आदि पर्व
अध्याय
५८
वैशम्पाय़न उवाच
गोष्वश्वेषु च राजेन्द्र खरोष्ट्रमहिषेषु च |
२८ क
विराट पर्व
अध्याय
६६
अर्जुन उवाच
गोसङ्ख्यः सहदेवश्च माद्रीपुत्रौ महारथौ ||
६ ख
विराट पर्व
अध्याय
३
सहदेव उवाच
गोसङ्ख्याता भविष्यामि विराटस्य महीपतेः |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३६
व्यास उवाच
गोसहस्रं सवत्सानां दोग्ध्रीणां प्राणसंशय़े |
१० क
द्रोण पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
गोसहस्रप्रदातॄणां क्रतुदानां च या गतिः |
२३ क
वन पर्व
अध्याय
८०
पुलस्त्य उवाच
गोसहस्रफलं चैव प्राप्नुय़ाद्भरतर्षभ ||
१२२ ख
वन पर्व
अध्याय
८३
पुलस्त्य उवाच
गोसहस्रफलं तत्र स्नातमात्रस्य भारत ||
३८ ख
वन पर्व
अध्याय
८२
पुलस्त्य उवाच
गोसहस्रफलं पुण्यं प्राप्नोति भरतर्षभ ||
६७ ग
वन पर्व
अध्याय
८०
पुलस्त्य उवाच
गोसहस्रफलं प्राप्य स्वर्गलोके महीय़ते |
७९ ख
वन पर्व
अध्याय
८३
पुलस्त्य उवाच
गोसहस्रफलं लव्ध्वा पुनाति च कुलं नरः ||
७ ख
वन पर्व
अध्याय
८२
पुलस्त्य उवाच
गोसहस्रफलं विन्देत्कुलं चैव समुद्धरेत् ||
३७ ग
वन पर्व
अध्याय
८२
पुलस्त्य उवाच
गोसहस्रफलं विन्देत्तेजस्वी च भवेन्नरः ||
६८ ग
वन पर्व
अध्याय
८३
पुलस्त्य उवाच
गोसहस्रफलं विन्देत्स्वर्गलोकं च गच्छति ||
३२ ख
वन पर्व
अध्याय
८३
पुलस्त्य उवाच
गोसहस्रफलं विन्द्यात्कुलं चैव समुद्धरेत् ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय
८२
पुलस्त्य उवाच
गोसहस्रमवाप्नोति स्वर्गलोकं च गच्छति ||
३६ ख
वन पर्व
अध्याय
८१
पुलस्त्य उवाच
गोसहस्रस्य राजेन्द्र फलं प्राप्नोति मानवः ||
७४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
९९
भीष्म उवाच
गोसहस्रस्य स प्रेत्य लभते फलमुत्तमम् ||
११ ख
विराट पर्व
अध्याय
६७
वैशम्पाय़न उवाच
गोसहस्राणि रत्नानि वस्त्राणि विविधानि च |
३७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
७२
व्रह्मो उवाच
गोसहस्रेण समिता तस्य धेनुर्भवत्युत ||
२२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
गोहितो गोपतिर्गोप्ता वृषभाक्षो वृषप्रिय़ः ||
७६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६४
वैशम्पाय़न उवाच
गोय़ुते गोय़ुते चैव न्यवसत्पुरुषर्षभः ||
१९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६८
सञ्जय़ उवाच
गोय़ोनिप्रभवा म्लेच्छाः कालकल्पाः प्रहारिणः |
४२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९५
पशुसख उवाच
गौणं पशुसखेत्येवं विद्धि मामग्निसम्भवे ||
४३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२८
श्रीभगवानु उवाच
गौणानि तत्र नामानि कर्मजानि च कानिचित् |
१० क
भीष्म पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
गौतमं केकय़ः क्रुद्धः शरवृष्ट्याभ्यपूरय़त् |
५० क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०९
सञ्जय़ उवाच
गौतमं ताडय़ामास शरैर्वहुभिराहवे ||
१२ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
१४४
सञ्जय़ उवाच
गौतमं द्रुतमाय़ान्तं द्रोणान्तिकमरिन्दमम् |
१६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७९
सञ्जय़ उवाच
गौतमं पञ्चविंशत्या शैन्धवं च शतेन ह |
३१ क
शल्य पर्व
अध्याय
७
सञ्जय़ उवाच
गौतमं भीमसेनो वै सोमकाश्च महारथाः |
३१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३८
सञ्जय़ उवाच
गौतमं समरे त्यक्त्वा दुद्रुवुस्ते दिशो दश ||
३० ख
सभा पर्व
अध्याय
१९
वासुदेव उवाच
गौतमः क्षय़णादस्मादथासौ तत्र वेश्मनि |
६ क
शल्य पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
गौतमः पुनराचार्यो धृष्टद्युम्नमय़ोधय़त् |
३९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१६६
भीष्म उवाच
गौतमः स गतस्तत्र तेनोद्विग्नं मनो मम |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय
१६२
भीष्म उवाच
गौतमः संनिकर्षेण दस्युभिः समतामिय़ात् ||
३६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२०१
भीष्म उवाच
गौतमः सभरद्वाजो विश्वामित्रोऽथ कौशिकः ||
३१ ख
सभा पर्व
अध्याय
१९
वासुदेव उवाच
गौतमक्षय़मभ्येत्य रमन्ते स्म पुरार्जुन ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१६२
भीष्म उवाच
गौतमश्चापि सम्प्राप्तस्तावन्योन्येन सङ्गतौ ||
४१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१६७
भीष्म उवाच
गौतमश्चापि सम्प्राप्य पुनस्तं शवरालय़म् |
१६ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३८
सञ्जय़ उवाच
गौतमस्तु ततः क्रुद्धो धनुर्गृह्य नवं दृढम् |
२६ क
शल्य पर्व
अध्याय
२१
सञ्जय़ उवाच
गौतमस्तु रणे क्रुद्धो द्रौपदेय़ान्महावलान् |
३२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२५८
भीष्म उवाच
गौतमस्तु सुतं दृष्ट्वा शिरसा पतितं भुवि |
५८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५५
अहल्यो उवाच
गौतमस्त्वव्रवीत्पत्नीमुत्तङ्को नाद्य दृश्यते |
३२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५५
वैशम्पाय़न उवाच
गौतमस्त्वव्रवीद्विप्रमुत्तङ्कं प्रीतमानसः |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२७
भीष्म उवाच
गौतमस्य च संवादं यमस्य च महात्मनः ||
२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५५
वैशम्पाय़न उवाच
गौतमस्य तु शिष्याणां वहूनां जनमेजय़ |
४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१६३
भीष्म उवाच
गौतमस्य महर्षेर्य आचार्यस्य शरद्वतः |
२१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०५
भीष्म उवाच
गौतमस्य मुनेस्तात संवादं वासवस्य च ||
३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८०
सञ्जय़ उवाच
गौतमस्य वधाकाङ्क्षी वृत्रस्येव पुरन्दरः ||
२५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
गौतमस्य वपुर्दृष्ट्वा धृष्टद्युम्नरथं प्रति |
४३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८०
सञ्जय़ उवाच
गौतमस्य हय़ान्हत्वा सारथिं च न्यपातय़त् ||
२३ ग