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शल्य पर्व
अध्याय ३०
सञ्जय़ उवाच
क्व च विक्रान्तता याता क्व च विस्फूर्जितं महत् ||
३१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३१
धृतराष्ट्र उवाच
क्व च वीभत्सुरभवद्यत्कर्णोऽय़ाद्युधिष्ठिरम् |
८ क
कर्ण पर्व
अध्याय २६
सञ्जय़ उवाच
क्व च हि नरवरो धनञ्जय़ः; क्व पुनरिह त्वमुपारमावुध ||
६२ ख
वन पर्व
अध्याय १११
ऋश्यशृङ्ग उवाच
क्व चाश्रमस्तव किं नाम चेदं; व्रतं व्रह्मंश्चरसि हि देववत्त्वम् ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय १५
युधिष्ठिर उवाच
क्व चासीद्विप्रवासस्ते किं वाकार्षीः प्रवासकः ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय २८१
सत्यवानु उवाच
क्व चासौ पुरुषः श्यामो योऽसौ मां सञ्चकर्ष ह ||
६३ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३३
वैशम्पाय़न उवाच
क्व चासौ विदुरो राजन्नैनं पश्यामहे वय़म् |
१४ क
वन पर्व
अध्याय १८२
वैशम्पाय़न उवाच
क्व चासौ व्रूत सहिताः पश्यध्वं मे तपोवलम् ||
११ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १५८
सञ्जय़ उवाच
क्व तदा गाण्डिवं तेऽभूद्यत्त्वं दासपणे जितः |
२८ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १७
वैशम्पाय़न उवाच
क्व तदा द्रोणभीष्मौ तौ सोमदत्तोऽपि वाभवत् ||
२० ग
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १७
वैशम्पाय़न उवाच
क्व तदा धृतराष्ट्रस्य स्नेहोऽस्मास्वभवत्तदा ||
१९ ग
उद्योग पर्व
अध्याय १५८
सञ्जय़ उवाच
क्व तदा भीमसेनस्य वलमासीच्च फल्गुन ||
२८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ४८
वैशम्पाय़न उवाच
क्व तदा सूतपुत्रोऽभूद्य इदानीं वृषाय़ते ||
३९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय २७
व्राह्मण्यु उवाच
क्व तद्वनं महाप्राज्ञ के वृक्षाः सरितश्च काः |
३ क
शल्य पर्व
अध्याय ३०
सञ्जय़ उवाच
क्व ते कृतास्त्रता याता किं च शेषे जलाशय़े |
३२ क
शल्य पर्व
अध्याय ३०
सञ्जय़ उवाच
क्व ते तत्पौरुषं यातं क्व च मानः सुय़ोधन |
३१ क
शल्य पर्व
अध्याय ६४
सञ्जय़ उवाच
क्व ते तदमलं छत्रं व्यजनं क्व च पार्थिव |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय १६५
भीष्म उवाच
क्व ते निवासः कल्याण किङ्गोत्रा व्राह्मणी च ते |
४ क
आदि पर्व
अध्याय ३६
सूत उवाच
क्व ते पुरुषमानित्वं क्व ते वाचस्तथाविधाः |
२६ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय २
युधिष्ठिर उवाच
क्व ते महारथाः सर्वे शार्दूलसमविक्रमाः |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय ९८
सञ्जय़ उवाच
क्व ते मानश्च दर्पश्च क्व च तद्वीर गर्जितम् |
७ क
उद्योग पर्व
अध्याय ९४
वैशम्पाय़न उवाच
क्व तौ वीरौ क्वजन्मानौ किङ्कर्माणौ च कौ च तौ ||
१३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११८
भीष्म उवाच
क्व धावसि तदाचक्ष्व कुतस्ते भय़मागतम् ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय ५१
वृहदश्व उवाच
क्व नु ते क्षत्रिय़ाः शूरा न हि पश्यामि तानहम् |
१७ क
वन पर्व
अध्याय ६१
दमय़न्त्यु उवाच
क्व नु ते तापसाः सर्वे क्व तदाश्रममण्डलम् ||
९३ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
क्व नु ते पार्थिवा व्रह्मन्नैतान्पश्यामि नारद |
२५ क
शल्य पर्व
अध्याय ३
सञ्जय़ उवाच
क्व नु ते सूतपुत्रोऽभूत्क्व नु द्रोणः सहानुगः |
३० क
विराट पर्व
अध्याय १५
द्रौपद्यु उवाच
क्व नु तेषाममर्षश्च वीर्यं तेजश्च वर्तते |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय १०५
भीष्म उवाच
क्व नु तेऽद्य पिता राजन्क्व नु तेऽद्य पितामहः |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय २८
अश्मो उवाच
क्व नु तेऽद्य पिता राजन्क्व नु तेऽद्य पितामहः |
५२ क
वन पर्व
अध्याय ६७
वृहदश्व उवाच
क्व नु त्वं कितव छित्त्वा वस्त्रार्धं प्रस्थितो मम |
९ क
वन पर्व
अध्याय ७२
केशिन्यु उवाच
क्व नु त्वं कितव छित्त्वा वस्त्रार्धं प्रस्थितो मम |
१८ क
स्त्री पर्व
अध्याय ११
वैशम्पाय़न उवाच
क्व नु धर्मज्ञता राज्ञः क्व नु साद्यानृशंसता |
७ क
आदि पर्व
अध्याय २०९
वर्गो उवाच
क्व नु नाम वय़ं सर्वाः कालेनाल्पेन तं नरम् |
१३ क
वन पर्व
अध्याय ६१
दमय़न्त्यु उवाच
क्व नु यास्यसि सार्थोऽय़मेतदाख्यातुमर्हथ ||
१२४ ख
वन पर्व
अध्याय ६१
दमय़न्त्यु उवाच
क्व नु राजन्गतोऽसीह त्यक्त्वा मां निर्जने वने ||
१२ ख
आदि पर्व
अध्याय २२०
वैशम्पाय़न उवाच
क्व नु शीघ्रमपत्यं स्याद्वहुलं चेत्यचिन्तय़त् ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय ६४
वृहदश्व उवाच
क्व नु सा क्षुत्पिपासार्ता श्रान्ता शेते तपस्विनी |
१० क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३४
अर्जुन उवाच
क्व नु सा व्राह्मणी कृष्ण क्व चासौ व्राह्मणर्षभः |
११ क
विराट पर्व
अध्याय ३९
उत्तर उवाच
क्व नु स्विदर्जुनः पार्थः कौरव्यो वा युधिष्ठिरः |
२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५६
उत्तङ्क उवाच
क्व पत्नी भवतः शक्या मय़ा द्रष्टुं नरेश्वर |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय १७५
वैशम्पाय़न उवाच
क्व भवन्तो गमिष्यन्ति कुतो वागच्छतेति ह ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय ३८
सूत उवाच
क्व भवांस्त्वरितो याति किं च कार्यं चिकीर्षति ||
३५ ख
आदि पर्व
अध्याय ४६
मन्त्रिण ऊचुः
क्व भवांस्त्वरितो याति किं च कार्यं चिकीर्षति ||
१५ ग
आदि पर्व
अध्याय ६८
दुःषन्त उवाच
क्व महर्षिः सदैवोग्रः साप्सरा क्व च मेनका |
७७ क
द्रोण पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
क्व युद्धं क्व मुनित्वं च वनं गच्छ वृकोदर |
७४ क
स्त्री पर्व
अध्याय १५
वैशम्पाय़न उवाच
क्व स राजेति सक्रोधा पुत्रपौत्रवधार्दिता ||
१ ख
विराट पर्व
अध्याय ६४
विराट उवाच
क्व स वीरो महावाहुर्देवपुत्रो महाय़शाः |
३० क
उद्योग पर्व
अध्याय १७५
होत्रवाहन उवाच
क्व सम्प्रति महावाहो जामदग्न्यः प्रतापवान् |
११ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६४
दुर्योधन उवाच
क्व सा क्रीडा गतास्माकं वाल्ये वै शिनिपुङ्गव |
२८ क