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आदि पर्व
अध्याय १२४
वैशम्पाय़न उवाच
तथा तथा विधानाय़ स्वय़माज्ञापय़स्व माम् ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १६८
भीष्म उवाच
तथा तथा विरागोऽत्र जाय़ते नात्र संशय़ः ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २८५
पराशर उवाच
तथा तथा सुखं प्राप्य प्रेत्य चेह च शेरते ||
३० ख
वन पर्व
अध्याय ५७
वृहदश्व उवाच
तथा तथास्य द्यूते वै रागो भूय़ोऽभिवर्धते ||
१३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ३५
विदुर उवाच
तथा तथास्य सर्वार्थाः सिध्यन्ते नात्र संशय़ः ||
३४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १९४
मनुरु उवाच
तथा तथाय़ं गुणसम्प्रय़ुक्तः; शुभाशुभं कर्मफलं भुनक्ति ||
२० ख
उद्योग पर्व
अध्याय ७२
भीमसेन उवाच
तथा तथैव भाषेथा मा स्म युद्धेन भीषय़ेः ||
१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५६
सञ्जय़ उवाच
तथा तथोद्देशमुपेत्य तस्थुः; पाञ्चालमुख्यैः सह चेदिमुख्याः ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ४६
वैशम्पाय़न उवाच
तथा तदनभिध्येय़ं वाक्यं यादवनन्दन ||
२७ ख
वन पर्व
अध्याय ५६
वृहदश्व उवाच
तथा तदभवद्द्यूतं पुष्करस्य नलस्य च |
१८ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३६
सञ्जय़ उवाच
तथा तदभवद्युद्धं घोररूपं भय़ानकम् |
२९ क
वन पर्व
अध्याय २१
वासुदेव उवाच
तथा तदभवद्युद्धं तुमुलं लोमहर्षणम् |
३८ क
उद्योग पर्व
अध्याय १३५
कुन्त्यु उवाच
तथा तदस्तु दाशार्ह यथा वागभ्यभाषत ||
६ ग
द्रोण पर्व
अध्याय १७०
सञ्जय़ उवाच
तथा तदस्त्रं पाण्डूनां ददाह ध्वजिनीं प्रभो ||
२३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ४८
सञ्जय़ उवाच
तथा तदाय़ोधनमुग्रदर्शनं; निशामुखे पितृपतिराष्ट्रसंनिभम् |
५२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ६२
भीष्म उवाच
तथा तद्भवितेत्युक्त्वा तत्रैवान्तरधीय़त ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३०६
विश्वावसुरु उवाच
तथा तन्न तथा वेति तद्भवान्वक्तुमर्हति ||
५६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ४६
वैशम्पाय़न उवाच
तथा तन्नात्र सन्देहो विद्यते मम मानद ||
२५ ख
वन पर्व
अध्याय ६२
वृहदश्व उवाच
तथा तन्निहतं सर्वं समृद्धं सार्थमण्डलम् ||
१० ग
आदि पर्व
अध्याय १५५
व्राह्मण उवाच
तथा तन्मिथुनं जज्ञे द्रुपदस्य महामखे ||
५० ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४६
युधिष्ठिर उवाच
तथा तपस्विनस्तस्य राजर्षेः कौरवस्य ह |
१४ क
उद्योग पर्व
अध्याय ६२
विदुर उवाच
तथा तमनुधावन्तं मृगय़ुं शकुनार्थिनम् |
९ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८८
सञ्जय़ उवाच
तथा तमनुधावन्तं युय़ुधानस्य पृष्ठतः |
५६ क
शल्य पर्व
अध्याय १६
सञ्जय़ उवाच
तथा तमरिसैन्यानि घ्नन्तं मृत्युमिवान्तकम् |
६ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५७
सञ्जय़ उवाच
तथा तमात्मजं युद्धे विक्रमन्तमरिन्दमम् |
४ क
वन पर्व
अध्याय १६०
वैशम्पाय़न उवाच
तथा तमिस्रहा देवो मय़ूखैर्भावय़ञ्जगत् |
२९ क
वन पर्व
अध्याय २४६
व्यास उवाच
तथा तमुञ्छधर्माणं दुर्वासा मुनिसत्तमम् |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय १८३
भृगुरु उवाच
तथा तमोभिभूतानां भूतानां भ्रश्यते सुखम् ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय ४३
वैशम्पाय़न उवाच
तथा तर्कय़तस्तस्य फल्गुनस्याथ मातलिः |
१० क
द्रोण पर्व
अध्याय १२
अर्जुन उवाच
तथा तव परित्यागो न मे राजंश्चिकीर्षितः ||
७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५८
सञ्जय़ उवाच
तथा तव महत्सैन्यं प्रास्फुरच्छरपीडितम् ||
१६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२८
सञ्जय़ उवाच
तथा तव सुतं मध्ये प्रतपन्तं शरोर्मिभिः ||
१५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८७
सञ्जय़ उवाच
तथा तवापि वचनं विशिष्टतरमेव मे ||
७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ३३
अर्जुन उवाच
तथा तवामी नरलोकवीरा; विशन्ति वक्त्राण्यभिविज्वलन्ति ||
२८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३८
सञ्जय़ उवाच
तथा तवासीद्ध्वजिनी प्रदीप्ता; महाभय़े भारत भीमरूपा ||
२३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७२
सञ्जय़ उवाच
तथा तस्मिन्प्रवृत्ते तु सङ्ग्रामे लोमहर्षणे |
१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८६
वैशम्पाय़न उवाच
तथा तस्मिन्महाय़ज्ञे धर्मराजस्य धीमतः |
२२ क
शल्य पर्व
अध्याय ५६
सञ्जय़ उवाच
तथा तस्मिन्महाय़ुद्धे वर्तमाने सुदारुणे |
५ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७५
सञ्जय़ उवाच
तथा तस्मिन्वर्तमाने दुष्कर्णो भ्रातुरन्तिके |
४३ क
शल्य पर्व
अध्याय ५६
सञ्जय़ उवाच
तथा तस्मिन्वर्तमाने सङ्कुले तुमुले भृशम् |
६ क
कर्ण पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
तथा तस्मिन्वले शूरैर्वध्यमाने हतेऽपि च |
१३ क
कर्ण पर्व
अध्याय २७
सञ्जय़ उवाच
तथा तस्मै पुनर्दद्यां स्त्रीणां शतमलङ्कृतम् |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय १०५
मुनिरु उवाच
तथा तस्येहमानस्य समारम्भो विनश्यति ||
३९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २५३
भीष्म उवाच
तथा तानभिसंवृद्धान्दृष्ट्वा चाप्नुवतां मुदम् |
३१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४०
भीष्म उवाच
तथा तान्दुःखिताञ्जानन्नानृशंस्यपरो मुनिः |
२२ क
सभा पर्व
अध्याय ६१
वैशम्पाय़न उवाच
तथा तान्दुःखितान्दृष्ट्वा पाण्डवान्धृतराष्ट्रजः |
११ क
वन पर्व
अध्याय २७१
मार्कण्डेय़ उवाच
तथा तान्द्रवतो योधान्दृष्ट्वा तौ दूषणानुजौ |
१९ क
शल्य पर्व
अध्याय ५६
सञ्जय़ उवाच
तथा तु चरतस्तस्य भीमस्य रणमूर्धनि |
२३ क
सभा पर्व
अध्याय १३
श्रीकृष्ण उवाच
तथा तु डिभकं श्रुत्वा हंसः परपुरञ्जय़ः |
४२ क
वन पर्व
अध्याय १६१
वैशम्पाय़न उवाच
तथा तु तं चिन्तय़तां सिताश्व; मस्त्रार्थिनं वासवमभ्युपेतम् |
१६ क