chevron_left  कथमुत्सृष्टवान्देहंarrow_drop_down
शान्ति पर्व
अध्याय ४७
जनमेजय़ उवाच
कथमुत्सृष्टवान्देहं कं च योगमधारय़त् ||
१ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३१
सञ्जय़ उवाच
कथमेकः पदातिः सन्नशस्त्रो योद्धुमुत्सहे ||
१० ख
आदि पर्व
अध्याय १८८
वैशम्पाय़न उवाच
कथमेका वहूनां स्यान्न च स्याद्धर्मसङ्करः |
५ क
वन पर्व
अध्याय ५९
वृहदश्व उवाच
कथमेका सती भैमी मय़ा विरहिता शुभा |
२१ क
उद्योग पर्व
अध्याय ६२
दुर्योधन उवाच
कथमेकान्ततस्तेषां पार्थानां मन्यसे जय़म् ||
१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २८
सञ्जय़ उवाच
कथमेकेन पातेन हंसः पातशतं जय़ेत् ||
३० ख
शान्ति पर्व
अध्याय ५९
वैशम्पाय़न उवाच
कथमेको महीं कृत्स्नां वीरशूरार्यसङ्कुलाम् |
९ क
शल्य पर्व
अध्याय ६४
सञ्जय़ उवाच
कथमेकोऽद्य राजेन्द्र तिष्ठसे निर्जने वने ||
१३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०१
युधिष्ठिर उवाच
कथमेतत्समुत्पन्नं फलं चात्र व्रवीहि मे ||
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २३४
शुक उवाच
कथमेतद्विजानीय़ां तच्च व्याख्यातुमर्हसि ||
३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय २६
अर्जुन उवाच
कथमेतद्विजानीय़ां त्वमादौ प्रोक्तवानिति ||
४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १९
व्राह्मण उवाच
कथमेतानि सर्वाणि शरीराणि शरीरिणाम् |
३८ क
उद्योग पर्व
अध्याय ४१
धृतराष्ट्र उवाच
कथमेतेन देहेन स्यादिहैव समागमः ||
७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ६७
धृतराष्ट्र उवाच
कथमेनं न वेदाहं तन्ममाचक्ष्व सञ्जय़ ||
१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४६
सञ्जय़ उवाच
कथमेनं महात्मानं शक्ष्यामः प्रतिवीक्षितुम् |
५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९३
श्वशुर उवाच
कथमेवंविधं मे स्यादन्यत्पार्श्वमिति द्विजाः |
८६ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४६
युधिष्ठिर उवाच
कथमेवंविधो मृत्युः प्रशास्य पृथिवीमिमाम् ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७४
युधिष्ठिर उवाच
कथमेष महाप्राज्ञ ज्वरः प्रादुरभूत्कुतः |
३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०२
अगस्त्य उवाच
कथमेष मय़ा शक्यः शप्तुं यस्य महामुने |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय ५९
वैशम्पाय़न उवाच
कथमेष समुत्पन्नस्तन्मे व्रूहि पितामह ||
५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ५२
युधिष्ठिर उवाच
कथमेष समुत्पन्नो रामः सत्यपराक्रमः |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३०
धृतराष्ट्र उवाच
कथमेषां तदा तत्र पार्थानामपलाय़िनाम् |
१० क
अनुशासन पर्व
अध्याय ५५
कुशिक उवाच
कथमेष्यति विप्रत्वं कुलं मे भृगुनन्दन |
३५ ख
वन पर्व
अध्याय १३२
युधिष्ठिर उवाच
कथम्प्रभावः स वभूव विप्र; स्तथाय़ुक्तं यो निजग्राह वन्दिम् |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय २८९
भीष्म उवाच
कथा च येय़ं नृपते प्रसक्ता; देवे महावीर्यमतौ शुभेय़म् |
६२ क
विराट पर्व
अध्याय ४२
वैशम्पाय़न उवाच
कथा विचित्राः कुर्वाणाः पण्डितास्तत्र शोभनाः ||
२७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३४०
भीष्म उवाच
कथां कथितवान्पृष्टस्तथा त्वमपि मे शृणु ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ९
भीष्म उवाच
कथां कथय़तः पुण्यां धर्मज्ञस्य पुरातनीम् ||
१३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ९
भीष्म उवाच
कथां कथय़तः पूर्वं व्राह्मणं प्रति पाण्डव ||
१४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६२
भीष्म उवाच
कथां तां व्रह्मणा गीतां श्रुत्वा प्रीता दिवं यय़ुः ||
२५ ख
आदि पर्व
अध्याय ५६
जनमेजय़ उवाच
कथां त्वनघ चित्रार्थामिमां कथय़ति त्वय़ि |
२ क
वन पर्व
अध्याय १९२
वैशम्पाय़न उवाच
कथां वेत्सि मुने दिव्यां मनुष्योरगरक्षसाम् |
३ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
कथाः कुर्वन्पुराणर्षिर्देवर्षिनृपरक्षसाम् ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय ९३
वैशम्पाय़न उवाच
कथाः प्रचक्रिरे पुण्याः सदसिस्था महात्मनाम् ||
१५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
कथान्तमासाद्य च माधवेन; सङ्घट्टिताः पाण्डवकार्यहेतोः |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय १६०
वैशम्पाय़न उवाच
कथान्तरमथासाद्य खड्गय़ुद्धविशारदः |
१ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २६
वैशम्पाय़न उवाच
कथान्तरे तु कस्मिंश्चिद्देवर्षिर्नारदस्तदा |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३७
वैशम्पाय़न उवाच
कथान्तरेऽथ कस्मिंश्चित्पृष्टोऽस्माभिर्द्विजोत्तमः |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय १७६
वैशम्पाय़न उवाच
कथान्ते चाभ्यनुज्ञाताः प्रय़युर्द्रुपदक्षय़म् ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय ८२
वैशम्पाय़न उवाच
कथान्ते तत्र शक्रेण पृष्टः स पृथिवीपतिः ||
३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २७
वैशम्पाय़न उवाच
कथान्ते शिरसा पादौ स्पृष्ट्वा भीष्मस्य पाण्डवः |
१७ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १५
वैशम्पाय़न उवाच
कथाभिः शमय़ामास पार्थं शौरिर्जनार्दनः ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय २२४
वैशम्पाय़न उवाच
कथाभिरनुकूलाभिः सहासित्वा जनार्दनः ||
१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०
भीष्म उवाच
कथाभिरनुकूलाभी राजानमभिरामय़त् ||
३९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ९२
वैशम्पाय़न उवाच
कथाभिरनुरूपाभिः कृष्णस्यामिततेजसः |
३ क
वन पर्व
अध्याय २
व्राह्मणा ऊचुः
कथाभिश्चानुकूलाभिः सह रंस्यामहे वने ||
११ ख
वन पर्व
अध्याय २०२
मार्कण्डेय़ उवाच
कथामकथय़द्भूय़ो मनसः प्रीतिवर्धनीम् ||
१ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २६
वैशम्पाय़न उवाच
कथामिमामकथय़त्सर्वप्रत्यक्षदर्शिवान् ||
५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६९
सञ्जय़ उवाच
कथामेतां महावाहो दिव्यामकथय़त्प्रभुः ||
२३ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४३
सूत उवाच
कथावशेषं धर्मज्ञो वनवासस्य सत्तम ||
१८ ख