
अध्याय ६९
वैशम्पाय़न उवाच
तस्माद्भवत्वय़ं नाम्ना भरतो नाम ते सुतः ||
३३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २८
युधिष्ठिर उवाच
तस्माद्भवन्तं पृच्छामि धर्मं धर्मभृतां वर ||
१ ग
विराट पर्व
अध्याय ३२
विराट उवाच
तस्माद्भवन्तो मत्स्यानामीश्वराः सर्व एव हि ||
३९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४५
अर्जुन उवाच
तस्माद्भवाञ्शीघ्रमितः प्रय़ातु; राज्ञः प्रवृत्त्यै कुरुसत्तमस्य |
५९ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४९
अर्जुन उवाच
तस्माद्भवान्परं धर्मं वेद सर्वं यथातथम् ||
५९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०५
शक्र उवाच
तस्माद्भवान्प्रणतं मानुशास्तु; व्रवीषि यत्तत्करवाणि सर्वम् ||
५६ ख
आदि पर्व
अध्याय ६८
वैशम्पाय़न उवाच
तस्माद्भार्यां नरः पश्येन्मातृवत्पुत्रमातरम् ||
४७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८७
सञ्जय़ उवाच
तस्माद्भीम निवर्तस्व मम चेदिच्छसि प्रिय़म् ||
६८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०२
सञ्जय़ उवाच
तस्माद्भीमं निय़ोक्ष्यामि सात्वतस्य पदानुगम् |
२३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५
धृतराष्ट्र उवाच
तस्माद्भीष्मवधे चैव द्रोणस्य च महात्मनः |
३८ क
भीष्म पर्व
अध्याय १६
सञ्जय़ उवाच
तस्माद्भीष्मो रक्षितव्यो विशेषेणेति मे मतिः |
१६ क
विराट पर्व
अध्याय ३८
वैशम्पाय़न उवाच
तस्माद्भूमिञ्जय़ारोह शमीमेतां पलाशिनीम् |
४ क
आदि पर्व
अध्याय २५
सूत उवाच
तस्माद्भोक्तव्यमपरं भगवन्प्रदिशस्व मे |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय १०७
भीष्म उवाच
तस्माद्भोजय़ितव्यश्च भोक्तव्यश्च परो जनः ||
१७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २९
सञ्जय़ उवाच
तस्माद्भय़ं न मे पार्थान्नापि चैव जनार्दनात् |
३० क
द्रोण पर्व
अध्याय २३
धृतराष्ट्र उवाच
तस्माद्भय़ं नो भूय़िष्ठं भ्रातृव्याच्च विशेषतः ||
१८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ८४
देवा ऊचुः
तस्माद्भय़ं समुत्पन्नमस्माकं वै पितामह |
२ क
आदि पर्व
अध्याय १८९
व्यास उवाच
तस्माद्भय़ादुद्विजन्तः सुखेप्सवः; प्रय़ाम सर्वे शरणं भवन्तम् ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय १८५
मार्कण्डेय़ उवाच
तस्माद्भय़ौघान्महतो मज्जन्तं मां विशेषतः |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय १२१
भीष्म उवाच
तस्माद्यः सहितो दृष्टो भर्तृप्रत्ययलक्षणः ||
४८ ग
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९४
जनमेजय़ उवाच
तस्माद्यज्ञफलैस्तुल्यं न किञ्चिदिह विद्यते |
२ क
स्त्री पर्व
अध्याय ११
वैशम्पाय़न उवाच
तस्माद्यत्कृतमस्माभिर्मन्यमानैः क्षमं प्रति |
३० क
विराट पर्व
अध्याय २६
वैशम्पाय़न उवाच
तस्माद्यत्नात्प्रतीक्षन्ते कालस्योदय़मागतम् |
६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ४०
भीष्म उवाच
तस्माद्यत्नेन भार्याय़ा रक्षणं स चकार ह ||
१९ ख
विराट पर्व
अध्याय ४७
भीष्म उवाच
तस्माद्यदत्र कल्याणं लोके सद्भिरनुष्ठितम् |
११ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय १६
व्यास उवाच
तस्माद्यद्देवकीपुत्र उक्तवानुत्तमं वचः |
१७ क
उद्योग पर्व
अध्याय ७६
अर्जुन उवाच
तस्माद्यन्मन्यसे युक्तं पाण्डवानां च यद्धितम् |
२० क