भीष्म पर्व
अध्याय
८६
सञ्जय़ उवाच
जघ्नुस्ते वै परानीकं दुर्जय़ं समरे परैः ||
२९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३११
भीष्म उवाच
जङ्गमं स्थावरं चैव प्रहृष्टमभवज्जगत् ||
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१७२
भीष्म उवाच
जङ्गमस्थावराणां च भूतानामसुराधिप |
१५ क
वन पर्व
अध्याय
३३
द्रौपद्यु उवाच
जङ्गमाः कर्मणा वृत्तिमाप्नुवन्ति युधिष्ठिर ||
४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१
भीष्म उवाच
जङ्गमाः स्थावराश्चैव दिवि वा यदि वा भुवि |
४६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८६
सञ्जय़ उवाच
जङ्गमाः स्थावरैः सार्धं नालं पार्थस्य संय़ुगे |
३१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९०
भीष्म उवाच
जङ्गमागमसञ्ज्ञानि जङ्गमं तु विशिष्यते ||
१०२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
जङ्गमाजङ्गमं चेदं जगन्नाराय़णोद्भवम् ||
१३८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
देवा ऊचुः
जङ्गमाजङ्गमं राजञ्शुशुभेऽद्भुतदर्शनम् ||
९० ख
आदि पर्व
अध्याय
११०
पाण्डुरु उवाच
जङ्गमाजङ्गमं सर्वमविहिंसंश्चतुर्विधम् |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१४९
गृध्र उवाच
जङ्गमाजङ्गमानां चाप्याय़ुरग्रेऽवतिष्ठते ||
५२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
९
युधिष्ठिर उवाच
जङ्गमाजङ्गमान्सर्वान्नविहिंसंश्चतुर्विधान् |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५९
भीष्म उवाच
जङ्गमाजङ्गमाश्चोक्ताश्चूर्णय़ोगा विषादय़ः ||
४२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१७७
भृगुरु उवाच
जङ्गमानां च सर्वेषां शरीरे पञ्च धातवः |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१८०
भृगुरु उवाच
जङ्गमानां हि सर्वेषां स्थावराणां तथैव च |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२८६
पराशर उवाच
जङ्गमानामपि तथा द्विपदाः परमा मताः |
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१८१
भरद्वाज उवाच
जङ्गमानामसङ्ख्येय़ाः स्थावराणां च जातय़ः |
९ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१७
वासुदेव उवाच
जङ्गमानि च भूतानि दुर्वलानि वलीय़साम् ||
१८ ख
वन पर्व
अध्याय
१७२
वैशम्पाय़न उवाच
जङ्गमानि च भूतानि सर्वाण्येवावतस्थिरे ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय
३३
द्रौपद्यु उवाच
जङ्गमेषु विशेषेण मनुष्या भरतर्षभ |
५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१३
वासुदेव उवाच
जङ्गमेष्विव कर्मात्मा पुनः प्रादुर्भवाम्यहम् ||
१३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९४
वैशम्पाय़न उवाच
जङ्गमैः स्थावरैर्वापि यष्टव्यमिति भारत ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०५
याज्ञवल्क्य उवाच
जङ्घाभ्यां तु वसून्देवानाप्नुय़ादिति नः श्रुतम् |
२ क
सभा पर्व
अध्याय
४
वैशम्पाय़न उवाच
जङ्घावन्धुश्च रैभ्यश्च कोपवेगश्रवा भृगुः |
१४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१३५
वैशम्पाय़न उवाच
जजल्पुर्महदाश्चर्यं केशवे परमाद्भुतम् ||
२५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
जजाप जप्यं कौन्तेय़ः सतां मार्गमनुष्ठितः |
१२ क
वन पर्व
अध्याय
४३
वैशम्पाय़न उवाच
जजाप जप्यं कौन्तेय़ो विधिवत्कुरुनन्दनः ||
२० ख
आदि पर्व
अध्याय
११४
वैशम्पाय़न उवाच
जजाप जप्यं विधिवद्दत्तं दुर्वाससा पुरा ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३२
वैशम्पाय़न उवाच
जजाप विधिवन्मन्त्रान्नाराय़णगतान्वहून् |
२५ क
आदि पर्व
अध्याय
५७
वैशम्पाय़न उवाच
जज्ञाते रूपसम्पन्नावश्विभ्यां तु यमावुभौ |
९८ क
आदि पर्व
अध्याय
१००
वैशम्पाय़न उवाच
जज्ञिरे देवगर्भाभाः कुरुवंशविवर्धनाः ||
३० ख
आदि पर्व
अध्याय
६०
वैशम्पाय़न उवाच
जज्ञिरे नृपशार्दूल लोकानां प्रभवस्तु सः ||
३३ ख
आदि पर्व
अध्याय
५८
वैशम्पाय़न उवाच
जज्ञिरे भुवि भूतेषु तेषु तेष्वसुरा विभो ||
२७ ख
आदि पर्व
अध्याय
५९
वैशम्पाय़न उवाच
जज्ञिरे राजशार्दूल यथाकामं दिवौकसः ||
४ ख
आदि पर्व
अध्याय
६१
वैशम्पाय़न उवाच
जज्ञिरे राजशार्दूल शार्दूलसमविक्रमाः ||
४५ ख
आदि पर्व
अध्याय
६१
वैशम्पाय़न उवाच
जज्ञिरे वसवस्त्वष्टौ गङ्गाय़ां शन्तनोः सुताः |
६८ क
आदि पर्व
अध्याय
६१
वैशम्पाय़न उवाच
जज्ञिरे वसुदेवस्य कुले कुलविवर्धनाः ||
९२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
जज्ञिरे सिंहनादाश्च शूराणां प्रतिगर्जताम् ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३९
वैशम्पाय़न उवाच
जज्ञुश्चैव महात्मानस्ततस्तं ज्ञानचक्षुषा |
३२ क
आदि पर्व
अध्याय
१०७
वैशम्पाय़न उवाच
जज्ञे क्रमेण चैतेन तेषां दुर्योधनो नृपः |
२४ क
शल्य पर्व
अध्याय
५७
वासुदेव उवाच
जज्ञे घोरतमः शव्दो वहूनां सर्वतोदिशम् ||
५० ख
आदि पर्व
अध्याय
५७
वैशम्पाय़न उवाच
जज्ञे च यमुनाद्वीपे पाराशर्यः स वीर्यवान् ||
६९ ग
शल्य पर्व
अध्याय
४१
वैशम्पाय़न उवाच
जज्ञे चैनं महावीर्यं महाकोपं च भामिनी ||
१३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६५
वैशम्पाय़न उवाच
जज्ञे तव पिता राजन्परिक्षित्परवीरहा ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१६०
वैशम्पाय़न उवाच
जज्ञे तात तथा सर्वं जगत्स्थावरजङ्गमम् ||
२० ख
वन पर्व
अध्याय
२१०
मार्कण्डेय़ उवाच
जज्ञे तेजोमय़ोऽर्चिष्मान्पञ्चवर्णः प्रभावनः ||
३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१४९
वैशम्पाय़न उवाच
जज्ञे द्रोणविनाशाय़ सत्यवादी जितेन्द्रिय़ः ||
२४ ख
वन पर्व
अध्याय
८७
धौम्य उवाच
जज्ञे धनपतिर्यत्र कुवेरो नरवाहनः ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय
१०७
वैशम्पाय़न उवाच
जज्ञे धीमांस्ततस्तस्यां युय़ुत्सुः करणो नृप ||
३६ ख
वन पर्व
अध्याय
१२८
लोमश उवाच
जज्ञे पुत्रशतं पूर्णं तासु सर्वासु भारत ||
६ ख