शान्ति पर्व
अध्याय
३०७
भीष्म उवाच
तपसा वाथ वुद्ध्या वा कर्मणा वा श्रुतेन वा ||
५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३२
उमो उवाच
तपसा वापि देवेश केनाय़ुर्लभते महत् ||
४१ ख
आदि पर्व
अध्याय
२६
वृहस्पतिरु उवाच
तपसा वालखिल्यानां भूतमुत्पन्नमद्भुतम् ||
३५ ख
आदि पर्व
अध्याय
२७
सूत उवाच
तपसा वालखिल्यानां मम सङ्कल्पजौ तथा |
२७ क
आदि पर्व
अध्याय
२७
शौनक उवाच
तपसा वालखिल्यानां सम्भूतो गरुडः कथम् ||
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
९
युधिष्ठिर उवाच
तपसा विधिदृष्टेन शरीरमुपशोषय़न् ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३६
वैशम्पाय़न उवाच
तपसा वै सुतप्तेन दमेन निय़मेन च ||
१८ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३९
वैशम्पाय़न उवाच
तपसा वै सुतप्तेन व्राह्मणत्वमवाप्तवान् ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०७
युधिष्ठिर उवाच
तपसा व्रह्मचर्येण जपैर्होमैस्तथौषधैः |
३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२७
सिद्ध उवाच
तपसा व्रह्मचर्येण यज्ञैस्त्यागेन वा पुनः |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
७
वैशम्पाय़न उवाच
तपसा व्रह्मचर्येण वन्दनेन तितिक्षय़ा ||
१३ ख
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
तपसा व्रह्मचर्येण व्यस्य वेदं सनातनम् |
५२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
७९
भीष्म उवाच
तपसा व्रह्मचर्येण शस्त्रेण च वलेन च |
२० क
द्रोण पर्व
अध्याय
५४
सञ्जय़ उवाच
तपसा व्रह्मचर्येण श्रुतेन प्रज्ञय़ापि च |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०
वासुदेव उवाच
तपसा व्रह्मचर्येण सत्येन च दमेन च |
२६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
वासुदेव उवाच
तपसा व्रह्मचर्येण सत्येन च दमेन च |
५० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२३१
शुक उवाच
तपसा व्रह्मचर्येण सर्वत्यागेन मेधय़ा |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१७
युधिष्ठिर उवाच
तपसा व्रह्मचर्येण स्वाध्याय़ेन च पाविताः |
१५ क
वन पर्व
अध्याय
१४१
लोमश उवाच
तपसा शक्यते गन्तुं पर्वतो गन्धमादनः |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१५५
भीष्म उवाच
तपसा शक्यते प्राप्तुं देवत्वमपि निश्चय़ात् ||
१३ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२३
कुन्त्यु उवाच
तपसा शोषय़िष्यामि युधिष्ठिर कलेवरम् ||
२० ख
आदि पर्व
अध्याय
६८
वैशम्पाय़न उवाच
तपसा सम्भृतं तेजो धारय़ामास वै तदा ||
२२ ख
वन पर्व
अध्याय
२
शौनक उवाच
तपसा सिद्धिमन्विच्छ द्विजानां भरणाय़ वै ||
७८ ख
वन पर्व
अध्याय
२
शौनक उवाच
तपसा सिद्धिमन्विच्छ योगसिद्धिं च भारत ||
७७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५०
वैशम्पाय़न उवाच
तपसा हि भवाञ्शक्तः स्रष्टुं लोकांश्चराचरान् ||
२९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
५४
भीष्म उवाच
तपसा हि सुतप्तेन क्रीडत्येष तपोधनः ||
२६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२७
व्यास उवाच
तपसां तेजसां चैव पतय़े यशसोऽपि च |
९४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३४
वैशम्पाय़न उवाच
तपसां निधिः सुमहतां महतो; यशसश्च भाजनमरिष्टकहा |
१४ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१७
वासुदेव उवाच
तपसाधिगतं चान्नं प्रजार्थं मे पितामह |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३१
जनमेजय़ उवाच
तपसापि न दृश्यो हि भगवाँल्लोकपूजितः |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१४९
गृध्र उवाच
तपसापि हि संय़ुक्तो न काले नोपहन्यते |
६७ क
आदि पर्व
अध्याय
१६३
गन्धर्व उवाच
तपसाराध्य वरदं देवं गोपतिमीश्वरम् |
९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८७
भीष्म उवाच
तपसे धृतसङ्कल्पा मम चिन्तय़ती वधम् ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२६३
भीष्म उवाच
तपसे मतिमाधत्त व्राह्मणस्य यशस्विनः ||
२२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२३
भीष्म उवाच
तपसैव चापनुदेद्यच्चान्यदपि दुष्कृतम् ||
५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५०
व्रह्मो उवाच
तपसैव प्रसिध्यन्ति तपोमूलं हि साधनम् ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१५५
भीष्म उवाच
तपसैव सुतप्तेन नरः पापाद्विमुच्यते ||
६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५०
व्रह्मो उवाच
तपसैव सुतप्तेन मुच्यन्ते किल्विषात्ततः ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१५५
भीष्म उवाच
तपसैव हि सिध्यन्ति तपोमूलं हि साधनम् ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२७६
नारद उवाच
तपसैवेह वहुलं श्रेय़ो व्यक्तं भविष्यति ||
५८ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२७
वैशम्पाय़न उवाच
तपसो दुश्चरस्यास्य यदय़ं तप्यते नृपः ||
९ ख
आदि पर्व
अध्याय
२७
सूत उवाच
तपसो नः फलेनाद्य दारुणः सम्भवत्विति ||
१४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
११९
नारद उवाच
तपसो मेऽष्टभागेन स्वर्गमारोहतां भवान् ||
२८ ख
वन पर्व
अध्याय
११०
लोमश उवाच
तपसो यः प्रभावेन वर्षय़ामास वासवम् |
३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०६
युधिष्ठिर उवाच
तपसो यत्परं तेऽद्य तन्मे व्याख्यातुमर्हसि ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१५५
भीष्म उवाच
तपसो वहुरूपस्य तैस्तैर्द्वारैः प्रवर्ततः |
७ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४४
वैशम्पाय़न उवाच
तपसो हि परं नास्ति तपसा विन्दते महत् ||
२९ ख
वन पर्व
अध्याय
८९
वैशम्पाय़न उवाच
तपसो हि परं नास्ति तपसा विन्दते महत् ||
१८ ख
वन पर्व
अध्याय
२४५
वैशम्पाय़न उवाच
तपसो हि परं नास्ति तपसा विन्दते महत् |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१५५
भीष्म उवाच
तपसो ह्यानुपूर्व्येण फलमूलानिलाशनाः |
३ क